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धारा 144 पर उठाए सवाल

Wed, 21 Feb 2018 12:36 AM IST
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:36 AM IST
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धारा 144 पर उठाए सवाल
हीरानगर। हीरानगर के रसाना में आठ वर्षीय बच्ची की अपहरण के बाद हत्या मामले में माहौल खराब होने का हवाला देकर लागू धारा-144 पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि लोगों की आवाज दबाने का प्रयास है तो कुछ का कहना है सरकार लोगों से बात करे अपनी पावर न दिखाए।
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हिंदू एकता मंच के सदस्य कांत कुमार ने कहा कि बच्ची की हत्या मामले में शांतिपूर्ण तरीके से लोग मामला सीबीआई को सौंपने की मांग कर रहे थे। सरकार को यह बात रास नहीं आई और उसने अपनी पावर का प्रयोग किया है। इस कार्रवाई से साबित हो गया है कि सरकार इस मामले को बिगाड़ना चाहती है। पहले से ही हमें संदेह था कि मामले की जांच किसी दबाव में हो रही है, लेकिन अब यह सब सचा साबित हो रहा है। सरकार सीबीआई जंाच से कतरा क्यों रही है।
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विजय टगोत्रा ने कहा कि मामले की जांच को लेकर मंच द्वारा पीस मार्च निकाला गया। यह आंदोलन जब पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है तो यहां 144 लगाने की नौबत क्यों आई। इससे जाहिर होता है, आंदोलनकारियों पर सरकारी धौंस जमाई जा रही है और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार लोगों की आवाज को दबाने की बजाए यह स्पष्ट करे कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराने में उसे क्या परेशानी है।
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कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुभाष गुप्ता ने कहा कि सरकार लोगों की मांग को समझने का प्रयास करे। मामले की जांच सीबीआई से कराने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इस मामले में गठबंधन सरकार की हिस्सेदार भाजपा नेताओं की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। मुख्यमंत्री ने लोगाें द्वारा निकाली गई पीस मार्च को गलत ठहराया। अफसोस की बात यह है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक कौल ने भी इस मार्च से पार्टी का कोई लेना देना नहीं की बात कह दी। लोगों द्वारा चुने नुमाइंदों ने भूमिका ठीक से निभाई होती तो आज लोगों को सड़कों पर न उतरना पड़ता।
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