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डीसी साहब! डायरी में ही नोट की जाती हैं समस्याएं, नहीं होता समाधान
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कठुआ। डीसी साहब! हर बार कागज पर ही समस्याओं को लिखा जा रहा है, इनका हल नहीं हो पा रहा। यह आरोप बुधवार को शहर से सटे खरोट गांव में ब्लॉक दिवस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने लगाया। इसमें जिले के विभिन्न अधिकारियों के साथ पहुंचे डीसी राहुल यादव को लोगों ने समस्याएं बताईं।
ब्लॉक दिवस कार्यक्रम के दौरान लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली जुली रहीं। कुछ लोगों ने इसे केवल कागजी खानापूर्ति बताया, वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से उम्मीद जताई की कार्यक्रम में उठाई गई समस्याओं का समाधान होगा।
गांव के सामुदायिक भवन में आयोजित ब्लॉक दिवस कार्यक्रम में गोविंदसर पंचायत के सरपंच अवतार सिंह ने अधिकारियों के कामकाज की चुटकी लेते हुए कहा कि उनकी पंचायत में सरकारी रिकार्डों के अनुसार 22 सौ मतदाता हैं, जबकि जनसंख्या 1020 दिखाई गई है। ऐसी स्थिति में सरकारी कामकाज देखने वाले कर्मचारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उनकी पंचायत के वार्ड-8 में देखने को मिलता है। जहां पिछले छह साल से पाइप लाइन के क्षतिग्रस्त होने से लोगों को पानी नहीं मिल रहा। गांव की गलियों की हालत बद से बद्तर है। हजारों की आबादी वाले इस ग्रामीण इलाके में जहां हर परिवार में लोगों ने मवेशी पाल रखे हैं, वहां बार-बार मांग किए जाने के बाद भी पशुओं के उपचार का कोई प्रावधान नहीं है।
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गोविंदसर पंचायत के सरपंच ने बताया कि जिस गांव के पास अपना पंचायत घर भी न हो वहां पंचायतें क्या कर सकती हैं। हर बार की बैठकों में अधिकारी आते हैं और समस्याएं नोट करके जाते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होगी। ग्रामीण जगदीश सिंह ने गांव के जंगलों की अवैध कटाई पर रोष जताते कहा कि सरकार एक तरफ पर्यावरण को बचाने के लिए पौधे लगाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है। वही, वन विभाग की अकर्मण्यता के चलते यहां अस्थायी रूप से बसने वाले विशेष समुदाय द्वारा हर साल सैकड़ों पेड़ों को काटा जाता है, जो अभी ठीक से तैयार भी नहीं होते हैं। गांव में तालाबों की भूमि पर अवैध रूप से हो रहे कब्जे के मामले को उठाते हुए कहा कि गांव में कई स्थानों पर तालाब की भूमि पर कब्जा किया गया है और कई स्थानों पर तालाबों में आने वाले पानी के मार्ग को लोगों ने अवरुद्ध कर दिया है। जिसके कारण अब इन तालाबों का कोई महत्व ही नहीं रह गया है।
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डीसी बोले, सार्वजनिक सुविधाओं की
रक्षा करना ग्रामीणों का भी दायित्व
डीसी ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने का हर संभव प्रयास करेंगे। इसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की कुछ समस्याओं का समाधान उन्हें पंचायत स्तर पर खुद से ही करना होगा, क्योंकि कई ऐसी समस्याएं होती हैं जिन्हें हम आपसी सामंजस्य से हल कर सकते हैं। डीसी ने कहा कि गांव में लोगों के इस्तेमाल में आने वाली सार्वजनिक सुविधाओं की रक्षा करना ग्रामीणों का भी दायित्व है। अगर गांव के तालाब की भूमि पर या वहां तक पानी पहुंचाने वाले स्रोतों के मार्गों पर कोई कब्जा कर रहा है तो वह गांव के लोग ही हो सकते हैं। लिहाजा इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा। साथ ही पेड़ों की कटाई पर भी कड़ी नजर रखनी चाहिए। डीसी द्वारा दिए गए इस जवाब पर नाराज कई ग्रामीण कार्यक्रम से बाहर आ गए। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ ग्रामीणों ने ही करना है तो प्रशासन का क्या महत्व है। समस्याओं का समाधान करने में प्रशासन का इस तरह का नकारात्मक रवैया काफी अफसोस जनक है।
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मनरेगा भुगतान के साथ पेयजल
संकट दूर करने की मांग
