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Kathua News: उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क में उपकरण लगाने का काम पूरा
Fri, 25 Jul 2025 01:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Fri, 25 Jul 2025 01:45 AM IST
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बायोटेक पार्क कठुआ संवाद
साढ़े छह करोड़ से स्थापित हुए उपकरण, इनक्यूबेटर से लेकर जांच की मिलेगी स्टार्टअप को सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क में सितंबर माह में अनुसंधान से लेकर स्टार्टअप को बढ़ावा देने का काम शुरू होने जा रहा है। बायोटेक पार्क में सभी उपकरण स्थापित कर लिए गए हैं। और उपकरण स्थापित करने वाली कंपनी को इसे सीएसआईआर आईआईएम को हस्तांतरित करने के लिए भी निर्देश दे दिए गए हैं।
इसके लिए अगले 15 दिन में उपकरणों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उधर, आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस परियोजना को पीपीपी मोड पर चलाए जाने को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। कृषि-उद्यमियों, स्टार्टअप्स, प्रगतिशील किसानों, वैज्ञानिकों, विद्वानों और छात्रों के लिए यह रोजगार और विचार के नए द्वार खोलने का काम करेगा।
दरअसल, कठुआ के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में 46 करोड़ की राशि से 10.50 एकड़ पर तैयार उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क का निर्माण करवाया गया है। मई 2022 में इमारत का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने किया। यह परियोजना भारत सरकार के बायोटेक्नॉलजी विभाग की फंडिंग से पूरी की गई है। जम्मू कश्मीर में 35 सौ के लगभग औषधीय गुण के पेड़ पौधे पाए जाते हैं। ऐसे में प्रदेश के किसी भी कौने से किसान, युवा यहां अनुसंधान करवाकर अपने उत्पाद को बेहतर बना सकेगा। खास तौर से भद्रवाह में लैवेंडर की बड़े पैमाने पर खेती के बाद यह परियोजना इस व्यवसाय के लिए भी नए आयाम खोलेगी।
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इस बायोटेक पार्क से जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधताओं, औषधीय और ऐरामैटिक पौधों पर अनुसंधान होगा, वहीं यह ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा। पार्क जम्मू संभाग के कंडी इलाकों से लेकर भद्रवाह, बनी, बसोहली और किश्तवाड़ आदि के मौसम के अनुकूल औषधीय पौधों की पैदावार बढ़ाकर किसानों को पारंपरिक खेती से अलग बेहतर आय के साधन भी उपलब्ध कराएगा। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर आईआईआईएम, जम्मू की ओर से फिलहाल इसकी देखरेख की जा रही है। उत्तर भारत का यह बायोटेक पार्क जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलावा हिमाचल, पंजाब सहित अन्य राज्यों के लिए भी सहायक सिद्ध होगा खासकर तब जबकि देशभर से उद्योग को कठुआ जिले में आकर्षित किया है।
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बायोटेक पार्क में यह होगी सुविधाएं
एक्सट्रेक्शन-जिसमें पायलट स्केल पौधों से एक्सट्रेक्शन की जाएगी
कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा
सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन किया जाएगा
एनालिटिकल लैब सुविधा
ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल
बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम
कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी
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बायोटेक पार्क कृषि, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तरीके से सहायक होने जा रहा है। विश्लेषणात्मक, परीक्षण, प्रयोगात्मक लैब पूरी तरह से तैयार हो गई है। इससे न सिर्फ स्टार्ट अप को फायदा मिलेगा बल्कि स्कालर, इनटर्न और विद्यार्थियों को भी एक्सपोजर मिलेगा। अगले 15 दिन में इसे हैंडओवर करने के लिए कहा गया है।
- डॉ. जबीर अहमद, निदेशक, सीएसआईआर आईआईआईएम, जम्मू
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क में सितंबर माह में अनुसंधान से लेकर स्टार्टअप को बढ़ावा देने का काम शुरू होने जा रहा है। बायोटेक पार्क में सभी उपकरण स्थापित कर लिए गए हैं। और उपकरण स्थापित करने वाली कंपनी को इसे सीएसआईआर आईआईएम को हस्तांतरित करने के लिए भी निर्देश दे दिए गए हैं।
इसके लिए अगले 15 दिन में उपकरणों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उधर, आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस परियोजना को पीपीपी मोड पर चलाए जाने को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। कृषि-उद्यमियों, स्टार्टअप्स, प्रगतिशील किसानों, वैज्ञानिकों, विद्वानों और छात्रों के लिए यह रोजगार और विचार के नए द्वार खोलने का काम करेगा।
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दरअसल, कठुआ के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में 46 करोड़ की राशि से 10.50 एकड़ पर तैयार उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क का निर्माण करवाया गया है। मई 2022 में इमारत का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने किया। यह परियोजना भारत सरकार के बायोटेक्नॉलजी विभाग की फंडिंग से पूरी की गई है। जम्मू कश्मीर में 35 सौ के लगभग औषधीय गुण के पेड़ पौधे पाए जाते हैं। ऐसे में प्रदेश के किसी भी कौने से किसान, युवा यहां अनुसंधान करवाकर अपने उत्पाद को बेहतर बना सकेगा। खास तौर से भद्रवाह में लैवेंडर की बड़े पैमाने पर खेती के बाद यह परियोजना इस व्यवसाय के लिए भी नए आयाम खोलेगी।
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इस बायोटेक पार्क से जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधताओं, औषधीय और ऐरामैटिक पौधों पर अनुसंधान होगा, वहीं यह ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा। पार्क जम्मू संभाग के कंडी इलाकों से लेकर भद्रवाह, बनी, बसोहली और किश्तवाड़ आदि के मौसम के अनुकूल औषधीय पौधों की पैदावार बढ़ाकर किसानों को पारंपरिक खेती से अलग बेहतर आय के साधन भी उपलब्ध कराएगा। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर आईआईआईएम, जम्मू की ओर से फिलहाल इसकी देखरेख की जा रही है। उत्तर भारत का यह बायोटेक पार्क जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलावा हिमाचल, पंजाब सहित अन्य राज्यों के लिए भी सहायक सिद्ध होगा खासकर तब जबकि देशभर से उद्योग को कठुआ जिले में आकर्षित किया है।
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बायोटेक पार्क में यह होगी सुविधाएं
एक्सट्रेक्शन-जिसमें पायलट स्केल पौधों से एक्सट्रेक्शन की जाएगी
कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा
सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन किया जाएगा
एनालिटिकल लैब सुविधा
ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल
बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम
कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी
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बायोटेक पार्क कृषि, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तरीके से सहायक होने जा रहा है। विश्लेषणात्मक, परीक्षण, प्रयोगात्मक लैब पूरी तरह से तैयार हो गई है। इससे न सिर्फ स्टार्ट अप को फायदा मिलेगा बल्कि स्कालर, इनटर्न और विद्यार्थियों को भी एक्सपोजर मिलेगा। अगले 15 दिन में इसे हैंडओवर करने के लिए कहा गया है।
- डॉ. जबीर अहमद, निदेशक, सीएसआईआर आईआईआईएम, जम्मू
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