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नहाय-खाए के साथ छठ पर्व की हुई शुरूआत
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कठुआ। सूर्य उपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। भैया दूज के तीसरे दिन से शुरू होकर यह पर्व चार दिन तक चलता है। पर्व को लेकर कठुआ नहर के किनारे पर जहां घाट बनने शुरू हो गए हैं, वहीं औद्योगिक क्षेत्र के बाजार में सामान, दउरा, सूप के साथ अन्य पूजन सामग्री की दुकानें भी सज गई हैं। छठ पूजा तेजस्वी पुत्रों की प्राप्ति उनकी दीर्घायु, सुख, आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए की जाती है।
हर साल धूमधाम और धार्मिक आस्था के साथ मनाए जाने वाले छठ पर्व को लेकर आयोजन स्थल को सजाया गया है। बुधवार को एक ओर जहां कठुआ नहर के किनारे पूजा स्थल को सजाने का काम चलता रहा, वहीं घरों में महिलाओं ने नहाय खाए की प्रक्रिया को पूरा किया। इसके अंतर्गत कद्दू भात और चने की दाल की सब्जी हर घर में विशेष तौर पर बनी।
वीरवार को छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होगा, जिसके बाद शुक्रवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। रात भर बनाई गई देहरियों के किनारे पूजन और संकीर्तन होगा, जिसके बाद शनिवार को उदीयमान सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही छठ लोकपर्व संपन्न होगा।
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उल्लेखनीय है कि, औद्योगिक इकाइयों और अन्य संस्थानों में रोजगार के अवसरों की तलाश में बीते दशक में देशभर से सैकड़ों लोग कठुआ में आ बसे हैं। ज्यादातर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई वाले इलाकों के नागरिकों में अधिक प्रचलित इस त्योहार की परंपराओं के निर्वाह के साथ ही उन प्रदेशों की संस्कृति ने जिले पर भी अपनी छाप बनाई है। छठ पूजन पर सूर्य उपासना के लिए तैयारियों में जुटी महिला श्रद्धालु इंदु देवी, सविता, पूनम आदि ने बताया कि छठ पूजा का विशेष महत्व है। भैया दूज के बाद शुरू होने वाले इस त्यौहार को लेकर उनके क्षेत्र के लोग परंपरा का निर्वाह करते हुए सूर्यदेव की उपासना करते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्य को अर्ध्य देकर पूजन किया जाता है। महिलाओं ने बताया कि हिंदू मान्यताओं में सूर्य देव और छठि मइया का संबंध भाई-बहन का है। ऐसे में सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व है।
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हर साल धूमधाम और धार्मिक आस्था के साथ मनाए जाने वाले छठ पर्व को लेकर आयोजन स्थल को सजाया गया है। बुधवार को एक ओर जहां कठुआ नहर के किनारे पूजा स्थल को सजाने का काम चलता रहा, वहीं घरों में महिलाओं ने नहाय खाए की प्रक्रिया को पूरा किया। इसके अंतर्गत कद्दू भात और चने की दाल की सब्जी हर घर में विशेष तौर पर बनी।
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वीरवार को छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होगा, जिसके बाद शुक्रवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। रात भर बनाई गई देहरियों के किनारे पूजन और संकीर्तन होगा, जिसके बाद शनिवार को उदीयमान सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही छठ लोकपर्व संपन्न होगा।
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उल्लेखनीय है कि, औद्योगिक इकाइयों और अन्य संस्थानों में रोजगार के अवसरों की तलाश में बीते दशक में देशभर से सैकड़ों लोग कठुआ में आ बसे हैं। ज्यादातर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई वाले इलाकों के नागरिकों में अधिक प्रचलित इस त्योहार की परंपराओं के निर्वाह के साथ ही उन प्रदेशों की संस्कृति ने जिले पर भी अपनी छाप बनाई है। छठ पूजन पर सूर्य उपासना के लिए तैयारियों में जुटी महिला श्रद्धालु इंदु देवी, सविता, पूनम आदि ने बताया कि छठ पूजा का विशेष महत्व है। भैया दूज के बाद शुरू होने वाले इस त्यौहार को लेकर उनके क्षेत्र के लोग परंपरा का निर्वाह करते हुए सूर्यदेव की उपासना करते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्य को अर्ध्य देकर पूजन किया जाता है। महिलाओं ने बताया कि हिंदू मान्यताओं में सूर्य देव और छठि मइया का संबंध भाई-बहन का है। ऐसे में सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व है।