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कचरा निस्तारण की अभी तक नहीं हुई कोई व्यवस्था
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राष्ट्रीय राजमार्ग पर सहार खड्ड के पुल के पास लगा कचरे का ढेर। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। रावी दरिया में कचरा फेंकने के मामले में नगर परिषद पर 82.40 लाख रुपये के जुर्माने के बाद भी संवेदनहीनता ही नजर आ रही है। अभी भी शहर से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन को लेकर कुछ भी ठोस नहीं किया गया है। मग्गर खड्ड से सटे बेडियां पत्तन को प्रदूषित करने के बाद अब सहार खड्ड और शहर के सटी कई अन्य खड्डों में शहर का कचरा फेंका जा रहा है।
जम्मू पठानकोट नेशनल हाईवे के किनारे और शहर की सीमा से सटकर कचरा प्राकृतिक जलस्रोतों के नजदीक फेंककर एक बार फिर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बने मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यही नहीं शहर और आसपास चलने वाले मैरिज पैलेस से निकलने वाली गंदगी को भी खुले में फेंक दिया जा रहा है।
हालांकि जुर्माने के बाद से ही नगर परिषद की ओर से बेड़ियां पत्तन में 25 से 30 वर्ष में फेंके गए कचरे के लिए निपटान प्रबंधों पर काम शुरू होने का हवाला दिया जा रहा है। पूर्व में फेंके गए कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ-साथ शहर के बहुप्रतीक्षित सॉलिड वेस्ट प्रबंधन योजना पर भी जल्द काम शुरू किए जाने की बात की जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर कोई भी बदलाव नजर नहीं आ रहा है। रावी दरिया के किनारे पिछले ढाई से तीन दशक तक शहर का कचरा फेंका जाता रहा है। हाल के वर्षों में प्रतिदिन 38 टन कचरे का गैर वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने से ही शहर का वातावरण और भी प्रदूषित होता गया है, जिसका प्रदूषण नियंत्रण समिति की ओर से कड़ा संज्ञान लिया गया था।
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शहर की सॉलिड वेस्ट परियोजना भी अधिकारियों और नेताओं की बातों और सरकारी दस्तावेजों से आगे नहीं बढ़ पा रही है। 2004 से यह परियोजना शहर में प्रस्तावित है लेकिन अभी तक सिरे नहीं चढ़ सकी है। नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल ने बताया कि 67 लाख से शहर के बेड़ियां पत्तन इलाके में नगर परिषद की ओर से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तैयार की जा रही है। जिसमें बीस गड्ढे तैयार किए जाएंगे। सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के लिए प्रक्रिया टेंडरिंग स्टेज में है। पिछले तीस वर्ष से इलाके में फेंके जा रहे कचरे का वैज्ञानिक निपटान करने के लिए योजना तैयार की जा रही है।
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जम्मू पठानकोट नेशनल हाईवे के किनारे और शहर की सीमा से सटकर कचरा प्राकृतिक जलस्रोतों के नजदीक फेंककर एक बार फिर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बने मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यही नहीं शहर और आसपास चलने वाले मैरिज पैलेस से निकलने वाली गंदगी को भी खुले में फेंक दिया जा रहा है।
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हालांकि जुर्माने के बाद से ही नगर परिषद की ओर से बेड़ियां पत्तन में 25 से 30 वर्ष में फेंके गए कचरे के लिए निपटान प्रबंधों पर काम शुरू होने का हवाला दिया जा रहा है। पूर्व में फेंके गए कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ-साथ शहर के बहुप्रतीक्षित सॉलिड वेस्ट प्रबंधन योजना पर भी जल्द काम शुरू किए जाने की बात की जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर कोई भी बदलाव नजर नहीं आ रहा है। रावी दरिया के किनारे पिछले ढाई से तीन दशक तक शहर का कचरा फेंका जाता रहा है। हाल के वर्षों में प्रतिदिन 38 टन कचरे का गैर वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने से ही शहर का वातावरण और भी प्रदूषित होता गया है, जिसका प्रदूषण नियंत्रण समिति की ओर से कड़ा संज्ञान लिया गया था।
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शहर की सॉलिड वेस्ट परियोजना भी अधिकारियों और नेताओं की बातों और सरकारी दस्तावेजों से आगे नहीं बढ़ पा रही है। 2004 से यह परियोजना शहर में प्रस्तावित है लेकिन अभी तक सिरे नहीं चढ़ सकी है। नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल ने बताया कि 67 लाख से शहर के बेड़ियां पत्तन इलाके में नगर परिषद की ओर से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तैयार की जा रही है। जिसमें बीस गड्ढे तैयार किए जाएंगे। सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के लिए प्रक्रिया टेंडरिंग स्टेज में है। पिछले तीस वर्ष से इलाके में फेंके जा रहे कचरे का वैज्ञानिक निपटान करने के लिए योजना तैयार की जा रही है।