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पवित्र नवरात्रों के लिए सज गए दरबार, आज होगा माता का दीदार
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कठुआ। शारदीय नवरात्र पर्व शनिवार से शुरू होने जा रहा है, जिसे लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जिले भर के मंदिरों को सजाने के साथ-साथ लाइटिंग और भजन-कीर्तन के लिए भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नवरात्र को लेकर जिले भर के मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। उत्सव के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। मंदिरों, शहर व कसबों में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े करते हुए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की नियुक्ति सुनिश्चित कर दी गई है। कोरोना महामारी के कारण भक्त चैत्र नवरात्र में मंदिरों में माता के दर्शन नहीं कर पाए थे। वहीं, अनलॉक प्रक्रियाओं के बीच मिली छूट में भक्त इस बार एसओपी का पालन करते हुए माता के दर्शनों को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।
शहर के विभिन्न मंदिरों से निकाली जाने वाली प्रभात फेरियों का दौर भी पहले नवरात्र से शुरू हो जाएगा। जिले भर के विभिन्न मंदिरों में हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। माता बाला सुंदरी नगरी, जसरोटा स्थित काली माता मंदिर, लखनपुर में किले माता मंदिर, माता आशापूर्णी मंदिर कठुआ, किला माता मंदिर हीरानगर, शेरकोटला स्थित चंडिका माता मंदिर आदि को नवरात्र के उपलक्ष्य में आकर्षक ढंग से सजाया गया है। प्रशासन द्वारा नवरात्र मेले में सुरक्षा और श्रद्धालुओं को हर तरह की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं। अधिकारियों को सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के खास निर्देश हैं। खाद्य सुरक्षा की टीम मुनाफाखोरी और मिलावटखोरी पर भी नजर रखेगी।
लंगर कमेटियां पहुंची माता के भवन, भक्तों को परोसा जाएगा पैक लंगर
कठुआ। शारदीय नवरात्र के पहले दिन बड़ी संख्या में भक्तों के मंदिरों में पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर कमेटियां पूरी तैयारी कर रही हैं। प्रशासन की ओर से दी गई एसओपी के पालन के लिए मंदिरों में कतारों में भक्तों के लिए उचित दूरी पर घेरे बनाए गए हैं। मंदिर कमेटियों के सेवादारों की कोरोना जांच भी करवाई गई है। भक्तों को प्रसाद वितरित करने की जिम्मेदारी उन सेवादारों को ही दी जाएगी, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होगी। इस बीच बनी के जोडेयां और दौले माता मंदिर में भक्तों की सेवा में लगने वाले लंगर के आयोजकों का उत्साह भी देखते ही बन रहा है। नवरात्र से पूर्व ही अधिकांश लंगर कमेटियों के सदस्य तमाम साजो सामान के साथ मंदिर स्थलों पर पहुंच गए हैं। जोड़ेयां माता वेलफेयर कमेटी के सदस्यों ने पिछले सप्ताह से ही मंदिर में सजावट और भजन कीर्तन के इंतजाम को पूरा कर लिया है। जोड़ेयां माता मंदिर में हर साल शारदीय नवरात्र के दौरान लगभग डेढ़ लाख भक्त दर्शन के लिए आते हैं। वेलफेयर कमेटी के सदस्यों ने लंगर के लिए लकड़ी और अन्य सामान भी एकत्रित कर लिया है। भक्तों को इस बार पैक लंगर ही परोसा जाएगा। साथ ही रात में भवन पर भक्तों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होगी। उधर, भजन गायक लेखराज वर्मा ने भी जोड़ेयां माता मंदिर में डेरा डाल लिया है। पिछले डेढ़ दशक से लेखराज नवरात्र के दौरान माता के मंदिर में सुबह से शाम तक महामाई का गुणगान करते हैं। मंदिर प्रांगण के आसपास प्रसाद की दुकानें भी सज गई हैं। मेले में लगने वाली अन्य दुकानों को इस बार प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी गई है। संवाद
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मल्ल माता के नाम से भी जानी जाती हैं सुकराला देवी
बिलावर। कठुआ जिले के बिलावर में माता सुकराला देवी का मंदिर स्थित है। यह मंदिर भक्तों की असीम आस्था का केंद्र है। बिलावर कस्बे से नौ किलोमीटर दूर सुकराला नामक गांव में माता सुकराला देवी का मंदिर स्थित है। जम्मू, कठुआ, सांबा और उधमपुर के अतिरिक्त देश के कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पर महामाई के दर्शन करने आते हैं। मात सुकराला को मल्लदेवी के नाम से भी जाना जाता है। पिछले सात वर्षों से यह मंदिर श्राइनबोर्ड के अधीन है और यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई प्रकार की सुविधाएं प्रशासन की ओर से की गई हैं।
