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कॉलेज रोड जाम कर किसानों से जमीन वापस लिए जाने का किया विरोध
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कॉलेज रोड जाम कर किसानों की जमीन वापस किए जाने की मांग करते बसपा नेता व किसान परिवार के सदस्य। संव?
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। जिला में सरकारी भूमि खाली कराने की राजस्व विभाग की तेज हो रही कार्रवाई का विरोध भी बढ़ता जा रहा है। बुधवार को बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सोमराज मजोत्रा के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने कार्रवाई के खिलाफ डीसी कार्यालय के समक्ष कॉलेज रोड जाम कर दिया। मार्ग बंद होने की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों से मार्ग को खोलने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने मांग पर अड़े रहे। करीब आधा घंटा तक मार्ग जाम रहने के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार विक्रम कुमार ने प्रदर्शनकारियों को सुना और उनकी मांगों का ज्ञापन लिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मार्ग को खोल दिया।
इस दौरान मजोत्रा ने सरकार पर जनविरोधी फैसलों को लागू करने के लिए निंदा करते हुए किसानों से जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया बंद करने की मांग की। उन्होने कहा कि सरकार गरीबी को नही गरीबों को मिटाने पर तुली हुई है। हमारा संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि भारत विश्व प्रसिद्ध लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष और कल्याणकारी राज्य है। जहां गरीब जनता के कल्याण, उत्थान और विकास के लिए सभी कानून पारित किए जाते हैं ताकि उनके जीवन स्तर को ऊंचा किया जा सके। लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर प्रदेश में आय पैदा करने वाले स्रोत को नष्ट करने पर आमादा है। कहा कि इस सरकार ने गरीबों और किसानों की आय के सभी संसाधनों को हड़प कर उच्च वर्ग व्यापारियों और औद्योगिक घरानों को खुश करने की कोशिश की है। आरोप लगाया कि सरकार ने सरकारी मशीनरी का उपयोग करके मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर विशेष रूप से कर लगाकर गरीबी के बजाय गरीबों को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। जो कि एक आम गरीब आदमी के लोकतांत्रिक अधिकार छीनने का प्रयास है। वहीं इस मौके पर मौजूद नगरी ब्लॉक से जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा ने कहा कि यह एक खुला तथ्य है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है। 1971 में बड़े जमींदारों से वापस ली गई भूमि को भूमिहीनों को सौंप दिया गया था। लेकिन राजस्व अधिकारियों ने गरीब लोगों के पक्ष में अपना काम नहीं किया। गरीबों की भूमि को हड़पने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तौर पर इस भूमि को सरकारी भूमि के रूप में रखा गया था।
केंद्र सरकार के दबाव में यूटी सरकार ने इस प्रक्रिया में न्यायपालिका का इस्तेमाल किया है और गरीबों से जमीन छीनने के लिए माननीय उच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त किया है, भले ही लोग साठ के दशक से पहले उस जमीन पर खेती कर रहे हों। कहा कि यहां तक कि कुछ नामांतरण भी रद्द कर दिए गए हैं और राज्य की भूमि घोषित कर दी गई है। जिसे वह कतई बर्दाश्त नही करेंगे। अगर सरकार की ओर से किसानों के हित को ध्यान में नही रखा गया तो उनकी पार्टी एक बड़ा जनआंदोलन करने से भी पीछे नही रहेगी। इस मौके पर विजय कुमार, राज कुमार, जनक राज, सुरेंद्र पाल, हेम राज सुनील मजोत्रा, संतोष कुमारी, तारो देवी, राजेंद्र कुमार आदि किसान उपस्थित रहे।
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इस दौरान मजोत्रा ने सरकार पर जनविरोधी फैसलों को लागू करने के लिए निंदा करते हुए किसानों से जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया बंद करने की मांग की। उन्होने कहा कि सरकार गरीबी को नही गरीबों को मिटाने पर तुली हुई है। हमारा संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि भारत विश्व प्रसिद्ध लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष और कल्याणकारी राज्य है। जहां गरीब जनता के कल्याण, उत्थान और विकास के लिए सभी कानून पारित किए जाते हैं ताकि उनके जीवन स्तर को ऊंचा किया जा सके। लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर प्रदेश में आय पैदा करने वाले स्रोत को नष्ट करने पर आमादा है। कहा कि इस सरकार ने गरीबों और किसानों की आय के सभी संसाधनों को हड़प कर उच्च वर्ग व्यापारियों और औद्योगिक घरानों को खुश करने की कोशिश की है। आरोप लगाया कि सरकार ने सरकारी मशीनरी का उपयोग करके मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर विशेष रूप से कर लगाकर गरीबी के बजाय गरीबों को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। जो कि एक आम गरीब आदमी के लोकतांत्रिक अधिकार छीनने का प्रयास है। वहीं इस मौके पर मौजूद नगरी ब्लॉक से जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा ने कहा कि यह एक खुला तथ्य है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है। 1971 में बड़े जमींदारों से वापस ली गई भूमि को भूमिहीनों को सौंप दिया गया था। लेकिन राजस्व अधिकारियों ने गरीब लोगों के पक्ष में अपना काम नहीं किया। गरीबों की भूमि को हड़पने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तौर पर इस भूमि को सरकारी भूमि के रूप में रखा गया था।
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केंद्र सरकार के दबाव में यूटी सरकार ने इस प्रक्रिया में न्यायपालिका का इस्तेमाल किया है और गरीबों से जमीन छीनने के लिए माननीय उच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त किया है, भले ही लोग साठ के दशक से पहले उस जमीन पर खेती कर रहे हों। कहा कि यहां तक कि कुछ नामांतरण भी रद्द कर दिए गए हैं और राज्य की भूमि घोषित कर दी गई है। जिसे वह कतई बर्दाश्त नही करेंगे। अगर सरकार की ओर से किसानों के हित को ध्यान में नही रखा गया तो उनकी पार्टी एक बड़ा जनआंदोलन करने से भी पीछे नही रहेगी। इस मौके पर विजय कुमार, राज कुमार, जनक राज, सुरेंद्र पाल, हेम राज सुनील मजोत्रा, संतोष कुमारी, तारो देवी, राजेंद्र कुमार आदि किसान उपस्थित रहे।
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