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तीन हिस्सों में क्षेत्र बांटा, आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए
Updated Sun, 15 Apr 2018 01:36 AM IST
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कठुआ। गर्मी का पीक सीजन शुरू हो गया है। इस मौसम में कटाई भी होती है और थ्रेसिंग का काम भी किसान करते हैं। इसके साथ ही अन्य कारणों से आगजनी की घटनाएं इस सीजन में बढ़ जाती हैं। शहर और आसपास के क्षेत्र में गर्मी में आग की घटनाओं को रोकने के लिए दमकल विभाग ने जिले को तीन हिस्सों में बांटा है।
पिछले 10 साल में आग की घटनाओं का आंकड़ा देखने और बार-बार एक ही स्थान पर आग की घटनाओं को देखते हुए विभाग में कार्य करने और किस स्थान पर कौन सा वाहन भेजना है, इसके लिए क्षेत्रों को तीन हिस्सों में बांट दिया गया है। दमकल विभाग रेड ओरेंज और ग्रीन जोन के क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से आग बुझाने का काम करेगा किसी घटना के लिए कौन सा वाहन भेजना है यह भी क्षेत्र के हिसाब से ही तय किया जाएगा। कठुआ डिवीजन के पास तीन बड़े फायर टेंडर और एक छोटी गाड़ी है, जिसके बल पर विभाग आग बुझाने का प्रयास करता है। ऐसे में विभाग में क्षेत्रों के चयन के लिए आगे बुझाने के साथ-साथ गाड़ी के पहुंच पाने को ध्यान में रखा है
कालीबड़ी से बरनोटी तक का इलाका रेड जोन में
कालीबड़ी से बरनोटी तक का क्षेत्र, उसके साथ ही काली बड़ी से हटली के क्षेत्रों को रेड जोन में शामिल किया गया है। ओरेंज जोन में बनोटी से राजघाट तक के क्षेत्र इस जोन में रखा गया है। ग्रीन जोन में शहर के निचले इलाके और नगरी क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है।
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कहां, कौन सा वाहन
रेड जोन में आग लगने पर बड़ा फायर टेंडर भेजा जाएगा। ओरेंज जोन के लिए भी बड़ा फायर टेंडर रहेगा, अगर नहीं जा पाया तो छोटी गाड़ी की व्यवस्था की जाएगी। ग्रीन जोन के लिए छोटा वाहन रहेगा। आवश्यकता पर पास का फायर टेंडर रहेगा। एक बड़ा फायर टेंडर गर्मी के मौसम में बरनोटी के पास रहता है, ताकि आगे के क्षेत्र को कवर किया जा सके।
स्टाफ और वाहनों की कमी
कठुआ और हीरानगर सब डिवीजन में ही फायर स्टेशन हैं, लेकिन स्टाफ और वाहनों की कमी होने के कारण हाल बेहाल ही है। कठुआ सब डिवीजन में जिला मुख्यालय पर ही स्टाफ की कमी विभाग के लिए परेशानी का सबब है। तीन फायर टेंडर के साथ साथ एक छोटा वाहन और एक पंप सेट तो विभाग के पास हैं, लेकिन स्टाफ केवल बारह है। ऐसे में हर फायर टेंडर के साथ छह लोगों की टीम भी पूरी नहीं हो पाती। एक साथ अगर कहीं दो फायर टेंडर आग बुझाने के लिए चले गए तो पीछे कोई नहीं बचता। पूरे हीरानगर सब डिवीजन की बात करें तो अंतराष्ट्रीय सीमा से लेकर डिंगा अंब जो बिलावर के साथ लगता है तक का क्षेत्र है एक फायर टेंडर के सहारे है।
सब डिवीजन फायर टेंडर छोटे वाहन स्टाफ की संख्या पंप सेट
कठुआ 3 1 12 1
--बयान--
