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सेंट्रल रोड फंड में पैसा नहीं, दो दर्जन से अधिक परियोजनाओं का कार्य रुका
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उज्ज पुल का अधूरा काम, संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। कठुआ जिले में कहने को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। सेंट्रल रोड फंड के तहत जारी जिले की लगभग दो दर्जन से भी अधिक परियोजनाएं फंड्स के अभाव में रुक गई हैं। हालात यह हैं कि जिले में लोक निर्माण विभाग और जलशक्ति विभाग पर ही ठेकेदारों की 25 से 30 करोड़ की बकायादारी है। नतीजतन ठेकेदार भी इन कामों को आगे बढ़ाने से परहेज कर चुके हैं।
लंबित पड़ चुकी इन परियोजनाओं में ओल्ड सांबा कठुआ रोड़, होट पुल, जुथाना पुल के साथ साथ बसंतपुर से लेकर थीन तक सड़क के दोहरीकरण का काम भी शामिल है। वहीं जलशक्ति विभाग के अधीन आने वाली लंबित पड़ चुकी 16 परियोजनाओं में कूटा, चजरथा, चडवाल, परखवाल के ओएचटी शामिल हैं। जलशक्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता विक्रम डोगरा ने बताया कि सीआरएफ के तहत किए गए कामों की मद में ठेकेदारों की तीन करोड़ 29 लाख की बकायादारी है। जबकि इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 14 करोड़ रुपयों की जरूरत है।
उधर, लोक निर्माण विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों में ओल्ड सांबा कठुआ रोड का चल रहा काम भी लटक गया है। वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्री ने इस सड़क का काम सीआरएफ के तहत शुरू करवाया था। 15 करोड़ की लागत से होने वाले इस काम में सक्ताचक से लेकर कठुआ शहर को जोड़ने वाली सड़क तैयार की जानी थी जिसमें एक पुल के साथ साथ शहर के कोर्ट रोड़ किनारे बनने वाले नाले और विस्तारीकरण का काम भी रुक गया है।
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लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि सीआरएफ के तहत शुरू हुई परियोजनाओं को लंबित परियोजनाओं की श्रेणी में डाल दिया गया है। फंड्स के अभाव में इन परियोजनाओं के काम लटक गए हैं।
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बसंतपुर से थीन तक सड़क को आखिरकार मिला वन्यजीव विभाग का क्लीयरेंस
- नौ किलोमीटर लंबी सड़क के लिए राह नहीं आसान
- दोहरीकरण के लिए उपलब्ध नहीं हैं फंड्स
कठुआ। लखनपुर से थीन तक सड़क के दोहरीकरण की परियोजना भी फंड्स के अभाव में लटक गई है। लगभग तीन साल के लंबे इंतजार के बाद तीन महीने पहले इस परियोजना के लिए वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुकी थी तो वहीं हाल ही में वन्यजीव विभाग ने भी बसंतपुर से थीन तक दस किलोमीटर सड़क पर अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दी है। जिले में नेता जहां अनापत्ति के लिए श्रेय लेने की होड़ में दौड़ रहे हैं, वहीं हालात ऐसे हैं कि परियोजना भी लंबित परियोजनाओं के खाते में जा चुकी है। पहले चरण का काम लखनपुर से बसंतपुर तक जहां पूरा हो चुका है वहीं सीआरएफ के तहत दूसरे चरण के काम के लिए फंड्स ही उपलब्ध नहीं हैं। कुल 43.49 करोड़ की इस परियोजना को कायदे से तीन साल के भीतर पूरा किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका है, ऐसे में अधिकारियों की मानें तो निर्माण सामग्री आदि के दामों में बढ़ोत्तरी से लागत भी बढ़ना स्वभाविक है।
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जुथाना पुल का फिर लटक गया काम
लगभग 45 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा दस हजार से अधिक की आबादी का सपना जुथाना पुल की सीआरएफ के तहत मंजूर हुआ था। राशि आना बंद होने के बाद यह परियोजना भी लंबित परियोजनाओं में चली गई है। 500 मीटर लंबे पुल का निर्माण उज्ज दरिया पर वर्ष 2016 से शुरू किया गया है, जिसमें पिल्लर खड़े कर दिए हैं, छह स्लैब भी डाल दिए गए हैं, इस पुल का एक सिरा जखोल तो दूसरा जुथाना को जोड़ने वाला है। पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में ही पूरा हो जाना था, लेकिन फंड के अभाव में काम रुक गया। जेकेपीसीसी के डिप्टी मैनेजर दिनेश नय्यर ने बताया कि वर्तमान में ठेकेदार की लगभग 1.5 करोड़ की बकायादारी है। पुल का काम 31 मार्च 2015 को सीआरएफ के तहत शुरू करवाया गया था। आठ स्लैब का काम बकाया है। परियोजना को पूरा करने के लिए आठ करोड़ रुपये की जरूरत है।
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हटली गुन्नी सड़क भी लटकी
महत्वपूर्ण सड़कों में हटली गुन्नी सड़क का काम भी फंड्स के अभाव में लटक गया है। 12 किलोमीटर लंबी इस सड़क का काम वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। मार्च 2018 तक इसे पूरा किया जाना था लेकिन काम फंड्स के अभाव में लटक गया। 26 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली इस सड़क का काम जहां अधूरा है वहीं गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा गया है। परियोजना में भी केंद्र की ओर से मात्र 12 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। ऐसे में ठेकेदार ने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
