फरवरी 2021 से पहले तैयार होगा उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क, होंगी ये सुविधाएं
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जम्मू संभाग में कठुआ के घाटी फेज तीन में बन रहा उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क फरवरी, 2021 से पहले तैयार कर लिया जाएगा। 10.50 एकड़ जमीन पर स्थापित किए जा रहे इस पार्क का काम हालांकि सितंबर, 2020 में पूरा होना था लेकिन कोरोना के चलते इसमें विलंब हुआ है। अब इसे अगले वर्ष की शुरूआत तक हर हाल में पूरा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बायोटेक पार्क से जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधताओं, औषधीय और ऐरामैटिक पौधों पर अनुसंधान होगा, वहीं यह ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा। पार्क जम्मू संभाग के कंडी इलाकों से लेकर भद्रवाह, बनी, बसोहली और किश्तवाड़ आदि के मौसम के अनुकूल औषधीय पौधों की पैदावार बढ़ाकर किसानों को पारंपरिक खेती से अलग बेहतर आय के साधन भी उपलब्ध कराएगा। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए आईआईआईएम, जम्मू की ओर से पहले ही काम शुरू किया जा चुका है।
उत्तर भारत के इस पहले बायोटेक पार्क से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलावा हिमाचल, पंजाब सहित अन्य राज्यों के लिए भी यह बायोटेक पार्क बड़ा सहायक बनने जा रहा है। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की परियोजना में व्यक्तिगत रुचि के बाद 10 फरवरी, 2019 को इसका काम शुरू किया गया था। इसमें सिविल काम अंतिम चरण में पहुंच गए हैं।
पार्क तैयार होने के बाद यहां वैज्ञानिक भी अनुसंधान कर सकेंगे। स्थानीय किसान, पढ़े-लिखे युवा जो नया उद्योग लगाना चाहते हैं या ऐसे उद्यमी जो अपनी उत्पादों को दुनिया के सामने रखना चाहते हैं, इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। लैब स्केल पर क्वालिटी, स्टैंडर्डाइजेशन में भी यह बायोटेक पार्क मदद करेगा। औषधीय या ऐरोमैटिक पौधों के उत्पादन को भी बढ़ावा देगा, जिससे बड़े पैमाने पर खाली पड़ी बंजर जमीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बेहतर उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।
भद्रवाह में लैवेंडर की खेती के बाद कठुआ के पहाड़ी इलाकों में भी क्रांति लाएगा बायोटेक पार्क
अनुकूल मौसम के बीच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सदियों से पनप रही जड़ी-बूटियों को देश-दुनिया के बाजार में लाने का वक्त आ गया है। बायोटेक पार्क से जहां इन दिनों भद्रवाह में लैवेंडर की खेती का सफल ट्रायल हुआ है, वहीं वो दिन दूर नहीं जब कठुआ के मल्हार, बसोहली और बनी, डुग्गन में भी किसानों की आय बढ़ाकर यह एक बड़ी क्रांति लाने वाला है।
आईआईआईएम, जम्मू की ओर से पार्क में नियुक्त ओएसडी डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि लैवेंडर आयल पहले कश्मीर में ही पैदा होता था। आईआईआईएम के हस्तक्षेप के बाद इसे भद्रवाह में लगाया गया। किसान जहां मक्की से दो हजार रुपये कमाते थे, अब उतनी ही मेहनत कर पंद्रह हजार तक कमा रहे हैं। बनी-बसोहली के इलाकों में वहां के मौसम और तापमान के अनुरूप किसान वहां भी औषधीय और खूशबुदार पौधों की पैदावार कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
बायोटेक पार्क में होंगी ये सुविधाएं
- एक्सट्रैक्शन-जिसमें पॉयलट स्केल पौधों से एक्सट्रैक्शन की जाएगी
- कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा
- सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन किया जाएगा
- एनालिटिकल लैब सुविधा
- ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल
- बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम
- कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी
यह उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क जम्मू-कश्मीर में अनुसंधान, रोजगार और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण गेम चेंजर बनने जा रहा है। इससे विशेष रूप से पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी मेहनत को पंख लगेंगे। - डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री