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नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी फिर से खतरे में
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ढाई साल के कार्यकाल के भीतर ही लगातार तीसरी बार नगर परिषद अध्यक्ष नरेश शर्मा की कुर्सी खतरे में आ गई है। कठुआ नगर परिषद के 12 पार्षदों ने अध्यक्ष नरेश शर्मा और उपाध्यक्ष के खिलाफ फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया है, जिसे सोमवार सुबह उन्होंने डीसी कठुआ और नगर परिषद कार्यालय में सौंप दिया है।
अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में वार्ड सात के पार्षद अनिरूद्ध शर्मा, वार्ड 14 के पार्षद भोपिंदर राज, वार्ड 17 के पार्षद जोगिंद्र पाल, वार्ड बीस के पार्षद रविंद्र सिंह पठानिया, वार्ड 11 के पार्षद करण सिंह, वार्ड 12 की पार्षद रेणु बाला, वार्ड दस के पार्षद अजय कुमार, वार्ड एक की पार्षद मीरा कुमारी, वार्ड 16 की पार्षद पुष्पा देवी, वार्ड 21 के पार्षद वलजीत सिंह, वार्ड दो के पार्षद चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी, वार्ड 18 की पार्षद वंदना अंदोत्रा शामिल हैं।
पार्षद अनिरूद्ध शर्मा ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव लाने का कारण नरेश शर्मा का व्यवहार रहा है। आरोप लगाया कि अध्यक्ष पार्षदों, नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों के साथ ही अभद्र व्यवहार करते हैं। कहा कि दूसरा कारण नरेश शर्मा की कार्यशैली और कार्य प्रणाली है। नगर परिषद को पारदर्शी और लोक हितैषी होने के साथ-साथ अधिकारियों को लोगों की पहुंच में होना चाहिए।
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कहा कि परिषद अध्यक्ष की कार्यप्रणाली वन मैन शो बन गई थी और यहां तक कि एक करोड़ दस लाख से सफाई का टेंडर भी लगाया गया लेकिन बताए जाने के बावजूद की कर्मचारी पूरे नहीं आते हैं, कार्रवाई नहीं की गई। बताया कि अविश्वास प्रस्ताव का तीसरा कारण परिषद अध्यक्ष का भाजपा के लिए दोहरा चरित्र था। आरोप लगाया कि अध्यक्ष कैमरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, डॉ. जितेंद्र और रवींद्र रैना की तारीफ करते थे, तो वहीं आफ कैमरा उनके लिए अभद्र भाषा प्रयोग करते रहे। इसे बतौर कार्यकर्ता वे सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले कि लोभ, प्रलोभन देकर षड्यंत्र रचे जाएं, उन्हें जल्द से जल्द अविश्वास साबित करने का मौका दिया जाए।
अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों के मकसद कुछ और
नगर परिषद अध्यक्ष नरेश शर्मा ने उनपर पार्षदों की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कहा कि खुद को भाजपा हितैषी बताने वाले विरोधियों के साथ जा मिले हैं और अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से बात करना या अनुमति लेना भी जरूरी नहीं समझा है। उन्होंने कहा कि जिन आरोपों को बताकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, अगर ऐसा ही था, तो उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की क्या वजह थी। कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों के मकसद कुछ और ही है।
उनकी दुकानें बंद हो गईं, इसलिए हो रही तकलीफ
नगर परिषद अध्यक्ष ने दावा किया कि जितना विकास कठुआ में हो रहा है उतना कहीं और नहीं हो रहा। कठुआ काउंसिल दिन रात काम कर रही है। दो दिन पहले तक यही लोग उनके समर्थन में मीडिया में बयानबाजी करते रहे। अभद्रता पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि विरोधियों को अविश्वास प्रस्ताव के लिए कोई बहाना चाहिए। यदि किसी से जोर से बात जाती है, तो इन्हीं के काम के लिए की जाती है। कहा कि ढाई साल का कार्यकाल उन्होंने पूरा कर लिया है और इनकी दुकानें बंद हो गई हैं। ऐसे में इन्हें तकलीफ हो रही है। कहा कि अगर इसी तरह से खींचतान जारी रहती है, तो वे इस्तीफा देने को भी तैयार हैं। कहा कि एक करोड़ दस लाख के सफाई के टेंडर पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इसी महीने काम शुरू हुआ है और राशि जारी नहीं हुई है। जिसे जारी करने से पहले पार्षदों से एनओसी ली जानी है।
... तब समर्थन हासिल करने में रहे थे कामयाब
नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ दो जुलाई 2020 को भी कई पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस दौरान हस्ताक्षर करने वालों में वार्ड एक की पार्षद मीरा, पांच के पार्षद अशोक कुमार, दस के पार्षद अजय कुमार, 11 के पार्षद करण सिंह, 13 के पार्षद रंधीर सिंह, 14 के पार्षद भोपिंद्र राज, 16 की पार्षद पुष्पा देवी, 17 के पार्षद जोगिंद्र पाल, 18 की पार्षद वंदना अंडोत्रा, 20 के पार्षद रविंद्र सिंह पठानिया और 21 के पार्षद बलजीत सिंह विल्ली शामिल रहे। तब फ्लोर टेस्ट में नरेश शर्मा समर्थन हासिल कर अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे थे।
स्पेशल मीटिंग के लिए दस दिन का दिया है समय
