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Kathua News: 90 लाख से की जाएगी नहरों की सफाई, मार्च से हो सकेगी सिंचाई
Sat, 11 Jan 2025 09:41 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 11 Jan 2025 09:41 PM IST
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- मार्च के पहले सप्ताह में बहाल होगी सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था
- मनरेगा के तहत 130 छोटी कूहलों की होगी सफाई, 11 टेंडर किए अलॉट
कठुआ। जिले की नहरों में रिवायती तौर पर बैसाखी के समय पर मिलने वाला सिंचाई का पानी अब मार्च महीने की शुरुआत में मिल जाएगा। कठुआ नहर समेत जिले की तमाम कूहलों की सफाई के लिए काम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार से जिले की नहरों में पानी की सप्लाई को बंद कर दिया है। जिले के सात हजार किसान नहरों के सिंचाई नेटवर्क पर निर्भर हैं। नहरों का नेटवर्क 100 किलोमीटर से ज्यादा है। कठुआ कनाल का नेटवर्क 70 किलोमीटर तक फैला है।
45 दिन की नहरबंदी के बीच सिंचाई विभाग 90 लाख की लागत से मरम्मत कार्यों के साथ-साथ नहरों से गाद निकालने जा रहा है। इसके अलावा इस बार मनरेगा के तहत 130 छोटी कूहलों की सफाई करवाई जाएगी। विभाग ने क्लोजर शुरू होने के साथ ही 11 टेंडर अलॉट कर दिए हैं, जिन्हें काम करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। विभाग ने इस साल नहरों की सफाई समेत मरम्मत के लिए कुल 33 काम करवाने की योजना तैयार की है।
45 दिन में पूरे किए जाएंगे मरम्मत और सफाई के काम
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता राजीव शर्मा ने बताया कि नहरों को वार्षिक मरम्मत और सफाई के लिए शुक्रवार से बंद कर दिया गया है। 45 दिन में यह प्रक्रिया पूरी की जानी है। आम तौर पर बैसाखी को पानी छोड़े जाने की रिवायत है। लेकिन प्रयास रहेगा कि मार्च के पहले सप्ताह में ही सभी काम पूरे कर लिए जाएं। इससे यदि मौसम साथ न भी दे तो भी जरूरत के समय किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। जिले में छोटी-बड़ी दर्जनों नहरें हैं। कठुआ शहर के बीचोंबीच से होकर गुजरने वाली कठुआ कैनाल इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, जिसकी लंबाई 17 किलोमीटर है और यह 8463 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई को सुनिश्चित करती है। इस नहर के साथ लगभग 48 किलोमीटर लंबी कूहलें भी जुड़ी हैं। वहीं जिले में अन्य 14 छोटी नहरों की सफाई का काम भी किया जाना है। संवाद
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- मनरेगा के तहत 130 छोटी कूहलों की होगी सफाई, 11 टेंडर किए अलॉट
कठुआ। जिले की नहरों में रिवायती तौर पर बैसाखी के समय पर मिलने वाला सिंचाई का पानी अब मार्च महीने की शुरुआत में मिल जाएगा। कठुआ नहर समेत जिले की तमाम कूहलों की सफाई के लिए काम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार से जिले की नहरों में पानी की सप्लाई को बंद कर दिया है। जिले के सात हजार किसान नहरों के सिंचाई नेटवर्क पर निर्भर हैं। नहरों का नेटवर्क 100 किलोमीटर से ज्यादा है। कठुआ कनाल का नेटवर्क 70 किलोमीटर तक फैला है।
45 दिन की नहरबंदी के बीच सिंचाई विभाग 90 लाख की लागत से मरम्मत कार्यों के साथ-साथ नहरों से गाद निकालने जा रहा है। इसके अलावा इस बार मनरेगा के तहत 130 छोटी कूहलों की सफाई करवाई जाएगी। विभाग ने क्लोजर शुरू होने के साथ ही 11 टेंडर अलॉट कर दिए हैं, जिन्हें काम करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। विभाग ने इस साल नहरों की सफाई समेत मरम्मत के लिए कुल 33 काम करवाने की योजना तैयार की है।
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45 दिन में पूरे किए जाएंगे मरम्मत और सफाई के काम
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता राजीव शर्मा ने बताया कि नहरों को वार्षिक मरम्मत और सफाई के लिए शुक्रवार से बंद कर दिया गया है। 45 दिन में यह प्रक्रिया पूरी की जानी है। आम तौर पर बैसाखी को पानी छोड़े जाने की रिवायत है। लेकिन प्रयास रहेगा कि मार्च के पहले सप्ताह में ही सभी काम पूरे कर लिए जाएं। इससे यदि मौसम साथ न भी दे तो भी जरूरत के समय किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। जिले में छोटी-बड़ी दर्जनों नहरें हैं। कठुआ शहर के बीचोंबीच से होकर गुजरने वाली कठुआ कैनाल इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, जिसकी लंबाई 17 किलोमीटर है और यह 8463 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई को सुनिश्चित करती है। इस नहर के साथ लगभग 48 किलोमीटर लंबी कूहलें भी जुड़ी हैं। वहीं जिले में अन्य 14 छोटी नहरों की सफाई का काम भी किया जाना है। संवाद
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-फोटो 58 : कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यातिथि डॉ. राजेश कुमार व साथ मौजूद प्राचार्य। स्रोत कॉ