{"_id":"61aa769dbbc403580e1dfe9a","slug":"farmers-protested-against-the-evacuation-of-government-land-kathua-news-jmu249129331","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी भूमि खाली कराए जाने का किसानों ने किया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी भूमि खाली कराए जाने का किसानों ने किया विरोध
विज्ञापन
भूमि खाली करवाए जाने के खिलाफ नगरी तहसील कार्यालय के समक्ष नारेबाजी करते किसान। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। किसानों की ओर से काश्त की जा रही भूमि को खाली करवाए जाने के लिए किए जा रही सरकारी कार्रवाई का अब जिला भर में विरोध होने लगा है। शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने नगर तहसील कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करते हुए किसानों को बेरोजगार करने वाले फैसले का वापस लिए जाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों में शामिल जितेंद्र सिंह पप्पू ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय को दो गुना करने के सपने दिखा रही है। वहीं जम्मू कश्मीर के किसानों को भूमिहीन बनाने का क्रम जारी है। इस तरह के फैसले से ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में वर्ष 1971 के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले किसानों को खाली पड़ी सरकारी भूमि पर खेती करने का हक दिया गया। वहीं किसानों को रोशनी एक्ट के तहत मालिकाना हक भी दिया गया है। लेकिन न्यायालय के एक आदेश के बाद अब किसानों के सभी दस्तावेज कोरे कागज हो गए हैं। किसानों से अगर जमीन ले ली गई तो इससे पूरे जम्मू कश्मीर में एक नई समस्या जन्म लेगी। जिसका समाधान सरकार के पास नही होगा।
वहीं प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस किसान मोर्चा के तरसेम पाल सैनी ने किसानों से जमीन वापस लेने के फैसले को सरकार का तानाशाही रवैया बताते हुए कहा कि पूरे जम्मू कश्मीर के किसानों को बर्बाद करने वाले इस फैसले के खिलाफ अब किसान हर संगठन और दल को पीछे छोड़कर एक मंच पर आ गए है। अब इसके खिलाफ किसान अंतिम सांस तक संघर्ष की रणनीति बनाकर संघर्ष शुरू करने की तैयारी कर रहे। अगर सरकार ऐसी स्थिति से बचना चाहती है तो उसे इस फैसले का वापस लेने की पहल शुरू करनी चाहिए। अन्यथा इसके परिणाम अच्छे नही होंगे।
विज्ञापन
किसान नेता महेंद्र सिंह का कहना था कि सरकार पहले से ही किसानों के हक में नही रही है। अब तो किसानों के खिलाफ तानाशाही का रवैया अपनाया जा रहा है। जिसके खिलाफ किसान सड़क पर आने को तैयार है अगर आने वाले एक दो दिनों में फैसले को वापस नही लिया गया तो संघर्ष तेज किया जाएगा। क्योंकि पहले से कर्ज के तले दबे किसान के पास इसके अतिरिक्त और कोई रास्ता नही बचा है।
इस मौके पर प्यार सिंह, बाबूराम, साहब सिंह, नसीब चंद, रशपाल सिंह सैनी, जगदेव सिंह, सुभाष चंद्र, किशन दास, खुशी राम, रुमाल चंद, मनोहर लाल आदि किसान रहे।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों में शामिल जितेंद्र सिंह पप्पू ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय को दो गुना करने के सपने दिखा रही है। वहीं जम्मू कश्मीर के किसानों को भूमिहीन बनाने का क्रम जारी है। इस तरह के फैसले से ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में वर्ष 1971 के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले किसानों को खाली पड़ी सरकारी भूमि पर खेती करने का हक दिया गया। वहीं किसानों को रोशनी एक्ट के तहत मालिकाना हक भी दिया गया है। लेकिन न्यायालय के एक आदेश के बाद अब किसानों के सभी दस्तावेज कोरे कागज हो गए हैं। किसानों से अगर जमीन ले ली गई तो इससे पूरे जम्मू कश्मीर में एक नई समस्या जन्म लेगी। जिसका समाधान सरकार के पास नही होगा।
विज्ञापन
वहीं प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस किसान मोर्चा के तरसेम पाल सैनी ने किसानों से जमीन वापस लेने के फैसले को सरकार का तानाशाही रवैया बताते हुए कहा कि पूरे जम्मू कश्मीर के किसानों को बर्बाद करने वाले इस फैसले के खिलाफ अब किसान हर संगठन और दल को पीछे छोड़कर एक मंच पर आ गए है। अब इसके खिलाफ किसान अंतिम सांस तक संघर्ष की रणनीति बनाकर संघर्ष शुरू करने की तैयारी कर रहे। अगर सरकार ऐसी स्थिति से बचना चाहती है तो उसे इस फैसले का वापस लेने की पहल शुरू करनी चाहिए। अन्यथा इसके परिणाम अच्छे नही होंगे।
विज्ञापन
किसान नेता महेंद्र सिंह का कहना था कि सरकार पहले से ही किसानों के हक में नही रही है। अब तो किसानों के खिलाफ तानाशाही का रवैया अपनाया जा रहा है। जिसके खिलाफ किसान सड़क पर आने को तैयार है अगर आने वाले एक दो दिनों में फैसले को वापस नही लिया गया तो संघर्ष तेज किया जाएगा। क्योंकि पहले से कर्ज के तले दबे किसान के पास इसके अतिरिक्त और कोई रास्ता नही बचा है।
इस मौके पर प्यार सिंह, बाबूराम, साहब सिंह, नसीब चंद, रशपाल सिंह सैनी, जगदेव सिंह, सुभाष चंद्र, किशन दास, खुशी राम, रुमाल चंद, मनोहर लाल आदि किसान रहे।