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Kathua News: जीएमसी में कड़ाके की ठंड में फर्श पर तीमारदार, बेफिक्र जिम्मेदार
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-अस्पताल में नहीं रैन बसेरा, रात में फर्श पर सो रहे मरीजों के परिजन
-कठुआ के अलावा बनी, बसोहली, बिलावर, लोहाई मल्हार से आते हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी कठुआ में मरीजों के तीमारदारों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कड़ाके की सर्दी में मरीजों के तीमारदारों को फर्श पर रातें काटनी पड़ रही हैं जबकि जिम्मेदार इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
करीब पांच सौ बेड वाले इस अस्पताल में करोड़ों की लागत से इमारतों का निर्माण किया गया है। कई निर्माण अभी जारी हैं लेकिन तीमारदारों के लिए एक भी रैन बसेरे का इंतजाम नहीं है। नतीजतन, ठंडी रातों में मरीजों के साथ आए लोग फर्श पर बिस्तर बिछाने को मजबूर हैं। जीएमसी में कठुआ शहर के अलावा बनी, बसोहली, बिलावर, लोहाई मल्हार, रामकोट, महानपुर से लेकर सीमावर्ती हीरानगर के इलाकों से मरीज उपचार के लिए आते हैं।
करीब एक दशक पहले अस्पताल परिसर में एक इमारत बनाई गई थी। बताया गया था कि यह भवन तीमारदारों के लिए बनाया जा रहा है। निर्माण के बाद इमारत सालों तक बंद रही और बाद में चर्म रोग व फिजियोथेरपी विभाग स्थापित कर दिया गया। जीएमसी शहर के बाहरी किनारे पर स्थित है। यहां आसपास कोई धर्मशाला या अन्य ठहरने का इंतजाम नहीं है। ऐसे में दूर दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को रात काटने के लिए परेशान होना पड़ता है।
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जीएमसी बनने के बाद चार गुना बढ़ी मरीजों की संख्या
लोगों का कहना है कि पहले यह परिसर जिला अस्पताल था। इसका 2019 से जीएमसी के सहायक अस्पताल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद से मरीजों की संख्या में चार गुना से अधिक बढ़ोतरी हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में तीमारदार भी आते हैं। इनमें से अधिकांश की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे होटल में ठहर सकें। कई मरीजों की हालत ऐसी होती है कि तीमारदारों को उनके पास ही रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि करोड़ों की लागत से अस्पताल की इमारतें बनाई जा रही हैं तो तीमारदारों के लिए रैन बसेरे का इंतजाम भी होना चाहिए। इसे लेकर प्रशासन को प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
..............
जीएमसी कठुआ में तीमारदारों के लिए रैन बसेरा होना आवश्यक है जो कि फिलहाल परिसर में मौजूद नहीं है। रैन बसेरा का निर्माण प्रबंधन की योजना का हिस्सा है। इसे आने वाले दिनों में मूर्त रूप दिया जाएगा।
-डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ
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-कठुआ के अलावा बनी, बसोहली, बिलावर, लोहाई मल्हार से आते हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी कठुआ में मरीजों के तीमारदारों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कड़ाके की सर्दी में मरीजों के तीमारदारों को फर्श पर रातें काटनी पड़ रही हैं जबकि जिम्मेदार इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
करीब पांच सौ बेड वाले इस अस्पताल में करोड़ों की लागत से इमारतों का निर्माण किया गया है। कई निर्माण अभी जारी हैं लेकिन तीमारदारों के लिए एक भी रैन बसेरे का इंतजाम नहीं है। नतीजतन, ठंडी रातों में मरीजों के साथ आए लोग फर्श पर बिस्तर बिछाने को मजबूर हैं। जीएमसी में कठुआ शहर के अलावा बनी, बसोहली, बिलावर, लोहाई मल्हार, रामकोट, महानपुर से लेकर सीमावर्ती हीरानगर के इलाकों से मरीज उपचार के लिए आते हैं।
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करीब एक दशक पहले अस्पताल परिसर में एक इमारत बनाई गई थी। बताया गया था कि यह भवन तीमारदारों के लिए बनाया जा रहा है। निर्माण के बाद इमारत सालों तक बंद रही और बाद में चर्म रोग व फिजियोथेरपी विभाग स्थापित कर दिया गया। जीएमसी शहर के बाहरी किनारे पर स्थित है। यहां आसपास कोई धर्मशाला या अन्य ठहरने का इंतजाम नहीं है। ऐसे में दूर दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को रात काटने के लिए परेशान होना पड़ता है।
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जीएमसी बनने के बाद चार गुना बढ़ी मरीजों की संख्या
लोगों का कहना है कि पहले यह परिसर जिला अस्पताल था। इसका 2019 से जीएमसी के सहायक अस्पताल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद से मरीजों की संख्या में चार गुना से अधिक बढ़ोतरी हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में तीमारदार भी आते हैं। इनमें से अधिकांश की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे होटल में ठहर सकें। कई मरीजों की हालत ऐसी होती है कि तीमारदारों को उनके पास ही रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि करोड़ों की लागत से अस्पताल की इमारतें बनाई जा रही हैं तो तीमारदारों के लिए रैन बसेरे का इंतजाम भी होना चाहिए। इसे लेकर प्रशासन को प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
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जीएमसी कठुआ में तीमारदारों के लिए रैन बसेरा होना आवश्यक है जो कि फिलहाल परिसर में मौजूद नहीं है। रैन बसेरा का निर्माण प्रबंधन की योजना का हिस्सा है। इसे आने वाले दिनों में मूर्त रूप दिया जाएगा।
-डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