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Kathua News: लोहाई मल्हार की बेटी ने श्रीलंका के खिलाफ ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर देश को दिलाई जीत
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अनेखा देवी
जिले के दूर दराज लोहाई मल्हार के डल बजोई की बेटी अनेखा देवी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। मंगलवार को भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए क्रिकेट मैच में उन्हाेंने छह गेंद में तीन चौकों की मदद से 15 रन का अहम योगदान देकर टीम को विजय दिलाई।
दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए आयोजित पहले महिला टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट टूर्नामेंट 2025 में भारत ने अपने अभियान की शुरुआत शानदार जीत के साथ की। उद्घाटन मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 10 विकेट से हराकर टूर्नामेंट में विजयी आगाज किया। यह ऐतिहासिक मैच दिल्ली के मॉडर्न स्कूल ग्राउंड, बाराखंभा रोड पर खेला गया, जहां पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने टूर्नामेंट का औपचारिक उद्घाटन किया।
75 फीसदी दृष्टिहीनता के साथ अनेखा देवी ने अपने सपनों की साकार करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। अनेखा का परिवार सीमित संसाधनों वाला है। पिता बिजली विभाग में दैनिक वेतन भोगी हैं। परिवार में नेत्रहीनता कोई नई बात नहीं, उनके चाचा और चचेरी बहन भी इसी चुनौती से जूझते रहे हैं। लेकिन अनेखा ने इसे अपनी कमजोरी नहीं, ताकत बना लिया। चौथी तक निजी स्कूल, फिर बजोई हाई स्कूल और सातवीं में जम्मू के नेत्रहीन स्कूल में दाखिला लेकर अनेखा के परिवार ने उसकी शिक्षा को बल दिया। सातवीं में पहली बार ब्रेल से परिचय हुआ। इससे पहले तक शिक्षक उन्हें आम बच्चों की तरह पढ़ाते थे। चौथी तक तो होमवर्क भी कजन क्लासमेट की मदद से होता था। लेकिन अनेखा ने कभी हार नहीं मानी। अब दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में बीए प्रोग्रामिंग कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खुद को खेलों में भी साबित किया। उधर, अनेखा की बल्लेबाजी का चर्चा पूरे जिले में हुआ। लोगों ने भी अनेखा को खूब सराहा।
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दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए आयोजित पहले महिला टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट टूर्नामेंट 2025 में भारत ने अपने अभियान की शुरुआत शानदार जीत के साथ की। उद्घाटन मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 10 विकेट से हराकर टूर्नामेंट में विजयी आगाज किया। यह ऐतिहासिक मैच दिल्ली के मॉडर्न स्कूल ग्राउंड, बाराखंभा रोड पर खेला गया, जहां पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने टूर्नामेंट का औपचारिक उद्घाटन किया।
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75 फीसदी दृष्टिहीनता के साथ अनेखा देवी ने अपने सपनों की साकार करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। अनेखा का परिवार सीमित संसाधनों वाला है। पिता बिजली विभाग में दैनिक वेतन भोगी हैं। परिवार में नेत्रहीनता कोई नई बात नहीं, उनके चाचा और चचेरी बहन भी इसी चुनौती से जूझते रहे हैं। लेकिन अनेखा ने इसे अपनी कमजोरी नहीं, ताकत बना लिया। चौथी तक निजी स्कूल, फिर बजोई हाई स्कूल और सातवीं में जम्मू के नेत्रहीन स्कूल में दाखिला लेकर अनेखा के परिवार ने उसकी शिक्षा को बल दिया। सातवीं में पहली बार ब्रेल से परिचय हुआ। इससे पहले तक शिक्षक उन्हें आम बच्चों की तरह पढ़ाते थे। चौथी तक तो होमवर्क भी कजन क्लासमेट की मदद से होता था। लेकिन अनेखा ने कभी हार नहीं मानी। अब दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में बीए प्रोग्रामिंग कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खुद को खेलों में भी साबित किया। उधर, अनेखा की बल्लेबाजी का चर्चा पूरे जिले में हुआ। लोगों ने भी अनेखा को खूब सराहा।
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