खरोट गांव के नायब सरपंच साहब सिंह ने मनरेगा का भुगतान करने के साथ-साथ कंडी क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट का समाधान निकालने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि कंडी क्षेत्र में लगातार भू जलस्तर नीचे जा रहा है। ऐसे में यहां लगाए जाने वाले ट्यूबवेल लोगों की पेयजल समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे। लिहाजा अगर प्रशासन रणजीत सागर डैम जैसे बड़े जल स्रोत पर फिल्ट्रेशन प्लांट लगाए और वहां से पानी की सप्लाई करे तो लोगों को नियमित रूप से पानी की सप्लाई हो सकेगी। आए दिन ट्यूबवेलों में होने वाली खराबी से भी निजात मिलेगी।
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ये समस्याएं भी उठाई गईं
ग्रामीण भूषण शर्मा ने कंडी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे बंदरों के आतंक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूरी तरह से असिंचित क्षेत्र में पहले लोग थोड़ी बहुत खेती करते थे, जिससे उनके परिवारों का गुजारा चलता था, लेकिन लगातार बढ़ रही बंदरों की संख्या से अब क्षेत्र के फसल लगाना पूरी तरह बंद कर दिया है। उन्होंने खेती बंद होने से बेरोजगार हुए इलाके के लोगों को मनरेगा जैसी योजनाओं में रोजगार देने की मांग की। अशोक खजूरिया ने मांग की कि सरकार सरकारी भूमियों पर वर्षों से खेती कर रहे किसानों से उचित शुल्क लेकर उन्हें उसका मालिकाना हक दे। किसान मस्तराम शर्मा ने कहा कि कंडी क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की जमीनें निचले क्षेत्रों में हैं। जिसमें से ज्यादातर किसान भागथली, रैड़ जराई आदि इलाकों में खेती करते हैं। लेकिन वहां बंद पड़ी सिंचाई की कूहलों की आज तक संबंधित विभाग ने सुध नहीं ली है। 10 से 15 किलोमीटर दूर जाकर खेती करने वाले किसानों को सिंचाई के लिए पंपसेट लगाने पड़े हैं। जिससे एक तो उनके समय की बर्बादी होती है वहीं, इससे बिजली का खर्च भी अनावश्यक रूप से बढ़ रहा है। अगर कूहलों की दशा में सुधार हो जाए तो किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। इसके साथ लावारिस पशुओं की समस्या हल करने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की भी मांग की गई।
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ब्लॉक दिवस कार्यक्रम के दौरान लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली जुली रहीं। कुछ लोगों ने इसे केवल कागजी खानापूर्ति बताया, वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से उम्मीद जताई की कार्यक्रम में उठाई गई समस्याओं का समाधान होगा।
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गांव के सामुदायिक भवन में आयोजित ब्लॉक दिवस कार्यक्रम में गोविंदसर पंचायत के सरपंच अवतार सिंह ने अधिकारियों के कामकाज की चुटकी लेते हुए कहा कि उनकी पंचायत में सरकारी रिकार्डों के अनुसार 22 सौ मतदाता हैं, जबकि जनसंख्या 1020 दिखाई गई है। ऐसी स्थिति में सरकारी कामकाज देखने वाले कर्मचारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उनकी पंचायत के वार्ड-8 में देखने को मिलता है। जहां पिछले छह साल से पाइप लाइन के क्षतिग्रस्त होने से लोगों को पानी नहीं मिल रहा। गांव की गलियों की हालत बद से बद्तर है। हजारों की आबादी वाले इस ग्रामीण इलाके में जहां हर परिवार में लोगों ने मवेशी पाल रखे हैं, वहां बार-बार मांग किए जाने के बाद भी पशुओं के उपचार का कोई प्रावधान नहीं है।
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गोविंदसर पंचायत के सरपंच ने बताया कि जिस गांव के पास अपना पंचायत घर भी न हो वहां पंचायतें क्या कर सकती हैं। हर बार की बैठकों में अधिकारी आते हैं और समस्याएं नोट करके जाते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होगी। ग्रामीण जगदीश सिंह ने गांव के जंगलों की अवैध कटाई पर रोष जताते कहा कि सरकार एक तरफ पर्यावरण को बचाने के लिए पौधे लगाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है। वही, वन विभाग की अकर्मण्यता के चलते यहां अस्थायी रूप से बसने वाले विशेष समुदाय द्वारा हर साल सैकड़ों पेड़ों को काटा जाता है, जो अभी ठीक से तैयार भी नहीं होते हैं। गांव में तालाबों की भूमि पर अवैध रूप से हो रहे कब्जे के मामले को उठाते हुए कहा कि गांव में कई स्थानों पर तालाब की भूमि पर कब्जा किया गया है और कई स्थानों पर तालाबों में आने वाले पानी के मार्ग को लोगों ने अवरुद्ध कर दिया है। जिसके कारण अब इन तालाबों का कोई महत्व ही नहीं रह गया है।
