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Kathua News: डेंगू को लेकर बरतें सतर्कता, जिले में अगस्त से नवंबर तक आते हैं ज्यादा मामले
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कठुआ। जिले में पिछले एक दशक में डेंगू के जानलेवा होने के बाद अब साल भर की तैयारी ने पिछले दो साल में इसे नियंत्रित कर दिया है। हर साल डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं लेकिन इनसे होने वाली मौत पर लगाम लग गई है। उधर, जिले में डेंगू की दस्तक के बाद अब विशेष वार्ड और जांच की व्यवस्था भी हो गई है। फिर भी इस बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
दरअसल हर साल औसतन कठुआ जिले में सात सौ से अधिक मामले डेंगू ग्रस्त लोगों के सामने आते हैं। पिछले लगभग एक दशक में डेंगू ने उन इलाकों को सबसे ज्यादा हॉट स्पॉट बनाया जहां पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं थी। लोग बर्तनों में पानी जमा करते रहे। यहां डेंगू का एक मरीज सामने आने के बाद प्रसार तेजी से होता रहा। पिछले दो साल में सामने आए ज्यादातर डेंगू के मामलों में मरीजों को डॉक्टरी परामर्श के अलावा अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ी। जिन्हें भर्ती किया भी गया वो भी कुछ ही दिनों में स्वस्थ होकर घर लौट गए।
जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ सुरेंद्र कुमार अत्री ने बताया कि जीएमसी में न सिर्फ जांच को बढ़ाया गया है बल्कि यहां आपात स्थिति से निपटने के लिए हर साल बीस बेड का डेंगू वार्ड भी तैयार किया जाता है। एलाइजा मशीनों से अब रात और दिन दोनों समय सैंपल की जांच की जाती है। बाकायदा अस्पताल के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट भी सुनिश्चित किए जाते हैं। एचडीयू और आईसीयू की सुविधा भी जीएमसी में उपलब्ध है।
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अगस्त से नवंबर तक जिले में बढ़ते हैं डेंगू के मामले
बरसात के आगाज के साथ ही जिले में लोगाें को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। पिछले कुछ साल के आंकड़ों की बात करें तो हर साल अगस्त महीने से नवंबर महीने तक डेंगू के मामले ज्यादा आते हैं। दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े तक डेंगू खत्म हो जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 24 में 627 और 2024 25 में 788 मामले डेंगू के सामने आ चुके हैं।
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एडवाइजरी जारी
- घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें
- बर्तन में पानी इकट्ठा न होने दें
- बर्तन को खाली करके रखें या उसे उलटा करके रखें
- अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करते हैं तो उसे ढक कर रखें
- अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते हैं तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के अंडे को हटाया जा सके।
- घर में कीटनाशक का छिड़काव करें
- कूलर का काम न होने पर उसमें मौजूद पानी को निकालकर सुखा दें। जरूरत अनुसार कूलर का पानी रोज नियमित बदलते रहें।
- किसी भी खुली जगह में जैसे गड्ढों, गमले में या कचरे में पानी जमा न होने दें। अगर पानी जमा है तो उसमें मिट्टी डाल दें
- खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दें। ऐसे कपड़े पहनें, जो पूरे शरीर को ढक सकें। रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- अपने आसपास के लोगों को भी मच्छर को फैलने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करें।
- अपने आसपास अगर कोई डेंगू बुखार के मरीज का पता चलता है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग एवं नगर परिषद को दें, जिससे तुरंत मच्छर विरोधी उपाय किया जा सकें।
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दरअसल हर साल औसतन कठुआ जिले में सात सौ से अधिक मामले डेंगू ग्रस्त लोगों के सामने आते हैं। पिछले लगभग एक दशक में डेंगू ने उन इलाकों को सबसे ज्यादा हॉट स्पॉट बनाया जहां पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं थी। लोग बर्तनों में पानी जमा करते रहे। यहां डेंगू का एक मरीज सामने आने के बाद प्रसार तेजी से होता रहा। पिछले दो साल में सामने आए ज्यादातर डेंगू के मामलों में मरीजों को डॉक्टरी परामर्श के अलावा अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ी। जिन्हें भर्ती किया भी गया वो भी कुछ ही दिनों में स्वस्थ होकर घर लौट गए।
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जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ सुरेंद्र कुमार अत्री ने बताया कि जीएमसी में न सिर्फ जांच को बढ़ाया गया है बल्कि यहां आपात स्थिति से निपटने के लिए हर साल बीस बेड का डेंगू वार्ड भी तैयार किया जाता है। एलाइजा मशीनों से अब रात और दिन दोनों समय सैंपल की जांच की जाती है। बाकायदा अस्पताल के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट भी सुनिश्चित किए जाते हैं। एचडीयू और आईसीयू की सुविधा भी जीएमसी में उपलब्ध है।
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अगस्त से नवंबर तक जिले में बढ़ते हैं डेंगू के मामले
बरसात के आगाज के साथ ही जिले में लोगाें को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। पिछले कुछ साल के आंकड़ों की बात करें तो हर साल अगस्त महीने से नवंबर महीने तक डेंगू के मामले ज्यादा आते हैं। दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े तक डेंगू खत्म हो जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 24 में 627 और 2024 25 में 788 मामले डेंगू के सामने आ चुके हैं।
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एडवाइजरी जारी
- घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें
- बर्तन में पानी इकट्ठा न होने दें
- बर्तन को खाली करके रखें या उसे उलटा करके रखें
- अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करते हैं तो उसे ढक कर रखें
- अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते हैं तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के अंडे को हटाया जा सके।
- घर में कीटनाशक का छिड़काव करें
- कूलर का काम न होने पर उसमें मौजूद पानी को निकालकर सुखा दें। जरूरत अनुसार कूलर का पानी रोज नियमित बदलते रहें।
- किसी भी खुली जगह में जैसे गड्ढों, गमले में या कचरे में पानी जमा न होने दें। अगर पानी जमा है तो उसमें मिट्टी डाल दें
- खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दें। ऐसे कपड़े पहनें, जो पूरे शरीर को ढक सकें। रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- अपने आसपास के लोगों को भी मच्छर को फैलने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करें।
- अपने आसपास अगर कोई डेंगू बुखार के मरीज का पता चलता है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग एवं नगर परिषद को दें, जिससे तुरंत मच्छर विरोधी उपाय किया जा सकें।
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