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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   In the name of cleaning the Ravi-Tawi canal, only bushes were cut, water is not reaching the last end

Kathua News: रावी तवी कनाल में सफाई के नाम पर सिर्फ काटी झाड़ियां, अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा पानी

Wed, 19 Mar 2025 01:46 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Wed, 19 Mar 2025 01:46 AM IST
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In the name of cleaning the Ravi-Tawi canal, only bushes were cut, water is not reaching the last end
नहर की सफाई के बाद भी दिख रहा मलबा। संवाद - फोटो : kathua
साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ विभाग कर रहा है खानापूर्ति, कूहलों के मुहाने पर मलबा और पत्थरों के ढेर, किसानों में विभाग के खिलाफ गुस्सा
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कठुआ। पिछले कई सालों में रावी तवी कनाल में साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ झाड़ियों को काटने का काम किया जा रहा है। इससे आखिर छोर तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है। किसानों को खासकर सिंचाई के समय मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
रावी तवी सिंचाई कॉम्प्लेक्स (आरटीआईसी) अपर डिविजन के तहत आने वाली नहर पिछले कई साल से सही तरीके से नहर में से गाद निकालने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। दरअसल जनवरी महीने से नहर की साफ-सफाई के नाम पर पानी को बंद कर दिया था। इसके बाद आरटीआईसी की और से नहर से गाद निकालने का कार्य चल रहा है। जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर में संबंधित विभाग की ओर लिफ्ट से कश्मीर कनाल पानी उठाकर नहर में डाला जाता है। इसके बाद विभिन्न ट्रीब्यूटरी (सहायक नहर) से किसानों को सिंचाई की व्यवस्था की जाती है। पिछले तीन महीने से साफ-सफाई के लिए बंद नहर के कुछ जगहों पर सिर्फ झाड़ियों को काटा गया है। ज्यादातर सहायक नहर के आगे अभी भी मलबा उसी तरह पड़ा हुआ है। नहर के हालात इतने दयनीय हैं कि लखनपुर से लेकर जगतपुर के मग्गर खड्ड तक तो नहर के किनारे लगी झाड़ियों को साफ भी नहीं किया गया है। संवाद
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गांव में नहरी पानी की सीधे तौर पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मगर फिर भी कुछ लोगों ने नहर के साथ लगते खेतों में मोटर पंप लगाकर सिंचाई की व्यवस्था की है। सिंचाई विभाग ने पहली सहायक नहर ही मग्गर खड्ड के पार रेलवे स्टेशन के नजदीक बनाई है। दो साल पहले मटांड़ी गांव के पीछे-पीछे जेसीबी से कुछ मलबा निकाला गया था। तब स्थानीय लोगों ने उनसे जगतपुर में टूट गई सीढ़ी की मरम्मत कराने को कहा था, लेकिन उसकी मरम्मत अब तक नहीं करवाई है।
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-अंचल चंद, निवासी जगतपुर

सही ढंग से नहर की साफ सफाई न होने से हटली मार्ग के पास पहली सहायक नहर किसानों की जरूरत का पानी नहीं मिल पाता है। पहले चार पांच किसानों के खेतों की सिंचाई हो पाती है। नहर होते हुए भी किसान बरसात आने का इंतजार करते हैं। खेतों में पानी एक फसल के लिए भी नहीं मिल रहा है, तो आबियाना साल के दो बार कहां तक उचित है।

--कुलदीप सिंह, किसान और पूर्व पंच चक राम सिंह

हमारी पांच एकड़ भूमि को नहरी पानी लगता है। मगर कभी भी पानी पूरा नहीं मिला। नहर की साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती है। इस समय गेहूं की फसल को पानी जरूरत है, लेकिन नहर में पानी नहीं है। धान की फसल लगाने के समय भी पानी तब मिलता है जब पूरी बरसात उतर जाती है। -जैमल सिंह, किसान गांव खरोट


मेरे खेत अंतिम छोर पर हैं। मुझे पिछले कई सालों से सिंचाई के समय पानी नहीं मिला। इसके चलते धान की फसल लगाना ही छोड़ दिया। लेकिन फिर भी पिछले दो सालों से आबियाना लेने के लिए नंबरदार आता है। हमारे खेत नहर से सिर्फ 200 मीटर की दूरी है फिर भी खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है।

-हरबंस सिंह, किसान गांव खरोट

नहर की साफ-सफाई का काम जोर शोर से और बढ़िया तरीके से चल रहा है। अगले कुछ दिनों में नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा।


- रवि कुमार, कार्यकारी अभियंता, आरटीआईसी अपर डिविजन
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