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घाटी औद्योगिक क्षेत्र को स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाएगी सरकार
कठुआ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2015 07:31 PM IST
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कठुआ से जम्मू तक का क्षेत्र इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के तौर पर विकसित किया जाएगा। कठुआ के घाटी क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा औद्योगिक क्षेत्र स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) के तौर पर तैयार किया जाएगा। इस पर सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। कठुआ दौरे पर आए उद्योग मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा ने ये बातें कहीं।
चंद्रप्रकाश गंगा ने कहा कि औद्योगिक निवेश ही विकास और रोजगार सृजन का सबसे बड़ा विकल्प है। राज्य सरकार ने विकास का बीड़ा उठाया है, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र विकास को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि गुड़गांव जैसे इलाकों में एसईजेड विकसित किए गए हैं।
इसी तर्ज पर कठुआ के घाटी औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। इसके लिए राज्य के डिप्टी सीएम और बिजली मंत्री से बातचीत हो चुकी है। प्रदूषण की चुनौती पर उद्योग मंत्री ने कहा कि घाटी औद्योगिक क्षेत्र में लाल श्रेणी की कोई भी औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं होने दी जाएगी।
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इसके अलावा औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने से पूर्व ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीएटीपी) को स्थापित किया जाएगा। सीएटीपी के माध्यम से औद्योगिक कचरे का पानी न सिर्फ साफ किया जाएगा, बल्कि उसे पीने लायक भी बनाया जा सकेगा। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी सीएटीपी स्थापित करने के लिए बाकायदा हिदायतें जारी कर दी गई हैं।
उन्हाेंने कहा कि औद्योगिक विकास से पूर्व इंसानी जीवन को सुरक्षित रखना जरूरी है। राज्य सरकार इस तथ्य को बखूबी समझती है। घाटी औद्योगिक क्षेत्र को भूमि देने वालों के लिए उन्होंने कहा कि भूमि देने वाले यदि औद्योगिक इकाई लगाना चाहते हैं तो सरकार उन्हें प्राथमिकता देगी।
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चंद्रप्रकाश गंगा ने कहा कि औद्योगिक निवेश ही विकास और रोजगार सृजन का सबसे बड़ा विकल्प है। राज्य सरकार ने विकास का बीड़ा उठाया है, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र विकास को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि गुड़गांव जैसे इलाकों में एसईजेड विकसित किए गए हैं।
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इसी तर्ज पर कठुआ के घाटी औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। इसके लिए राज्य के डिप्टी सीएम और बिजली मंत्री से बातचीत हो चुकी है। प्रदूषण की चुनौती पर उद्योग मंत्री ने कहा कि घाटी औद्योगिक क्षेत्र में लाल श्रेणी की कोई भी औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं होने दी जाएगी।
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इसके अलावा औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने से पूर्व ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीएटीपी) को स्थापित किया जाएगा। सीएटीपी के माध्यम से औद्योगिक कचरे का पानी न सिर्फ साफ किया जाएगा, बल्कि उसे पीने लायक भी बनाया जा सकेगा। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी सीएटीपी स्थापित करने के लिए बाकायदा हिदायतें जारी कर दी गई हैं।
उन्हाेंने कहा कि औद्योगिक विकास से पूर्व इंसानी जीवन को सुरक्षित रखना जरूरी है। राज्य सरकार इस तथ्य को बखूबी समझती है। घाटी औद्योगिक क्षेत्र को भूमि देने वालों के लिए उन्होंने कहा कि भूमि देने वाले यदि औद्योगिक इकाई लगाना चाहते हैं तो सरकार उन्हें प्राथमिकता देगी।