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Kathua News: जीएमसी में छह साल बाद भी नहीं हृदय रोग विशेषज्ञ

Mon, 23 Mar 2026 01:01 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 23 Mar 2026 01:01 AM IST
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हर महीने दर्जनों मरीजों को उपचार के लिए जीएमसी जम्मू या पंजाब के अस्पतालों में जाने को मजबूर
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संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) की स्थापना के छह साल बाद भी यहां हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) नहीं है। इसका खामियाजा आपातकालीन स्थिति में यहां इलाज के लिए आने वाले हृदय रोगियों को भुगतना पड़ रहा है।

सात लाख से अधिक आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले जीएमसी के अधीन वर्तमान में पांच उपजिला अस्पताल और 36 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों की आबादी है जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पर निर्भर है। जिले के दूरदराज या पहाड़ी इलाके से कोई हृदय रोगी आपात स्थिति में यहां पहुंचता है तो उसे विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता।
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सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन औसतन दो हृदय रोगी अस्पताल पहुंचते हैं जबकि हर महीने 10 से 12 मरीज गंभीर हालत में आते हैं। इन मरीजों को मजबूरी में जीएमसी जम्मू या पंजाब के निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इस प्रक्रिया में न केवल इलाज में देरी होती है बल्कि मरीजों और परिजनों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।
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सामान्य चिकित्सा विभाग पर बढ़ रहा दबाव

हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती का असर जीएमसी के सामान्य चिकित्सा विभाग पर भी साफ दिख रहा है। आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों का शुरुआती इलाज इसी विभाग में किया जाता है। इसके लिए ईसीजी, ईको और ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी) करवाए जाते हैं। जीएमसी में हृदय रोग संबंधी विभिन्न टेस्ट करने की सुविधा उपलब्ध है लेकिन विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कई बार जांच में देरी होने या विशेषज्ञ मार्गदर्शन न मिलने के कारण मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है।


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हृदय रोग विभाग स्थापित करना समय की जरूरत

स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों के अनुसार मौजूदा समय में हर आयुवर्ग में हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में पूर्ण हृदय रोग उपचार की सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बेहतर उपचार की सुविधा न होने के कारण अधिकांश मरीजों को रेफर ही करना पड़ता है।

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जीएमसी में हृदय रोग विभाग को स्थापित किए जाने की मांग काफी समय से चल रही है। इस मुद्दे को लेकर सरकार को भी अवगत करवाया जा चुका है। कॉलेज में सुविधाओं के विस्तार हो रहा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में लोगों को हृदय रोग के मामलों में भी हर तरह के उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। - डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ
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