डीसी कठुआ के माध्यम से पार्षदों की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव हासिल हो गया है। दस दिन का समय नगर परिषद अध्यक्ष को स्पेशल मीटिंग के लिए दिया गया है। यदि इस दौरान यह बैठक नहीं होती है, तो प्रशासन स्पेशल मीटिंग बुलाएगा।
-दिलीप अबरोल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में वार्ड सात के पार्षद अनिरूद्ध शर्मा, वार्ड 14 के पार्षद भोपिंदर राज, वार्ड 17 के पार्षद जोगिंद्र पाल, वार्ड बीस के पार्षद रविंद्र सिंह पठानिया, वार्ड 11 के पार्षद करण सिंह, वार्ड 12 की पार्षद रेणु बाला, वार्ड दस के पार्षद अजय कुमार, वार्ड एक की पार्षद मीरा कुमारी, वार्ड 16 की पार्षद पुष्पा देवी, वार्ड 21 के पार्षद वलजीत सिंह, वार्ड दो के पार्षद चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी, वार्ड 18 की पार्षद वंदना अंदोत्रा शामिल हैं।
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पार्षद अनिरूद्ध शर्मा ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव लाने का कारण नरेश शर्मा का व्यवहार रहा है। आरोप लगाया कि अध्यक्ष पार्षदों, नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों के साथ ही अभद्र व्यवहार करते हैं। कहा कि दूसरा कारण नरेश शर्मा की कार्यशैली और कार्य प्रणाली है। नगर परिषद को पारदर्शी और लोक हितैषी होने के साथ-साथ अधिकारियों को लोगों की पहुंच में होना चाहिए।
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कहा कि परिषद अध्यक्ष की कार्यप्रणाली वन मैन शो बन गई थी और यहां तक कि एक करोड़ दस लाख से सफाई का टेंडर भी लगाया गया लेकिन बताए जाने के बावजूद की कर्मचारी पूरे नहीं आते हैं, कार्रवाई नहीं की गई। बताया कि अविश्वास प्रस्ताव का तीसरा कारण परिषद अध्यक्ष का भाजपा के लिए दोहरा चरित्र था। आरोप लगाया कि अध्यक्ष कैमरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, डॉ. जितेंद्र और रवींद्र रैना की तारीफ करते थे, तो वहीं आफ कैमरा उनके लिए अभद्र भाषा प्रयोग करते रहे। इसे बतौर कार्यकर्ता वे सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले कि लोभ, प्रलोभन देकर षड्यंत्र रचे जाएं, उन्हें जल्द से जल्द अविश्वास साबित करने का मौका दिया जाए।
अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों के मकसद कुछ और
नगर परिषद अध्यक्ष नरेश शर्मा ने उनपर पार्षदों की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कहा कि खुद को भाजपा हितैषी बताने वाले विरोधियों के साथ जा मिले हैं और अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से बात करना या अनुमति लेना भी जरूरी नहीं समझा है। उन्होंने कहा कि जिन आरोपों को बताकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, अगर ऐसा ही था, तो उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की क्या वजह थी। कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों के मकसद कुछ और ही है।
उनकी दुकानें बंद हो गईं, इसलिए हो रही तकलीफ
नगर परिषद अध्यक्ष ने दावा किया कि जितना विकास कठुआ में हो रहा है उतना कहीं और नहीं हो रहा। कठुआ काउंसिल दिन रात काम कर रही है। दो दिन पहले तक यही लोग उनके समर्थन में मीडिया में बयानबाजी करते रहे। अभद्रता पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि विरोधियों को अविश्वास प्रस्ताव के लिए कोई बहाना चाहिए। यदि किसी से जोर से बात जाती है, तो इन्हीं के काम के लिए की जाती है। कहा कि ढाई साल का कार्यकाल उन्होंने पूरा कर लिया है और इनकी दुकानें बंद हो गई हैं। ऐसे में इन्हें तकलीफ हो रही है। कहा कि अगर इसी तरह से खींचतान जारी रहती है, तो वे इस्तीफा देने को भी तैयार हैं। कहा कि एक करोड़ दस लाख के सफाई के टेंडर पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इसी महीने काम शुरू हुआ है और राशि जारी नहीं हुई है। जिसे जारी करने से पहले पार्षदों से एनओसी ली जानी है।
... तब समर्थन हासिल करने में रहे थे कामयाब
नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ दो जुलाई 2020 को भी कई पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस दौरान हस्ताक्षर करने वालों में वार्ड एक की पार्षद मीरा, पांच के पार्षद अशोक कुमार, दस के पार्षद अजय कुमार, 11 के पार्षद करण सिंह, 13 के पार्षद रंधीर सिंह, 14 के पार्षद भोपिंद्र राज, 16 की पार्षद पुष्पा देवी, 17 के पार्षद जोगिंद्र पाल, 18 की पार्षद वंदना अंडोत्रा, 20 के पार्षद रविंद्र सिंह पठानिया और 21 के पार्षद बलजीत सिंह विल्ली शामिल रहे। तब फ्लोर टेस्ट में नरेश शर्मा समर्थन हासिल कर अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे थे।
स्पेशल मीटिंग के लिए दस दिन का दिया है समय
डीसी कठुआ के माध्यम से पार्षदों की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव हासिल हो गया है। दस दिन का समय नगर परिषद अध्यक्ष को स्पेशल मीटिंग के लिए दिया गया है। यदि इस दौरान यह बैठक नहीं होती है, तो प्रशासन स्पेशल मीटिंग बुलाएगा।
-दिलीप अबरोल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद