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Kathua News: एमबीबीएस सीटों के बंटवारे को लेकर हिंदू समुदाय का परशुराम चौक पर प्रदर्शन
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श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के सदस्य शहर में प्रदर्शन करते हुए
कठुआ। श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में एमबीबीएस सीटों के बंटवारे को लेकर हिंदू समुदाय ने शनिवार को श्री परशुराम जी चौक पर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के बैनर तले श्राइन बोर्ड के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीसी राजेश शर्मा को सौंपा।
समिति के संयोजक एडवोकेट हिंमाशु शर्मा के नेतृत्व हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि जिस प्रकार से मेडिकल सीटों के बंटवारे में हिंदू विद्यार्थियों की अनदेखी की गई है, उसे बर्दाश्त नही किया जा सकता है। वहीं इस मामले में हिंदू समुदाय के अब तक विरोध को भी जिस तरह से अनदेखा करने का प्रयास किया जा रहा है वह एक बड़े जनांदोलन का कारण बन सकता है। लिहाजा इस मसले में सरकार को अपना दखल देना चाहिए। नही तो आने वाले दिनों में स्थिति खराब हो सकती है।
प्रदर्शन में शामिल दिवाकर शर्मा ने आरोप ने कहा कि हिंदू छात्रों को उन शिक्षा संस्थानों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है जो इसी समुदाय के द्वारा किए जाने वाले दान से संचालित हो रहे है। इस संस्थान में हिंदू छात्रों को प्राथमिकता देने के बजाए समुदाय विशेष को प्राथमिकता दी जा रही है। जिसे बर्दाश्त नही किया जा सकता है। वहीं राहुल देव शर्मा ने कहा कि अगर अलीगढ़ विश्वविद्यालय में मुस्लिम विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जा सकती है तो श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में हिंदू विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए।
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वहीं, श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट हिमाशु शर्मा ने कहा कि आज महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन प्रस्तुत कर भक्तों की भावनाओं और आकांक्षाओं की रक्षा हेतु हस्तक्षेप की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अधिनियम, 1988 के तहत बने संस्थान भक्तों के चढ़ावे से संचालित होते हैं, इसलिए उनका संचालन भक्तों की अपेक्षाओं और मूल धार्मिक उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की 50 एमबीबीएस सीटों में से 45 सीटें ऐसे छात्रों को आवंटित की गई हैं जिनका इस पवित्र स्थल से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। इस असमानता के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन भी शुरू हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को भेजे जाने वाले ज्ञापन में यह शिकायत किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि इस सिद्धांत पर आधारित है कि भक्तों के चढ़ावे से स्थापित संस्थान उनके हितों और आस्था के अनुरूप चलने चाहिए। समिति ने मांग की है कि वहां सभी सीटें हिंदू छात्रों को आवंटित की जाएं, श्राइन बोर्ड अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाएं और एक पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाए ताकि संस्थान भक्तों की अपेक्षाओं से जुड़े रहें। समिति ने राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया है कि संबंधित मंत्रालयों को जांच के निर्देश दिए जाएं और ऐसी नीति बनाई जाए जिससे भक्तों की भावनाओं का सम्मान हो सके तथा पवित्र मंदिर की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
प्रदर्शन में सक्षम शर्मा, अखिल जसरोटिया, करतार वर्मा, विशाल सर्राफ सहित कई अन्य भी शामिल रहे।
उधर, श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति बसोहली के सदस्यों ने भी समिति सदस्य अश्वनी कुमार के नेतृत्व में, तहसीलदार बसोहली को एक ज्ञापन सौंपा। भारत के राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में एमबीबीएस सीटों के आवंटन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
