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लखनपुर में पहुंचते ही सैलानियों को लुभाएंगे जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प-हथकरघा उत्पाद
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कठुआ। जम्मू कश्मीर के प्रसिद्ध पश्मीना उत्पादों, बसोहली चित्रकला और बांस की कलाकृतियों और उत्पादों से जल्द पर्यटक प्रदेश में दाखिल होते ही रूबरू होंगे। यही नहीं कारीगरों की मेहनत को सफल बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देने के इस प्रयास में पर्यटक इन वस्तुओं की खरीद भी मौके पर ही कर सकेंगे। हथकरघा और हस्तशिल्प विभाग ने इसके 70 लाख रुपये की लागत से डीपीआर भी तैयार कर ली है। इसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजने की तैयारी है।
प्रदेश के प्रवेशद्वार लखनपुर में महाराजा गुलाब सिंह की विशाल प्रतिमा स्थापित किए जाने का काम तेजी से जारी है। लखनपुर कॉरिडोर पर ही यह प्रतिमा स्थल जल्द ही सेल्फी प्वाइंट भी बनेगा और पर्यटकों को कुछ समय रुकने के लिए मजबूर भी करेगा। ऐसे में सरकार जम्मू-कश्मीर की विरासत के साथ-साथ यहां के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की झलक भी पर्यटकों को दिखाना चाहती है।
कुछ समय पहले ही विभागीय निदेशक ने मंडलायुक्त के निर्देश के बाद लखनपुर का दौरा भी किया था जिसके बाद रावी पुल से प्रवेश करने के साथ ही दाईं ओर की इमारत को हस्तशिल्प और हथकरघा के विस्तार के लिए उपयुक्त पाया गया। वर्तमान में यह इमारत सुरक्षाकर्मियों के हवाले है। इमारत के नवीकरण और आसपास लैंड स्केपिंग आदि के लिए डीपीआर में से अधिकतम राशि को खर्च किया जाएगा।
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हथकरघा में पश्मीना शॉल, मफलर और हस्तशिल्प में बसोहली चित्रकला के साथ-साथ बांस के स्थानीय उत्पादों को एक बेहतर मंच देने के लिए कुछ समय पहले विभागीय निदेशक ने लखनपुर का दौरा किया था। प्रदेश में दाखिल होने के साथ ही जम्मू कश्मीर के उत्पादों को यहां एक ही स्थान पर पर्यटक खरीद सकेंगे जिससे इसके कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रदीप शान
सहायक निदेशक
हथकरघा और हस्तशिल्प विभाग कठुआ
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प्रदेश के प्रवेशद्वार लखनपुर में महाराजा गुलाब सिंह की विशाल प्रतिमा स्थापित किए जाने का काम तेजी से जारी है। लखनपुर कॉरिडोर पर ही यह प्रतिमा स्थल जल्द ही सेल्फी प्वाइंट भी बनेगा और पर्यटकों को कुछ समय रुकने के लिए मजबूर भी करेगा। ऐसे में सरकार जम्मू-कश्मीर की विरासत के साथ-साथ यहां के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की झलक भी पर्यटकों को दिखाना चाहती है।
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कुछ समय पहले ही विभागीय निदेशक ने मंडलायुक्त के निर्देश के बाद लखनपुर का दौरा भी किया था जिसके बाद रावी पुल से प्रवेश करने के साथ ही दाईं ओर की इमारत को हस्तशिल्प और हथकरघा के विस्तार के लिए उपयुक्त पाया गया। वर्तमान में यह इमारत सुरक्षाकर्मियों के हवाले है। इमारत के नवीकरण और आसपास लैंड स्केपिंग आदि के लिए डीपीआर में से अधिकतम राशि को खर्च किया जाएगा।
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हथकरघा में पश्मीना शॉल, मफलर और हस्तशिल्प में बसोहली चित्रकला के साथ-साथ बांस के स्थानीय उत्पादों को एक बेहतर मंच देने के लिए कुछ समय पहले विभागीय निदेशक ने लखनपुर का दौरा किया था। प्रदेश में दाखिल होने के साथ ही जम्मू कश्मीर के उत्पादों को यहां एक ही स्थान पर पर्यटक खरीद सकेंगे जिससे इसके कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रदीप शान
सहायक निदेशक
हथकरघा और हस्तशिल्प विभाग कठुआ
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