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रंजीत सागर झील
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वर्ष 2001 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि रंजीत सागर झील का जलस्तर 493.97 मीटर तक पहुंच गया है। आलम यह है कि बसोहली कसबे समेत आसपास के दर्जनों गांव को होने वाली रंजीत सागर झील से पेयजल की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पिछले एक माह में जलाशय का न्यूनतम 493.27 मीटर तक दर्ज किया गया है। इसके पीछे एक बड़ा कारण इस साल कम हुई बारिश और रंजीत सागर जलाशय में चल रहे रूटीन मेंटेनेंस कार्यों को माना जा रहा है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार फरवरी माह में आम तौर पर रंजीत सागर झील का जलस्तर 510 मीटर के लगभग रहता है। ऐसे में इस बार संबंधित विभाग भी इसके लिए तैयार नहीं था। ऐसे में वर्तमान में जहां जलस्तर कम होने से प्लाही समेत शमशान घाट के नजदीक बोरवेल सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं वहीं ग्रेटिवी से होने वाली पानी की सप्लाई भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
बसोहली और आसपास के इलाकों में रोजाना साढ़े तीन लाख लीटर पानी की सप्लाई जलशक्ति विभाग सुनिश्चित करता है। मांग हालांकि इससे भी कहीं अधिक है। ऐसे में कई लाइनों पर एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई दी जाती रही है। वर्तमान हालात के बीच पानी की उपलब्धता आधे के लगभग रह गई है जिससे आम लोगों की दिक्कतें काफी बढ़ चुकी हैं। रंजीत सागर झील से पानी को बूस्ट कर फिल्ट्रेशन प्लोट तक भेजा जाता है, जिसके बाद उसे ओएचटी में सप्लाई किया जाता है। झील का जलस्तर गिरने से पानी की झील से पंपिंग भी मुश्किल होती जा रही है।
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कसबे में मिल रही दस से 15 मिनट की पानी सप्लाई
बसोहली नगर के वार्ड 1 से लेकर 13 तक जलशक्ति विभाग की पाइप लाइन द्वारा केवल 10 से 15 मिनट की पेयजल सप्लाई दी जा रही है जो कि लोगों के लिए नाकाफी है। वही सुबह जिस समय पानी की सप्लाई होती है उस समय लोगों ने अपने घरों में निजी मोटर नलो के साथ लगाई होती है पानी आने के साथ नलों के साथ लगाई मोटर को ऑन कर देते हैं जिसकी वजह से बाकी लोगों को बहुत कम पानी मिल पाता है बिजली ना होने की सूरत में लोग इनवर्टर पर इन मोटरों का इस्तेमाल करते हैं।
जलशक्ति विभाग की बढ़ी मुश्किलें
रंजीत सागर झील का जलस्तर कम होने से भी जल शक्ति विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जल शक्ति विभाग की मेकेनिकल विंग के जेई अनूप शर्मा ने बताया कि रंजीत सागर झील में लगाए गए जल शक्ति विभाग के बेड़े से पानी लिफ्ट करने के लिए यहां पहले 8 पाइपे लगती थी, लेकिन इस बार जलस्तर कम होने के कारण 19 पाईपे लोड करनी पड़ रही हैं करीब 200 फुट जलस्तर कम हुआ है। प्रेता नगरोटा डगवेल का लेवल डाउन हुआ है जबकि पलाही डगवेल लेवल भीडाउन हुआ है। श्मशान घाट के नजदीक का डगवेल लगभग पूरी तरह सूख चुका है, शीतलनगर ब्लॉक में गोडल नगाली की ग्रेविटी लाइन से पानी की सप्लाई होती है।
- अनूप शर्मा, जेई, मेकेनिकल विंग
हमारे पास 2011 की जनगणना के हिसाब से पानी पूरा होना चाहिए। अभी हम पानी की सप्लाई दे रहे हैं। लोगों की मांग है पानी की सप्लाई में बढ़ोतरी करने की। बसोहली के 13 वार्डों, पलाही, रैहन, मंडला को मिलाकर करीब 13 सौ लीगल कनेक्शन है, अवैध कनेक्शनों की संख्या इनसे ज्यादा है। पानी की किल्लत को खत्म करने के लिए प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है प्रोजेक्ट के तहत एक कनेक्शन में 55 लीटर पानी प्रतिदिन देना है श्मशान घाट के नजदीक ट्यूबेल सूख चुका है प्लाई का डिस्चार्ज कम हो गया है उसमें भी पूरा पानी नहीं आ रहा है जिसकी वजह से परेशानी आ रही है। ढक्की मोहल्ले मे 30 हजार गैलन, सेरी मे 30 हजार गैलन, जल शक्ति विभाग के गेस्ट हाउस के नजदीक 50 हजार और गस्ट हाउस से कुछ दूर 1 लाख 20 हजार गैलन कैपेसिटी की स्टोरेज है। पानी की किल्लत को कम करने के लिए नये प्रोजेक्ट बनाए जा रहें है।
