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Kathua: अब जम्मू-कश्मीर में बुलेट ट्रेन की तैयारी, 240 किमी. का कॉरिडोर; दो घंटे में पहुंचेंगे जम्मू से अमृतसर
Sun, 10 May 2026 03:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
साहिल खजूरिया, कठुआ
साहिल खजूरिया, कठुआ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 10 May 2026 03:22 AM IST
सार
कश्मीर तक वंदे भारत ट्रेन पहुंचाने के बाद रेल मंत्रालय ने अमृतसर से जम्मू के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने पर काम शुरू कर दिया है।
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बुलेट ट्रेन
- फोटो : ANI
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी को नया आयाम देने के लिए रेलवे अब यहां बुलेट ट्रेन लाने की तैयारी कर रहा है। कश्मीर तक वंदे भारत ट्रेन पहुंचाने के बाद रेल मंत्रालय ने अमृतसर से जम्मू के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने पर काम शुरू कर दिया है।
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नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन अमृतसर से जम्मू के बीच नए ट्रैक के लिए जल्द ही अंतिम सर्वे शुरू करने वाला है। सर्वे नई लिडार तकनीक से होगा। ये सर्वे दिल्ली से अमृतसर तक हुए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर सर्वे के विस्तार का हिस्सा है।
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अमृतसर और जम्मू के बीच लगभग 240 किलोमीटर लंबा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर तैयार करने की योजना बनाई गई है। इस कॉरिडोर पर ही बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है। इससे दोनों धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों के बीच यात्रा के समय में अहम बदलाव आएगा। अब तक ट्रेन से अमृतसर से जम्मू के बीच चार से पांच घंटे का सफर है। बुलेट ट्रेन से ये दूरी सिर्फ दो घंटे पूरी हो सकेगी। ट्रैक को 350 किलोमीटर की गति से ट्रेन दौड़ाने के लिए तैयार किया जाएगा।
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बुलेट ट्रेन 250 से 320 की गति से सकेगी। ट्रैक के अंतिम सर्वे में हवाई सर्वे, ड्रोन और एलआईडीएआर तकनीक का इस्तेमाल होगो। ट्रेन चलने से यात्रियों के समय की बचत होगी। पर्यटन, व्यापार और तीर्थयात्रा को नई गति मिलेगी। दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालु चौबीस घंटे के भीतर लौट भी सकेंगे। देश में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर अगले साल अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के लिए अंतिम सर्वेक्षण की तैयारी शुरू हो चुकी है।
सर्वेक्षण को आधुनिक बनाने के लिए हवाई और ड्रोन आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे मार्ग की भौगोलिक स्थिति, पुलों और सुरंगों की आवश्यकता तथा पर्यावरणीय पहलुओं का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
ये है एलआईडीएआर तकनीक
लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (एलआईडीएआर) लेजर-आधारित सर्वे की तकनीक है। ये जमीन, पेड़-पौधों और इंफ्रास्ट्रक्चर की मैपिंग के लिए बहुत सटीक 3डी डाटा कैप्चर करती है। ये दूरी मापने के लिए तेज लेजर पल्स का इस्तेमाल करती है जिससे बिंदुओं का एक घना समूह बनता है। इसे प्वाइंट क्लाउड कहा जाता है। यह तकनीक किसी भी तरह की रोशनी में काम करती है। ये पेड़-पौधों के बीच से भी डेटा ले सकती है।