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Kathua News: भूमि विवाद में फंसे आरोपी को अदालत से राहत, सबूतों के अभाव में बरी

Mon, 19 Jan 2026 12:21 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 19 Jan 2026 12:21 AM IST
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भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़े 10 साल पुराने मामले में अदालत ने सुनाया फैसला
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कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़े 10 साल पुराने मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत में आदेश में स्पष्ट किया कि मामला आपराधिक न होकर नागरिक विवाद प्रतीत होता और अभियोजन पक्ष आरोपी के आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है।


कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 24 नवंबर 2014 का है। इसमें हीरानगर पुलिस ने पीड़ित चरण दास की शिकायत पर आरपीसी की धारा 447 के तहत आपराधिक अतिक्रमण का मामला दर्ज किया गया था। इसमें पीड़ित ने शिकायत में बताया था कि आरोपी सुभाष चंद्र ने हीरानगर स्थित पोर्थेन में कृषि भूमि में घुसकर ट्रैक्टर से जुताई कर गेहूं की फसल बो दी। इसके बाद पुलिस की ओर से मामले में जांच अधिकारी ने गवाहों के बयान, पटवारी और गिरदावर की रिपोर्ट के आधार पर चालान 11 मार्च 2015 को अदालत में पेश किया गया। अदालत की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों ने बताया कि विवादित भूमि पर गेहूं की फसल थी जिसे आरोपी ने नष्ट कर दिया। अन्य गवाह ने बताया कि घटना के बाद पुलिस व राजस्व अधिकारी मौके पर आए थे और उन्होंने चरण दास को भूमि का कृषक बताया। गिरदावर और पटवारी ने गवाही में बताया कि विवादित खसरा नंबर विशाल है जिसमें 452 कनाल से ज्यादा भूमि है और आरोपी सुभाष चंद्र भी इस भूमि का संयुक्त मालिक है। शिकायतकर्ता चरण दास की मौत होने से उनका बयान कोर्ट में दर्ज नहीं हो सका। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि मामला मूता नागरिक विवाद का है और किसी भी गवाह ने घटना को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा था जबकि पटवारी की गवाही से स्पष्ट हुआ कि आरोपी स्वयं भूमि का संयुक्त मालिक है। इसके बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। लिहाजा आरोपी पर लगे सभी आरोपों से बरी कर उसके जमानती और व्यक्तिगत बांड को भी खारिज कर मामले का निपटारा कर दिया।
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