-दलवीर सिंह, जेई सिविल, जल शक्ति विभाग
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार फरवरी माह में आम तौर पर रंजीत सागर झील का जलस्तर 510 मीटर के लगभग रहता है। ऐसे में इस बार संबंधित विभाग भी इसके लिए तैयार नहीं था। ऐसे में वर्तमान में जहां जलस्तर कम होने से प्लाही समेत शमशान घाट के नजदीक बोरवेल सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं वहीं ग्रेटिवी से होने वाली पानी की सप्लाई भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
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बसोहली और आसपास के इलाकों में रोजाना साढ़े तीन लाख लीटर पानी की सप्लाई जलशक्ति विभाग सुनिश्चित करता है। मांग हालांकि इससे भी कहीं अधिक है। ऐसे में कई लाइनों पर एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई दी जाती रही है। वर्तमान हालात के बीच पानी की उपलब्धता आधे के लगभग रह गई है जिससे आम लोगों की दिक्कतें काफी बढ़ चुकी हैं। रंजीत सागर झील से पानी को बूस्ट कर फिल्ट्रेशन प्लोट तक भेजा जाता है, जिसके बाद उसे ओएचटी में सप्लाई किया जाता है। झील का जलस्तर गिरने से पानी की झील से पंपिंग भी मुश्किल होती जा रही है।
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कसबे में मिल रही दस से 15 मिनट की पानी सप्लाई
बसोहली नगर के वार्ड 1 से लेकर 13 तक जलशक्ति विभाग की पाइप लाइन द्वारा केवल 10 से 15 मिनट की पेयजल सप्लाई दी जा रही है जो कि लोगों के लिए नाकाफी है। वही सुबह जिस समय पानी की सप्लाई होती है उस समय लोगों ने अपने घरों में निजी मोटर नलो के साथ लगाई होती है पानी आने के साथ नलों के साथ लगाई मोटर को ऑन कर देते हैं जिसकी वजह से बाकी लोगों को बहुत कम पानी मिल पाता है बिजली ना होने की सूरत में लोग इनवर्टर पर इन मोटरों का इस्तेमाल करते हैं।
जलशक्ति विभाग की बढ़ी मुश्किलें
रंजीत सागर झील का जलस्तर कम होने से भी जल शक्ति विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जल शक्ति विभाग की मेकेनिकल विंग के जेई अनूप शर्मा ने बताया कि रंजीत सागर झील में लगाए गए जल शक्ति विभाग के बेड़े से पानी लिफ्ट करने के लिए यहां पहले 8 पाइपे लगती थी, लेकिन इस बार जलस्तर कम होने के कारण 19 पाईपे लोड करनी पड़ रही हैं करीब 200 फुट जलस्तर कम हुआ है। प्रेता नगरोटा डगवेल का लेवल डाउन हुआ है जबकि पलाही डगवेल लेवल भीडाउन हुआ है। श्मशान घाट के नजदीक का डगवेल लगभग पूरी तरह सूख चुका है, शीतलनगर ब्लॉक में गोडल नगाली की ग्रेविटी लाइन से पानी की सप्लाई होती है।
- अनूप शर्मा, जेई, मेकेनिकल विंग
हमारे पास 2011 की जनगणना के हिसाब से पानी पूरा होना चाहिए। अभी हम पानी की सप्लाई दे रहे हैं। लोगों की मांग है पानी की सप्लाई में बढ़ोतरी करने की। बसोहली के 13 वार्डों, पलाही, रैहन, मंडला को मिलाकर करीब 13 सौ लीगल कनेक्शन है, अवैध कनेक्शनों की संख्या इनसे ज्यादा है। पानी की किल्लत को खत्म करने के लिए प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है प्रोजेक्ट के तहत एक कनेक्शन में 55 लीटर पानी प्रतिदिन देना है श्मशान घाट के नजदीक ट्यूबेल सूख चुका है प्लाई का डिस्चार्ज कम हो गया है उसमें भी पूरा पानी नहीं आ रहा है जिसकी वजह से परेशानी आ रही है। ढक्की मोहल्ले मे 30 हजार गैलन, सेरी मे 30 हजार गैलन, जल शक्ति विभाग के गेस्ट हाउस के नजदीक 50 हजार और गस्ट हाउस से कुछ दूर 1 लाख 20 हजार गैलन कैपेसिटी की स्टोरेज है। पानी की किल्लत को कम करने के लिए नये प्रोजेक्ट बनाए जा रहें है।
-दलवीर सिंह, जेई सिविल, जल शक्ति विभाग