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लंबित पड़ चुकी इन परियोजनाओं में ओल्ड सांबा कठुआ रोड़, होट पुल, जुथाना पुल के साथ साथ बसंतपुर से लेकर थीन तक सड़क के दोहरीकरण का काम भी शामिल है। वहीं जलशक्ति विभाग के अधीन आने वाली लंबित पड़ चुकी 16 परियोजनाओं में कूटा, चजरथा, चडवाल, परखवाल के ओएचटी शामिल हैं। जलशक्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता विक्रम डोगरा ने बताया कि सीआरएफ के तहत किए गए कामों की मद में ठेकेदारों की तीन करोड़ 29 लाख की बकायादारी है। जबकि इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 14 करोड़ रुपयों की जरूरत है।
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उधर, लोक निर्माण विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों में ओल्ड सांबा कठुआ रोड का चल रहा काम भी लटक गया है। वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्री ने इस सड़क का काम सीआरएफ के तहत शुरू करवाया था। 15 करोड़ की लागत से होने वाले इस काम में सक्ताचक से लेकर कठुआ शहर को जोड़ने वाली सड़क तैयार की जानी थी जिसमें एक पुल के साथ साथ शहर के कोर्ट रोड़ किनारे बनने वाले नाले और विस्तारीकरण का काम भी रुक गया है।
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लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि सीआरएफ के तहत शुरू हुई परियोजनाओं को लंबित परियोजनाओं की श्रेणी में डाल दिया गया है। फंड्स के अभाव में इन परियोजनाओं के काम लटक गए हैं।
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बसंतपुर से थीन तक सड़क को आखिरकार मिला वन्यजीव विभाग का क्लीयरेंस
- नौ किलोमीटर लंबी सड़क के लिए राह नहीं आसान
- दोहरीकरण के लिए उपलब्ध नहीं हैं फंड्स
कठुआ। लखनपुर से थीन तक सड़क के दोहरीकरण की परियोजना भी फंड्स के अभाव में लटक गई है। लगभग तीन साल के लंबे इंतजार के बाद तीन महीने पहले इस परियोजना के लिए वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुकी थी तो वहीं हाल ही में वन्यजीव विभाग ने भी बसंतपुर से थीन तक दस किलोमीटर सड़क पर अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दी है। जिले में नेता जहां अनापत्ति के लिए श्रेय लेने की होड़ में दौड़ रहे हैं, वहीं हालात ऐसे हैं कि परियोजना भी लंबित परियोजनाओं के खाते में जा चुकी है। पहले चरण का काम लखनपुर से बसंतपुर तक जहां पूरा हो चुका है वहीं सीआरएफ के तहत दूसरे चरण के काम के लिए फंड्स ही उपलब्ध नहीं हैं। कुल 43.49 करोड़ की इस परियोजना को कायदे से तीन साल के भीतर पूरा किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका है, ऐसे में अधिकारियों की मानें तो निर्माण सामग्री आदि के दामों में बढ़ोत्तरी से लागत भी बढ़ना स्वभाविक है।
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जुथाना पुल का फिर लटक गया काम
लगभग 45 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा दस हजार से अधिक की आबादी का सपना जुथाना पुल की सीआरएफ के तहत मंजूर हुआ था। राशि आना बंद होने के बाद यह परियोजना भी लंबित परियोजनाओं में चली गई है। 500 मीटर लंबे पुल का निर्माण उज्ज दरिया पर वर्ष 2016 से शुरू किया गया है, जिसमें पिल्लर खड़े कर दिए हैं, छह स्लैब भी डाल दिए गए हैं, इस पुल का एक सिरा जखोल तो दूसरा जुथाना को जोड़ने वाला है। पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में ही पूरा हो जाना था, लेकिन फंड के अभाव में काम रुक गया। जेकेपीसीसी के डिप्टी मैनेजर दिनेश नय्यर ने बताया कि वर्तमान में ठेकेदार की लगभग 1.5 करोड़ की बकायादारी है। पुल का काम 31 मार्च 2015 को सीआरएफ के तहत शुरू करवाया गया था। आठ स्लैब का काम बकाया है। परियोजना को पूरा करने के लिए आठ करोड़ रुपये की जरूरत है।
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हटली गुन्नी सड़क भी लटकी
महत्वपूर्ण सड़कों में हटली गुन्नी सड़क का काम भी फंड्स के अभाव में लटक गया है। 12 किलोमीटर लंबी इस सड़क का काम वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। मार्च 2018 तक इसे पूरा किया जाना था लेकिन काम फंड्स के अभाव में लटक गया। 26 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली इस सड़क का काम जहां अधूरा है वहीं गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा गया है। परियोजना में भी केंद्र की ओर से मात्र 12 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। ऐसे में ठेकेदार ने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
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