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Kathua News: एचएमपीवी से निपटने के लिए जीएमसी में मॉक डि्रल
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी कठुआ में एचएमपीवी (ह्यूमन मेटापन्यूमोवायरस) को लेकर मॉक डि्रल की गई। 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड जहां जांचा गया वहीं ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट भी चलाकर देखे गए ताकि जरूरत पड़ने पर कोई कमी न रहे।
उत्तर भारत में एचएमपीवी की दस्तक के बाद कठुआ में तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं। वीरवार को जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य और स्टाफ ने मॉक डि्रल के तहत परिसर में स्थापित उपकरणों की जांच की। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि आपात स्थिति में जरूरत के समय किसी भी तरह की दिक्कत न हो। जीएमसी कठुआ के ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट चलाकर देखे गए। प्रधानाचार्य डॉ सुरेंद्र अत्री ने बताया कि जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में 4550 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता के प्लांट स्थापित किए गए हैं। छह में से पांच प्लांट चल रहे हैं।
बताया कि एक प्लांट वारंटी के अधीन है और उसे मेंटीनेंस की जरूरत है। वायरस को लेकर उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि एचएमपीवी आम तौर पर पाया जाता है लेकिन विशेष ध्यान इसके वेरिएंट पर रखा जा रहा है। नए मामले न बढ़ें इसलिए तैयारी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, अगर जुकाम व खांसी के मामले आते हैं तो नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में रिपोर्ट करें।
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बताया कि फिलहाल 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है, मामले बढ़ने पर इसे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीएमसी कठुआ के पास इस समय अपनी एक क्रिटिकल केयर एंबुलेंस है लेकिन इनकी संख्या भी तीन से चार तक बढ़ाए जाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सांसों का संकट, जीएमसी में पीएम केयर का ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट ठप
कठुआ। कोरोना काल में बनी, बसोहली और हीरानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित किए गए तीनों ऑक्सीजन प्लांट ठप पड़े हैं। कभी ये ट्रायल रन में नहीं चले, कभी तकनीकी खराबी आई और अब मरम्मत की जरूरत है। इन प्लांट को विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप से आयात किया गया था।
कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए जम्मू संभाग में ऐसे 15 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इनमें से कठुआ जिले को तीन प्लांट मिले थे। तीनों सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) में जुलाई, 2021 में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट शुरुआत से ही तकनीकी दिक्कतों के चलते बीच-बीच में ठप होते रहे हैं। तीनों ऑक्सीजन प्लांट में से प्रत्येक की क्षमता 300 एलपीएम की है। बड़ी बात यह है कि तीनों का सीएचसी में ऑपरेशन थियेटर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऑपरेशन वाले मरीजों को जीएमसी कठुआ में रेफर किया जा रहा है।
बनी सीएचसी में स्थापित किया गया ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट तो पहले ट्रायल रन के दौरान भी नहीं चला था। इसके बाद मॉक ड्रिल में जब इसे चलाया गया, तो हर बार खराबी आती रही। इस बार की मॉक डि्रल में भी यह सफेद हाथी साबित हुए हैं। बसोहली और हीरानगर के ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट भी साढ़े तीन साल के भीतर ही ठप हो गए हैं। अधिकारियों की मानें तो इकोनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी की ओर से स्थापित करवाए गए ये प्लांट वर्तमान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की देखरेख में हैं। तकनीकी स्टाफ न होने से इन ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट का महीनों से ट्रायल रन भी नहीं हुआ है। न ही इन्हें जांचा गया।
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कोट..