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डीसी बोले, सार्वजनिक सुविधाओं की
रक्षा करना ग्रामीणों का भी दायित्व
डीसी ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने का हर संभव प्रयास करेंगे। इसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की कुछ समस्याओं का समाधान उन्हें पंचायत स्तर पर खुद से ही करना होगा, क्योंकि कई ऐसी समस्याएं होती हैं जिन्हें हम आपसी सामंजस्य से हल कर सकते हैं। डीसी ने कहा कि गांव में लोगों के इस्तेमाल में आने वाली सार्वजनिक सुविधाओं की रक्षा करना ग्रामीणों का भी दायित्व है। अगर गांव के तालाब की भूमि पर या वहां तक पानी पहुंचाने वाले स्रोतों के मार्गों पर कोई कब्जा कर रहा है तो वह गांव के लोग ही हो सकते हैं। लिहाजा इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना होगा। साथ ही पेड़ों की कटाई पर भी कड़ी नजर रखनी चाहिए। डीसी द्वारा दिए गए इस जवाब पर नाराज कई ग्रामीण कार्यक्रम से बाहर आ गए। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ ग्रामीणों ने ही करना है तो प्रशासन का क्या महत्व है। समस्याओं का समाधान करने में प्रशासन का इस तरह का नकारात्मक रवैया काफी अफसोस जनक है।
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मनरेगा भुगतान के साथ पेयजल
संकट दूर करने की मांग
खरोट गांव के नायब सरपंच साहब सिंह ने मनरेगा का भुगतान करने के साथ-साथ कंडी क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट का समाधान निकालने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि कंडी क्षेत्र में लगातार भू जलस्तर नीचे जा रहा है। ऐसे में यहां लगाए जाने वाले ट्यूबवेल लोगों की पेयजल समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे। लिहाजा अगर प्रशासन रणजीत सागर डैम जैसे बड़े जल स्रोत पर फिल्ट्रेशन प्लांट लगाए और वहां से पानी की सप्लाई करे तो लोगों को नियमित रूप से पानी की सप्लाई हो सकेगी। आए दिन ट्यूबवेलों में होने वाली खराबी से भी निजात मिलेगी।
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ये समस्याएं भी उठाई गईं
ग्रामीण भूषण शर्मा ने कंडी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे बंदरों के आतंक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूरी तरह से असिंचित क्षेत्र में पहले लोग थोड़ी बहुत खेती करते थे, जिससे उनके परिवारों का गुजारा चलता था, लेकिन लगातार बढ़ रही बंदरों की संख्या से अब क्षेत्र के फसल लगाना पूरी तरह बंद कर दिया है। उन्होंने खेती बंद होने से बेरोजगार हुए इलाके के लोगों को मनरेगा जैसी योजनाओं में रोजगार देने की मांग की। अशोक खजूरिया ने मांग की कि सरकार सरकारी भूमियों पर वर्षों से खेती कर रहे किसानों से उचित शुल्क लेकर उन्हें उसका मालिकाना हक दे। किसान मस्तराम शर्मा ने कहा कि कंडी क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की जमीनें निचले क्षेत्रों में हैं। जिसमें से ज्यादातर किसान भागथली, रैड़ जराई आदि इलाकों में खेती करते हैं। लेकिन वहां बंद पड़ी सिंचाई की कूहलों की आज तक संबंधित विभाग ने सुध नहीं ली है। 10 से 15 किलोमीटर दूर जाकर खेती करने वाले किसानों को सिंचाई के लिए पंपसेट लगाने पड़े हैं। जिससे एक तो उनके समय की बर्बादी होती है वहीं, इससे बिजली का खर्च भी अनावश्यक रूप से बढ़ रहा है। अगर कूहलों की दशा में सुधार हो जाए तो किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। इसके साथ लावारिस पशुओं की समस्या हल करने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की भी मांग की गई।