कठुआ। डुग्गन के दूर दराज इलाके में आबादी से दूर बर्फ से लदे पहाड़ों की चोटियों पर इस बार भी मां चंडी के जयकारे गूंजने लगे हैं। सोमवार को सुबह 11 बजे से नुकनाली यात्रा शुरू होगी। सोमवार को ढाडू, दौला माता, बनी, छपाडू और सन्ननघाट के साथ आधा दर्जन अन्य स्थानों से यात्रा रात के समय खब्बी और अनहोर में पहुंचेगी। यहां यात्रा का पहला पड़ाव होगा। रविवार को लंगर कमेटी के सदस्यों ने भी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। यात्रा मार्ग पर लंगर की व्यवस्था के साथ ही खब्बी में भक्तों के ठहरने के इंतजाम भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं। लंगर कमेटियों ने पिछले तीन दिन से क्षेत्र में डेरा डाल लिया है।
वार्षिक नुकनाली यात्रा के लिए भक्तों की आस्था हर साल देखते ही बनती है। माता के दर्शन को जाने वाले भक्तों के जोश से अनहोर के जंगल भी जयकारों से गूंज उठते हैं। पैदल दुर्गम पहाड़ों की चढ़ाई कर चंडी मां के भक्त नुकनाली मंदिर में मंगलवार को पहुंचेंगे। डुग्गन से भद्रवाह की ओर रिहाइशी इलाके से दूर बर्फ से लकदक पहाड़ों की इस दुर्गम यात्रा कई सदियों से जारी है। ऐसा माना जाता है कि बनी और डुग्गन में बने चंडी माता के मंदिर नुकनाली से ही होकर जाते हैं। परंपरा के अनुसार नुकनाली में श्रद्धालुओं की भारी आस्था और इंतजाम के अभाव में भक्तों के लिए विभिन्न स्थानों पर चंडी माता के मंदिरों का निर्माण कराया गया है। पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं का आंकड़ा भी बढ़ा है। औसतन दस से पंद्रह हजार श्रद्धालु इस वार्षिक यात्रा में शामिल होते हैं। दौला माता मंदिर में रविवार शाम तक बड़ी संख्या में भक्त पहुंच चुके थे। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन गौरीशंकर संजान ने बताया कि सुबह 11 बजे के लगभग भक्त अनहोर की ओर रवाना होंगे। यहां दौला माता चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य पहले से पहुंच चुके हैं। कई जगह से आए भक्त और सेवादार यात्रा मार्ग पर लंगर लगाते हैं। सभी यात्राएं सोमवार रात अनहोर के जंगल में गुजारेंगी और मंगलवार सुबह नुकनाली माता के दर्शनों के बाद लौटेंगी।