मंदिर के इतिहास का वर्णन करते हुए पंडित विद्याचरण ने बताया कि मलूक राम नाम के विद्वान पंडित उपाध्याय ब्राह्मण थे जो देवी मां के भक्त थे और नित्य मां की पूजा पाठ करते थे। एक बार दुर्गा हवन करते समय 13वें अध्याय में हवन सामग्री समाप्त हो गई। यह देख कि पूजा अधूरी ना रह जाए वे अपने शरीर के अंगों को काटकर उसकी आहुतियां देने लगे। जब मलूकराम ने अपना शीश काटने की कोशिश की तो माता प्रकट हुईं और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वचन दिया कि वे सुकराला में ही वास करेंगी। इसके बाद उन्हें सुकराला माता के नाम से जाना जाने लगा और पंडित मलूकराम के नाम से उन्हें मल्ल माता का भी नाम मिला। आज भी माता के परम भक्त मलूकराम के वंशज पंडित उपाध्याय ब्राह्मण महामाई की पूजा करते हैं और आए श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण करते हैं। चंबा के राजा की मन्नत पूरी होने पर उन्होंने इस मंदिर का भव्य निर्माण करवाया था। सुकराला देवी का यह मंदिर गांव के बीचों बीच स्थित है।
सज गया माता सुकराला व माता बाला सुंदरी का दरबार
बिलावर उपजिला के माता सुकराला और माता बाला सुंदरी के दरबार की सजावट भी देखते ही बनती है। सुकराला माता मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान उमड़ने वाले भक्तों की भारी तादाद को देखते हुए प्रशासन और श्राइन बोर्ड के सदस्यों की ओर से भी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। मल्ल माता के दर्शन के लिए पहले नवरात्र पर भारी तादाद में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। मंदिर की सजावट का काम पूरा हो चुका है। हर साल कठुआ जिला के साथ, जम्मू संभाग और पड़ोसी राज्यों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं। ऐसे में पेयजल, बिजली और सुरक्षा को लेकर इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।
ऐतिहासिक बनखंडी, जगदंबे माता मंदिर में नवरात्रों की तैयारी पूरी
महानपुर। कस्बे में स्थित ऐतिहासिक बनखंडी माता और जगदंबे माता मंदिर में नवरात्रों को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। मंदिर में रंग रोगन व अन्य व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है। 17 अक्टूबर को शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र को लेकर बनखंडी माता के दरबार पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तैयारी कर ली गई है। मंदिर परिसर की सफाई और रंग रोगन के कार्य को अंतिम रूप दे दिया गया है। मंदिर के पुजारी महंत भगवान दास ने बताया कि श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए दिन में अनुमति मिली है। उन्होंने बताया कि दर्शन के समय प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। माता के दरबार पर किसी प्रकार की ठहरने की व्यवस्था नहीं होगी। दूसरी ओर जगदंबे माता के दरबार को भी सजाने का काम पूरा कर लिया है। संवाद
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शहर के विभिन्न मंदिरों से निकाली जाने वाली प्रभात फेरियों का दौर भी पहले नवरात्र से शुरू हो जाएगा। जिले भर के विभिन्न मंदिरों में हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। माता बाला सुंदरी नगरी, जसरोटा स्थित काली माता मंदिर, लखनपुर में किले माता मंदिर, माता आशापूर्णी मंदिर कठुआ, किला माता मंदिर हीरानगर, शेरकोटला स्थित चंडिका माता मंदिर आदि को नवरात्र के उपलक्ष्य में आकर्षक ढंग से सजाया गया है। प्रशासन द्वारा नवरात्र मेले में सुरक्षा और श्रद्धालुओं को हर तरह की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं। अधिकारियों को सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के खास निर्देश हैं। खाद्य सुरक्षा की टीम मुनाफाखोरी और मिलावटखोरी पर भी नजर रखेगी।
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लंगर कमेटियां पहुंची माता के भवन, भक्तों को परोसा जाएगा पैक लंगर
कठुआ। शारदीय नवरात्र के पहले दिन बड़ी संख्या में भक्तों के मंदिरों में पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर कमेटियां पूरी तैयारी कर रही हैं। प्रशासन की ओर से दी गई एसओपी के पालन के लिए मंदिरों में कतारों में भक्तों के लिए उचित दूरी पर घेरे बनाए गए हैं। मंदिर कमेटियों के सेवादारों की कोरोना जांच भी करवाई गई है। भक्तों को प्रसाद वितरित करने की जिम्मेदारी उन सेवादारों को ही दी जाएगी, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होगी। इस बीच बनी के जोडेयां और दौले माता मंदिर में भक्तों की सेवा में लगने वाले लंगर के आयोजकों का उत्साह भी देखते ही बन रहा है। नवरात्र से पूर्व ही अधिकांश लंगर कमेटियों के सदस्य तमाम साजो सामान के साथ मंदिर स्थलों