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मोह से निवृत्ति का साधन है सत्संग और हरि कथा

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Satsang and Hari Katha are the means to get rid of attachment
कथा का श्रवण करती संगत। संवाद - फोटो : KATHUA
कठुआ। ऐरवां स्थित आपशंभू मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन जारी है। रविवार को चौथे दिन कथावाचक सुभाष शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में विवेक और वैराग्य का होना अति आवश्यक है। यदि यह दोनों गुण मनुष्य में नहीं तो वह कुछ भी नहीं। विवेक, वैराग्य और मोह की निवृत्ति का उपाय है सत्संग और हरि कथा।
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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिनु सत्संग न हरि कथा तेहि बिनु मोहन भागा। मोह गए बिनु राम पद होइ न दृढ अनुरागा।। अर्थात सत्संग के बिना हमें हरि कथा सुनने को नहीं मिलती और उसके बिना मोह भी नहीं जाता। मोह के गए बिना मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरणों से प्रेम नहीं होता। शास्त्री जी ने कहा कि महापुरुषों का कथन है कि बिना सत्संग विवेक नहीं होता है। मोक्ष प्राप्ति का सबसे सहज साधन सत्संग है। तपस्या और त्याग से भी भगवान इतने प्रसन्न नहीं होते जितना सत्संग से होते हैं। प्रगाढ़ प्रेम के साथ किया जाने वाला सत्संग ईश्वर को प्राप्त करना सबसे सरल उपाय है। शास्त्री ने उपस्थित भक्तों को समझाया कि मनुष्य सदैव सत्संग की अमृतधारा में डुबकी लगाता रहे तो अपने जीवन को सफल बना सकता है। जीवन में सुख-शांति, समृद्धि सत्संग से संभव है। जीवन के तमाम अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर भी हमें सत्संग के माध्यम से मिल जाते हैं।
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