समिति ने आरोप लगाया कि इस वर्ष संस्थान की कुल 50 एमबीबीएस सीटों में से 42 सीटें मुस्लिम छात्रों को आवंटित की गई हैं, जिससे भक्त समुदाय में असंतोष और आक्रोश की भावना उत्पन्न हुई है। उन्होंने मांग की कि भक्तों की भावनाओं और अपेक्षाओं का सम्मान करते हुए प्रवेश पैटर्न की समीक्षा की जाए और इसे मूल धार्मिक एवं परोपकारी उद्देश्यों के अनुरूप बनाया जाए।
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समिति के संयोजक एडवोकेट हिंमाशु शर्मा के नेतृत्व हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि जिस प्रकार से मेडिकल सीटों के बंटवारे में हिंदू विद्यार्थियों की अनदेखी की गई है, उसे बर्दाश्त नही किया जा सकता है। वहीं इस मामले में हिंदू समुदाय के अब तक विरोध को भी जिस तरह से अनदेखा करने का प्रयास किया जा रहा है वह एक बड़े जनांदोलन का कारण बन सकता है। लिहाजा इस मसले में सरकार को अपना दखल देना चाहिए। नही तो आने वाले दिनों में स्थिति खराब हो सकती है।
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प्रदर्शन में शामिल दिवाकर शर्मा ने आरोप ने कहा कि हिंदू छात्रों को उन शिक्षा संस्थानों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है जो इसी समुदाय के द्वारा किए जाने वाले दान से संचालित हो रहे है। इस संस्थान में हिंदू छात्रों को प्राथमिकता देने के बजाए समुदाय विशेष को प्राथमिकता दी जा रही है। जिसे बर्दाश्त नही किया जा सकता है। वहीं राहुल देव शर्मा ने कहा कि अगर अलीगढ़ विश्वविद्यालय में मुस्लिम विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जा सकती है तो श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में हिंदू विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए।
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वहीं, श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट हिमाशु शर्मा ने कहा कि आज महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन प्रस्तुत कर भक्तों की भावनाओं और आकांक्षाओं की रक्षा हेतु हस्तक्षेप की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अधिनियम, 1988 के तहत बने संस्थान भक्तों के चढ़ावे से संचालित होते हैं, इसलिए उनका संचालन भक्तों की अपेक्षाओं और मूल धार्मिक उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की 50 एमबीबीएस सीटों में से 45 सीटें ऐसे छात्रों को आवंटित की गई हैं जिनका इस पवित्र स्थल से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। इस असमानता के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन भी शुरू हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को भेजे जाने वाले ज्ञापन में यह शिकायत किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि इस सिद्धांत पर आधारित है कि भक्तों के चढ़ावे से स्थापित संस्थान उनके हितों और आस्था के अनुरूप चलने चाहिए। समिति ने मांग की है कि वहां सभी सीटें हिंदू छात्रों को आवंटित की जाएं, श्राइन बोर्ड अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाएं और एक पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाए ताकि संस्थान भक्तों की अपेक्षाओं से जुड़े रहें। समिति ने राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया है कि संबंधित मंत्रालयों को जांच के निर्देश दिए जाएं और ऐसी नीति बनाई जाए जिससे भक्तों की भावनाओं का सम्मान हो सके तथा पवित्र मंदिर की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
प्रदर्शन में सक्षम शर्मा, अखिल जसरोटिया, करतार वर्मा, विशाल सर्राफ सहित कई अन्य भी शामिल रहे।
उधर, श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति बसोहली के सदस्यों ने भी समिति सदस्य अश्वनी कुमार के नेतृत्व में, तहसीलदार बसोहली को एक ज्ञापन सौंपा। भारत के राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में एमबीबीएस सीटों के आवंटन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
समिति ने आरोप लगाया कि इस वर्ष संस्थान की कुल 50 एमबीबीएस सीटों में से 42 सीटें मुस्लिम छात्रों को आवंटित की गई हैं, जिससे भक्त समुदाय में असंतोष और आक्रोश की भावना उत्पन्न हुई है। उन्होंने मांग की कि भक्तों की भावनाओं और अपेक्षाओं का सम्मान करते हुए प्रवेश पैटर्न की समीक्षा की जाए और इसे मूल धार्मिक एवं परोपकारी उद्देश्यों के अनुरूप बनाया जाए।