विभाग ने तैयारी की है, गर्मी का मौसम पीक सीजन होता है। सबसे अधिक आगजनी की घटनाएं, इसी सीजन में होती है। पूरे साल की पूरी घटनाओं में 60 प्रतिशत घटनाएं इस सीजन में होती है। ऐसे में विभाग सतर्क है। उपलब्ध संसाधनों के साथ ही काम चलाना है। विभाग की तैयारी पक्की है, लोगों का सहयोग जरूरी है।
-आरएल शर्मा, स्टेशन मास्टर
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पिछले 10 साल में आग की घटनाओं का आंकड़ा देखने और बार-बार एक ही स्थान पर आग की घटनाओं को देखते हुए विभाग में कार्य करने और किस स्थान पर कौन सा वाहन भेजना है, इसके लिए क्षेत्रों को तीन हिस्सों में बांट दिया गया है। दमकल विभाग रेड ओरेंज और ग्रीन जोन के क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से आग बुझाने का काम करेगा किसी घटना के लिए कौन सा वाहन भेजना है यह भी क्षेत्र के हिसाब से ही तय किया जाएगा। कठुआ डिवीजन के पास तीन बड़े फायर टेंडर और एक छोटी गाड़ी है, जिसके बल पर विभाग आग बुझाने का प्रयास करता है। ऐसे में विभाग में क्षेत्रों के चयन के लिए आगे बुझाने के साथ-साथ गाड़ी के पहुंच पाने को ध्यान में रखा है
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कालीबड़ी से बरनोटी तक का इलाका रेड जोन में
कालीबड़ी से बरनोटी तक का क्षेत्र, उसके साथ ही काली बड़ी से हटली के क्षेत्रों को रेड जोन में शामिल किया गया है। ओरेंज जोन में बनोटी से राजघाट तक के क्षेत्र इस जोन में रखा गया है। ग्रीन जोन में शहर के निचले इलाके और नगरी क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है।
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कहां, कौन सा वाहन
रेड जोन में आग लगने पर बड़ा फायर टेंडर भेजा जाएगा। ओरेंज जोन के लिए भी बड़ा फायर टेंडर रहेगा, अगर नहीं जा पाया तो छोटी गाड़ी की व्यवस्था की जाएगी। ग्रीन जोन के लिए छोटा वाहन रहेगा। आवश्यकता पर पास का फायर टेंडर रहेगा। एक बड़ा फायर टेंडर गर्मी के मौसम में बरनोटी के पास रहता है, ताकि आगे के क्षेत्र को कवर किया जा सके।
स्टाफ और वाहनों की कमी
कठुआ और हीरानगर सब डिवीजन में ही फायर स्टेशन हैं, लेकिन स्टाफ और वाहनों की कमी होने के कारण हाल बेहाल ही है। कठुआ सब डिवीजन में जिला मुख्यालय पर ही स्टाफ की कमी विभाग के लिए परेशानी का सबब है। तीन फायर टेंडर के साथ साथ एक छोटा वाहन और एक पंप सेट तो विभाग के पास हैं, लेकिन स्टाफ केवल बारह है। ऐसे में हर फायर टेंडर के साथ छह लोगों की टीम भी पूरी नहीं हो पाती। एक साथ अगर कहीं दो फायर टेंडर आग बुझाने के लिए चले गए तो पीछे कोई नहीं बचता। पूरे हीरानगर सब डिवीजन की बात करें तो अंतराष्ट्रीय सीमा से लेकर डिंगा अंब जो बिलावर के साथ लगता है तक का क्षेत्र है एक फायर टेंडर के सहारे है।
सब डिवीजन फायर टेंडर छोटे वाहन स्टाफ की संख्या पंप सेट
कठुआ 3 1 12 1
--बयान--
विभाग ने तैयारी की है, गर्मी का मौसम पीक सीजन होता है। सबसे अधिक आगजनी की घटनाएं, इसी सीजन में होती है। पूरे साल की पूरी घटनाओं में 60 प्रतिशत घटनाएं इस सीजन में होती है। ऐसे में विभाग सतर्क है। उपलब्ध संसाधनों के साथ ही काम चलाना है। विभाग की तैयारी पक्की है, लोगों का सहयोग जरूरी है।
-आरएल शर्मा, स्टेशन मास्टर