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अनदेखी : पाकिस्तान की गोलाबारी से तो परेशान, सरकार भी नहीं दे रही ध्यान
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सीमावर्ती गांव करोल से पानसर को जाती खस्ताहाल सडक।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों के लोग दशकों से यहां पाकिस्तान की गोलाबारी का दंश झेल रहे हैं। ये लोग गोलाबारी से परेशान तो हैं ही, लेकिन सरकार से भी इनको मलाल है। सीमावर्ती ग्रामीणों कहना है कि पाकिस्तान तो दुश्मनी निभा ही रहा है, लेकिन सरकार का रवैया भी अपनों जैसा नहीं है। वर्षों से वे जीरो लाइन पर बनी करोल से पानसर सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। सीमावर्ती करोल, चक चंगा, छन्न टांडा, गुज्जर चक, कडयाला, मनियारी, पानसर, रठुआ आदि गांव से जुड़ने वाली यह सड़क इतनी खस्ताहाल है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। इन गांवों में अगर कोई बीमार हो जाए या फिर पाकिस्तानी गोलाबारी का शिकार हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए लोगों को काफी परेशान होना पड़ता है। अस्पताल जाने में एक से डेढ़ घंटे का अधिक समय बर्बाद होता है। हाल ही म्रें हुए बैक टू विलेज-3 के कार्यक्रम में भी समस्या उठा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
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मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी, नहीं पता
मनियारी के नायब सरपंच कुलदीप कुमार ने बताया कि 15 साल से सड़क की हालत खस्ता है। यहां वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इसे बनाने की मांग कर चुके हैं, कोई सुनवाई नहीं हुई। अफसोस है कि हम यहां पाकिस्तानी गोलाबारी भी झेल रहे हैं और बुनियादी सुविधाओं को भी तरस रहे हैं। न जाने कब तक सरकारें सीमावर्ती लोगों का मजाक बनाती रहेंगी।
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बिना मोबाइल सिग्नल बच्चे ऑनलाइन कैसे पढ़ें
चक चंगा के निवासी पवन वर्मा ने कहा सरकार की अनदेखी के कारण सीमावर्ती लोग सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। किसी भी सरकार ने यहां के लोगों की समस्याओं को गंभीरता से समझने की कोशिश नहीं की। खस्ताहाल सड़कों के कारण हम बेहतर यातायात की सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे। इन इलाकों में मोबाइल सिग्नल सही ढंग से न मिलने के कारण बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे। गोलाबारी के कारण किसान खेतों में नहीं जा पा रहे।
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हर मंच पर उठा चुके हैं समस्याएं
गुज्जर चक निवासी पवन सैनी ने कहा लगभग एक दर्जन गांवों की नौ हजार के करीब की आवादी खस्ताहाल सड़क के कारण परेशान हो रही है। इस समस्या के समाधान की गुहार, किससे लगाएं अब तो हमें यह भी पता नहीं चलता, क्योंकि शायद ही हमने कोई ऐसा मंच छोड़ा हो जहां इस समस्या के समाधान की मांग न की हो। ऐसा लगता है कि सरकारों ने हमें ऐसे ही हाल में रखने की ठान ली हो।
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बीआरओ से जल्द सड़क बनाने की मांग
बीडीसी चेयरमैन कर्ण कुमार ने बताया कि करीब 13 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए पहले पीडब्ल्यूडी को कहा गया था। लेकिन काम शुरू नही हो पाया। जिसके बाद हमने लिखित में उपराज्यपाल से यह मांग की कि यह सड़क बनाने का काम बीआरओ को दिया जाए। लगभग एक महीना पहले डीसी कठुआ के माध्यम से भी एक पत्र इसी संबंध में बीआरओ को भेजा गया है। उम्मीद है कि वह इस सड़क को अपने अधीन लेकर जल्द यहां काम शुरू करेंगे।
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मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी, नहीं पता
मनियारी के नायब सरपंच कुलदीप कुमार ने बताया कि 15 साल से सड़क की हालत खस्ता है। यहां वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इसे बनाने की मांग कर चुके हैं, कोई सुनवाई नहीं हुई। अफसोस है कि हम यहां पाकिस्तानी गोलाबारी भी झेल रहे हैं और बुनियादी सुविधाओं को भी तरस रहे हैं। न जाने कब तक सरकारें सीमावर्ती लोगों का मजाक बनाती रहेंगी।
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बिना मोबाइल सिग्नल बच्चे ऑनलाइन कैसे पढ़ें
चक चंगा के निवासी पवन वर्मा ने कहा सरकार की अनदेखी के कारण सीमावर्ती लोग सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। किसी भी सरकार ने यहां के लोगों की समस्याओं को गंभीरता से समझने की कोशिश नहीं की। खस्ताहाल सड़कों के कारण हम बेहतर यातायात की सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे। इन इलाकों में मोबाइल सिग्नल सही ढंग से न मिलने के कारण बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे। गोलाबारी के कारण किसान खेतों में नहीं जा पा रहे।
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हर मंच पर उठा चुके हैं समस्याएं
गुज्जर चक निवासी पवन सैनी ने कहा लगभग एक दर्जन गांवों की नौ हजार के करीब की आवादी खस्ताहाल सड़क के कारण परेशान हो रही है। इस समस्या के समाधान की गुहार, किससे लगाएं अब तो हमें यह भी पता नहीं चलता, क्योंकि शायद ही हमने कोई ऐसा मंच छोड़ा हो जहां इस समस्या के समाधान की मांग न की हो। ऐसा लगता है कि सरकारों ने हमें ऐसे ही हाल में रखने की ठान ली हो।
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बीआरओ से जल्द सड़क बनाने की मांग
बीडीसी चेयरमैन कर्ण कुमार ने बताया कि करीब 13 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए पहले पीडब्ल्यूडी को कहा गया था। लेकिन काम शुरू नही हो पाया। जिसके बाद हमने लिखित में उपराज्यपाल से यह मांग की कि यह सड़क बनाने का काम बीआरओ को दिया जाए। लगभग एक महीना पहले डीसी कठुआ के माध्यम से भी एक पत्र इसी संबंध में बीआरओ को भेजा गया है। उम्मीद है कि वह इस सड़क को अपने अधीन लेकर जल्द यहां काम शुरू करेंगे।