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Kathua News: एनडीआरएफ ने भूकंप व बाढ़ से बचाव के लिए किया प्रशिक्षित
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सरकारी हाई स्कूल पारलीवंड में एनडीआरएफ की ओर से विद्यार्थियों को दिया गया प्रशिक्षण।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। भूकंप आने पर सबसे पहले अपने सिर को ढक कर 65 सेकंड के लिए बैठ जाना चाहिए। इसके अलावा, इमारत की डेढ़ गुना ऊंचाई से परे चले जाना चाहिए। मंगलवार को हाई स्कूल पारलीवंड में एनडीआरएफ की 13वीं बटालियन ने विशेष कार्यशाला में यह महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इस दौरान अध्यापकों और छात्रों को आग से बचाव के उपाय बताए गए। बताया कि यदि आग लग जाए तो भागना और दौड़ना नहीं चाहिए। बल्कि एसडीआर तरीके को अपनाकर रुकना, लेटना और लुढ़कते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचना चाहिए। एनडीआरएफ की टीम ने एनसीसी कैडेट को सीपीआर की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया। आपात स्थिति में फंसे बच्चों को बाहर निकालना भी सिखाया। टीम ने मॉक ड्रिल कर अध्यापकों और छात्रों को प्रशिक्षित और सचेत किया। छात्रों को भावनात्मक और सुरक्षात्मक पहलुओं के बारे भी जागरूक किया गया। प्राथमिक उपचार और बचाव का सामान्य प्रशिक्षण भी दिया गया।
इसके अलावा विद्यार्थियों और अध्यापकों को सीपीआर की प्रक्रिया के बारे विस्तृत जानकारी दी गई। बाढ़ आने पर लोगों को पानी में डूबने से कैसे बचाया जाए और बाढ़ आने पर कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए, इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने जिंदगी बचाने के लिए लाइफ जैकेट का जुगाड़ करना भी सिखाया। बताया कि प्लास्टिक के डिब्बे, थर्माकोल, पानी की बोतलों से भी जुगाड़ लाइफ जैकेट्स बनाए जा सकते हैं।
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कठुआ। भूकंप आने पर सबसे पहले अपने सिर को ढक कर 65 सेकंड के लिए बैठ जाना चाहिए। इसके अलावा, इमारत की डेढ़ गुना ऊंचाई से परे चले जाना चाहिए। मंगलवार को हाई स्कूल पारलीवंड में एनडीआरएफ की 13वीं बटालियन ने विशेष कार्यशाला में यह महत्वपूर्ण जानकारी दी।
इस दौरान अध्यापकों और छात्रों को आग से बचाव के उपाय बताए गए। बताया कि यदि आग लग जाए तो भागना और दौड़ना नहीं चाहिए। बल्कि एसडीआर तरीके को अपनाकर रुकना, लेटना और लुढ़कते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचना चाहिए। एनडीआरएफ की टीम ने एनसीसी कैडेट को सीपीआर की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया। आपात स्थिति में फंसे बच्चों को बाहर निकालना भी सिखाया। टीम ने मॉक ड्रिल कर अध्यापकों और छात्रों को प्रशिक्षित और सचेत किया। छात्रों को भावनात्मक और सुरक्षात्मक पहलुओं के बारे भी जागरूक किया गया। प्राथमिक उपचार और बचाव का सामान्य प्रशिक्षण भी दिया गया।
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इसके अलावा विद्यार्थियों और अध्यापकों को सीपीआर की प्रक्रिया के बारे विस्तृत जानकारी दी गई। बाढ़ आने पर लोगों को पानी में डूबने से कैसे बचाया जाए और बाढ़ आने पर कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए, इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने जिंदगी बचाने के लिए लाइफ जैकेट का जुगाड़ करना भी सिखाया। बताया कि प्लास्टिक के डिब्बे, थर्माकोल, पानी की बोतलों से भी जुगाड़ लाइफ जैकेट्स बनाए जा सकते हैं।
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