पर पहुंच गए हैं। जोड़ेयां माता वेलफेयर कमेटी के सदस्यों ने पिछले सप्ताह से ही मंदिर में सजावट और भजन कीर्तन के इंतजाम को पूरा कर लिया है। जोड़ेयां माता मंदिर में हर साल शारदीय नवरात्र के दौरान लगभग डेढ़ लाख भक्त दर्शन के लिए आते हैं। वेलफेयर कमेटी के सदस्यों ने लंगर के लिए लकड़ी और अन्य सामान भी एकत्रित कर लिया है। भक्तों को इस बार पैक लंगर ही परोसा जाएगा। साथ ही रात में भवन पर भक्तों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होगी। उधर, भजन गायक लेखराज वर्मा ने भी जोड़ेयां माता मंदिर में डेरा डाल लिया है। पिछले डेढ़ दशक से लेखराज नवरात्र के दौरान माता के मंदिर में सुबह से शाम तक महामाई का गुणगान करते हैं। मंदिर प्रांगण के आसपास प्रसाद की दुकानें भी सज गई हैं। मेले में लगने वाली अन्य दुकानों को इस बार प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी गई है। संवाद
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मल्ल माता के नाम से भी जानी जाती हैं सुकराला देवी
बिलावर। कठुआ जिले के बिलावर में माता सुकराला देवी का मंदिर स्थित है। यह मंदिर भक्तों की असीम आस्था का केंद्र है। बिलावर कस्बे से नौ किलोमीटर दूर सुकराला नामक गांव में माता सुकराला देवी का मंदिर स्थित है। जम्मू, कठुआ, सांबा और उधमपुर के अतिरिक्त देश के कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पर महामाई के दर्शन करने आते हैं। मात सुकराला को मल्लदेवी के नाम से भी जाना जाता है। पिछले सात वर्षों से यह मंदिर श्राइनबोर्ड के अधीन है और यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई प्रकार की सुविधाएं प्रशासन की ओर से की गई हैं।
मंदिर के इतिहास का वर्णन करते हुए पंडित विद्याचरण ने बताया कि मलूक राम नाम के विद्वान पंडित उपाध्याय ब्राह्मण थे जो देवी मां के भक्त थे और नित्य मां की पूजा पाठ करते थे। एक बार दुर्गा हवन करते समय 13वें अध्याय में हवन सामग्री समाप्त हो गई। यह देख कि पूजा अधूरी ना रह जाए वे अपने शरीर के अंगों को काटकर उसकी आहुतियां देने लगे। जब मलूकराम ने अपना शीश काटने की कोशिश की तो माता प्रकट हुईं और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वचन दिया कि वे सुकराला में ही वास करेंगी। इसके बाद उन्हें सुकराला माता के नाम से जाना जाने लगा और पंडित मलूकराम के नाम से उन्हें मल्ल माता का भी नाम मिला। आज भी माता के परम भक्त मलूकराम के वंशज पंडित उपाध्याय ब्राह्मण महामाई की पूजा करते हैं और आए श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण करते हैं। चंबा के राजा की मन्नत पूरी होने पर उन्होंने इस मंदिर का भव्य निर्माण करवाया था। सुकराला देवी का यह मंदिर गांव के बीचों बीच स्थित है।
सज गया माता सुकराला व माता बाला सुंदरी का दरबार
बिलावर उपजिला के माता सुकराला और माता बाला सुंदरी के दरबार की सजावट भी देखते ही बनती है। सुकराला माता मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान उमड़ने वाले भक्तों की भारी तादाद को देखते हुए प्रशासन और श्राइन बोर्ड के सदस्यों की ओर से भी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। मल्ल माता के दर्शन के लिए पहले नवरात्र पर भारी तादाद में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। मंदिर की सजावट का काम पूरा हो चुका है। हर साल कठुआ जिला के साथ, जम्मू संभाग और पड़ोसी राज्यों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं। ऐसे में पेयजल, बिजली और सुरक्षा को लेकर इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।
ऐतिहासिक बनखंडी, जगदंबे माता मंदिर में नवरात्रों की तैयारी पूरी
महानपुर। कस्बे में स्थित ऐतिहासिक बनखंडी माता और जगदंबे माता मंदिर में नवरात्रों को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। मंदिर में रंग रोगन व अन्य व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है। 17 अक्टूबर को शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र को लेकर बनखंडी माता के दरबार पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तैयारी कर ली गई है। मंदिर परिसर की सफाई और रंग रोगन के कार्य को अंतिम रूप दे दिया गया है। मंदिर के पुजारी महंत भगवान दास ने बताया कि श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए दिन में अनुमति मिली है। उन्होंने बताया कि दर्शन के समय प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। माता के दरबार पर किसी प्रकार की ठहरने की व्यवस्था नहीं होगी। दूसरी ओर जगदंबे माता के दरबार को भी सजाने का काम पूरा कर लिया है। संवाद