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Kathua News: उद्योगों के लिए जमीन आवंटन के खिलाफ सत्ता पक्ष व विपक्ष मुखर

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Every Political Party oppose on Land Distribution For New Industrial Area
ग्रामीणों को आश्वासन देते उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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कठुआ। कंडी क्षेत्र बरवाल में औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन के खिलाफ न केवल विपक्ष बल्कि सता पक्ष भी मुखर दिखा। जसरोटा के विधायक राजीव जसरोटिया और अन्य विपक्षी नेताओं ने इलाके में लगाई जा रही औद्योगिक इकाइयों को अनुचित ठहराया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से पर्यावरण और स्थानीय लोगों को बचाने की मांग की।
जसरोटिया ने कहा कि सिडको अब तक जिलाभर में 9255 कनाल भूमि का अधिग्रहण कर चुका है। बरवाल स्थित 735 कनाल भूमि को छोड़ भी दिया जाए तो, अभी भी सिडको के पास 1900 कनाल भूमि आवंटन के लिए बची है। स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद सिडको उद्योग स्थापित करने के लिए जबरदस्ती कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त और सीएलयू मामलों में प्रॉपर्टी डीलरों और प्रशासन की मिलीभगत है। आम लोगों को सीएलयू करवाने में सालों लग जाते है जबकि बड़े प्रॉपर्टी डीलरों के लिए कोई कानून नहीं है। जिला प्रशासन एक बार में उनकी 100 से 200 कनाल भूमि की सीएलयू कर रहा है। वॉटर बॉडीज का कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है। भागथली में दरिया के किनारे कैसे उद्योगों को स्थापित किया जा रहा है। यह उनकी समझ के बाहर है।
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पूर्व सांसद लाल सिंह ने कहा कि उद्योगों के नाम पर पूरे कठुआ को ही तबाह कर दिया है। शहर के चोरों ओर रेड और येलो कैटेगरी के उद्योगों को लगाया जा रहा है। बाहर के उद्योगपति सिर्फ इनसेंटिव के लिए जम्मू-कश्मीर आ रहे हैं। अब तक 85 हजार करोड़ के इनसेंटिव युवाओं को रोजगार देने के नाम पर ले चुके हैं। राज्य न होने से अफसरों में सरकार का डर खत्म हो चुका है। पूर्व मंत्री बाबू सिंह ने कहा कि कठुआ जम्मू-कश्मीर का प्रवेश द्वार है। औद्योगिक इकाइयां लगाने के नाम पर कंडी इलाके की हरियाली को तबाह किया जा रहा है। नेकां नेता आशु देवी ने कहा कि सरकार एक पेड़ मां के नाम लगवा रही है, लेकिन औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए किसके नाम के पेड़ काटे जा रहे हैं। बसपा नेता और डीडीसी सदस्य संदीप मजोत्रा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र से पर्यावरण को नुकसान होगा। इससे सात गांवों की 30 हजार आबादी प्रभावित होगी।
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