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Kathua News: कोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत दी
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कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी है।
आदेश के अनुसार आरोपी को जमानत के लिए एक लाख के व्यक्तिगत बांड सहित समान राशि का निजी मुचलका जिला जेल अधीक्षक को पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपलब्ध होने के साथ-साथ अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करना होगा। इस अलावा आरोपी बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा। अगर आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।
पुलिस की ओर दायर रिपोर्ट के अनुसार मामले में आरोपी गौरव कुमार पुत्र शाम लाल निवासी सूबे चक को हीरानगर पुलिस ने 12.79 ग्राम हेरोइन जैसे प्रतिबंधित पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था। मामला गत पांच फरवरी का है। गश्त लगा रही पुलिस टीम ने आरोपी को जांडी से हीरानगर बाजार की तरफ आ रहे रास्ते से गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। उक्त मामले में आरोपी के वकील ने गत सात फरवरी को जमानत का आवेदन दिया था। इसकी सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कहा कि पुलिस ने उसके मुव्वकिल को झूठे मामले में फंसाया है। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध किया गया। कहा कि आरोपी एनडीपीएस अधिनियम के तहत गंभीर, जघन्य और गैर-जमानती अपराध में शामिल है क्योंकि उसके पास से 12.79 ग्राम हेरोइन बरामद की गई है, जो एक मध्यवर्ती मात्रा है।
इसके लिए उसे 10 साल की कैद हो सकती है। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी पिछले लगभग एक महीने से न्यायिक हिरासत में है। आरोपी से कथित रूप से बरामद किया गया प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा मध्यवर्ती श्रेणी में आती है। लिहाजा वर्तमान मामले एनडीपीएस की धारा 37 की कठोरता लागू नहीं होती है। आरोपी के वकील ने कहा कि जमानत नियम है और इसे अस्वीकार करना अपवाद होगा। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को सशर्त जमानत सुनाई।
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आदेश के अनुसार आरोपी को जमानत के लिए एक लाख के व्यक्तिगत बांड सहित समान राशि का निजी मुचलका जिला जेल अधीक्षक को पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपलब्ध होने के साथ-साथ अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करना होगा। इस अलावा आरोपी बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा। अगर आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।
पुलिस की ओर दायर रिपोर्ट के अनुसार मामले में आरोपी गौरव कुमार पुत्र शाम लाल निवासी सूबे चक को हीरानगर पुलिस ने 12.79 ग्राम हेरोइन जैसे प्रतिबंधित पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था। मामला गत पांच फरवरी का है। गश्त लगा रही पुलिस टीम ने आरोपी को जांडी से हीरानगर बाजार की तरफ आ रहे रास्ते से गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। उक्त मामले में आरोपी के वकील ने गत सात फरवरी को जमानत का आवेदन दिया था। इसकी सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कहा कि पुलिस ने उसके मुव्वकिल को झूठे मामले में फंसाया है। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध किया गया। कहा कि आरोपी एनडीपीएस अधिनियम के तहत गंभीर, जघन्य और गैर-जमानती अपराध में शामिल है क्योंकि उसके पास से 12.79 ग्राम हेरोइन बरामद की गई है, जो एक मध्यवर्ती मात्रा है।
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इसके लिए उसे 10 साल की कैद हो सकती है। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी पिछले लगभग एक महीने से न्यायिक हिरासत में है। आरोपी से कथित रूप से बरामद किया गया प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा मध्यवर्ती श्रेणी में आती है। लिहाजा वर्तमान मामले एनडीपीएस की धारा 37 की कठोरता लागू नहीं होती है। आरोपी के वकील ने कहा कि जमानत नियम है और इसे अस्वीकार करना अपवाद होगा। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को सशर्त जमानत सुनाई।
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