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kathua: लघु पनबिजली परियोजनाओं से बदलेगी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की तकदीर, ऊर्जा उत्पादन के साथ आएंगे रोजगार

Mon, 11 May 2026 06:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा साहिल खजूरिया, कठुआ
साहिल खजूरिया, कठुआ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 11 May 2026 06:47 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने लघु पनबिजली विकास योजना को मंजूरी देकर अपनी नदियों से पाकिस्तान जाने वाले पानी की हर बूंद का इस्तेमाल करने का रास्ता तैयार कर दिया है।

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Small hydropower projects will change the fate of Jammu, Kashmir and Ladakh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद

विस्तार

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को सबक सिखाने के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की नदियों में अपने हिस्से का पानी पूरा इस्तेमाल करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने लघु पनबिजली विकास योजना को मंजूरी देकर अपनी नदियों से पाकिस्तान जाने वाले पानी की हर बूंद का इस्तेमाल करने का रास्ता तैयार कर दिया है। इस योजना के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 25 मेगावॉट तक की पनबिजली परियोजना लगाई जा सकेगी। निवेशकों को सब्सिडी भी मिलेगी। आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल इसी सप्ताह खोल दिया जाएगा।

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रन ऑफ द रिवर परियोजनाओं में अड़चनों के अस्थायी तौर पर हटने से केंद्र सरकार अब छोटी पनबिजली परियोजनाओं को सीमावर्ती जिलों में बढ़ावा दे रही है। यह योजना सीमावर्ती राज्यों विशेषकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के नए अवसर लेकर आई है। यह कदम न केवल स्थानीय बिजली की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि भारत की रणनीतिक जल-कूटनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा। परियोजनाओं के लिए नई योजना को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। सूत्रों के अनुसार नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इसी सप्ताह इसका आधिकारिक पोर्टल लांच करने जा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से निवेशक छोटी पनबिजली परियोजनाओं में आवेदन कर सकेंगे।
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जानें लघु पनबिजली विकास योजना के बारे में

  • योजना के तहत एक से 25 मेगावॉट क्षमता वाली पनबिजली परियोजनाओं को लगाया जा सकेगा। लक्ष्य है कि देश में लगभग 1500 मेगावॉट की नई लघु जल विद्युत क्षमता विकसित की जाए। इसके लिए देशभर में ऐसी लगभग 200 पनबिजली परियोजनाएं तैयार होंगी
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  • विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी से सटे जिलों में परियोजना लागत का 30 प्रतिशत या प्रति मेगावॉट अधिकतम 3.6 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। अन्य जिलों में यह सहायता 20 प्रतिशत या प्रति मेगावॉट 2.4 करोड़ रुपये तक होगी
  • इस योजना का कुल परिव्यय 2584.60 करोड़ रुपये है। इसे वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू किया जा रहा है
  • खासतौर से कठुआ जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण के बीच बिजली की बढ़ी हुई मांग और नए उद्योग लगाने के लिए ऊर्जा उपलब्धता के नए रास्ते भी तैयार होंगे। जम्मू और कश्मीर (1,312 मेगावाट क्षमता) और लद्दाख (395 मेगावाट) के साथ इस परियोजना का रणनीतिक महत्व बढ़ाते हैं

ऊर्जा उत्पादन के साथ रोजगार भी बनेंगे
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कठुआ, पुंछ, राजोरी और कुपवाड़ा जैसे जिलों में लघु पनबिजली विकास योजना से न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। निर्माण में रोजगार मिलने के अलावा संचालन और रखरखाव में भी ग्रामीण युवाओं को स्थायी अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं का होगा विस्तार
रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाएं बड़े बांध बनाए बिना नदी के पानी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करके बिजली उत्पादन करती हैं। इसमें पानी के एक हिस्से को नहरों और पाइप के माध्यम से मोड़कर टरबाइन चलाए जाते हैं। इसके बाद पानी को वापस मुख्यधारा में छोड़ दिया जाता है। जम्मू-कश्मीर में पहले से ही 1312 मेगावॉट की लघु जल विद्युत क्षमता चिह्नित है लेकिन इसका उपयोग सीमित है।



नई योजना से अप्रयुक्त क्षमता का दोहन संभव हो सकेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे न केवल स्थानीय उद्योगों और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।

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