बनी, बसोहली और हीरानगर में 300-300 एलपीएम के तीनों ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट नहीं चल रहे हैं। इसके लिए उच्च अधिकारियों से बात की गई है। ऐसी जानकारी है कि इनकी मरम्मत के लिए राशि जारी हुई है, उम्मीद है कि जल्द यह सक्रिय हो जाएंगे। जिले में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन कंसेंनट्रेटर उपलब्ध हैं।
- डॉ विजय रैना, सीएमओ, कठुआ
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कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी कठुआ में एचएमपीवी (ह्यूमन मेटापन्यूमोवायरस) को लेकर मॉक डि्रल की गई। 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड जहां जांचा गया वहीं ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट भी चलाकर देखे गए ताकि जरूरत पड़ने पर कोई कमी न रहे।
उत्तर भारत में एचएमपीवी की दस्तक के बाद कठुआ में तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं। वीरवार को जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य और स्टाफ ने मॉक डि्रल के तहत परिसर में स्थापित उपकरणों की जांच की। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि आपात स्थिति में जरूरत के समय किसी भी तरह की दिक्कत न हो। जीएमसी कठुआ के ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट चलाकर देखे गए। प्रधानाचार्य डॉ सुरेंद्र अत्री ने बताया कि जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में 4550 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता के प्लांट स्थापित किए गए हैं। छह में से पांच प्लांट चल रहे हैं।
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बताया कि एक प्लांट वारंटी के अधीन है और उसे मेंटीनेंस की जरूरत है। वायरस को लेकर उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने बताया कि एचएमपीवी आम तौर पर पाया जाता है लेकिन विशेष ध्यान इसके वेरिएंट पर रखा जा रहा है। नए मामले न बढ़ें इसलिए तैयारी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, अगर जुकाम व खांसी के मामले आते हैं तो नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में रिपोर्ट करें।
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बताया कि फिलहाल 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है, मामले बढ़ने पर इसे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीएमसी कठुआ के पास इस समय अपनी एक क्रिटिकल केयर एंबुलेंस है लेकिन इनकी संख्या भी तीन से चार तक बढ़ाए जाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सांसों का संकट, जीएमसी में पीएम केयर का ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट ठप
कठुआ। कोरोना काल में बनी, बसोहली और हीरानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित किए गए तीनों ऑक्सीजन प्लांट ठप पड़े हैं। कभी ये ट्रायल रन में नहीं चले, कभी तकनीकी खराबी आई और अब मरम्मत की जरूरत है। इन प्लांट को विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप से आयात किया गया था।
कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए जम्मू संभाग में ऐसे 15 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इनमें से कठुआ जिले को तीन प्लांट मिले थे। तीनों सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) में जुलाई, 2021 में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट शुरुआत से ही तकनीकी दिक्कतों के चलते बीच-बीच में ठप होते रहे हैं। तीनों ऑक्सीजन प्लांट में से प्रत्येक की क्षमता 300 एलपीएम की है। बड़ी बात यह है कि तीनों का सीएचसी में ऑपरेशन थियेटर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऑपरेशन वाले मरीजों को जीएमसी कठुआ में रेफर किया जा रहा है।
बनी सीएचसी में स्थापित किया गया ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट तो पहले ट्रायल रन के दौरान भी नहीं चला था। इसके बाद मॉक ड्रिल में जब इसे चलाया गया, तो हर बार खराबी आती रही। इस बार की मॉक डि्रल में भी यह सफेद हाथी साबित हुए हैं। बसोहली और हीरानगर के ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट भी साढ़े तीन साल के भीतर ही ठप हो गए हैं। अधिकारियों की मानें तो इकोनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी की ओर से स्थापित करवाए गए ये प्लांट वर्तमान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की देखरेख में हैं। तकनीकी स्टाफ न होने से इन ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट का महीनों से ट्रायल रन भी नहीं हुआ है। न ही इन्हें जांचा गया।
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कोट..
बनी, बसोहली और हीरानगर में 300-300 एलपीएम के तीनों ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट नहीं चल रहे हैं। इसके लिए उच्च अधिकारियों से बात की गई है। ऐसी जानकारी है कि इनकी मरम्मत के लिए राशि जारी हुई है, उम्मीद है कि जल्द यह सक्रिय हो जाएंगे। जिले में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन कंसेंनट्रेटर उपलब्ध हैं।
- डॉ विजय रैना, सीएमओ, कठुआ