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बैंक धोखाधड़ी मामला: कठुआ में CBI ने निजी कंपनी के दो निदेशकों को गिरफ्तार किया
Wed, 09 Nov 2022 03:26 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 09 Nov 2022 03:26 PM IST
सार
कठुआ में सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी मामले में निजी कंपनी के दो तत्कालीन निदेशकों को गिरफ्तार किया है। मामले में लुधियाना में 12 फरवरी 2020 को एसबीआई ने शिकायत दर्ज कराई थी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जम्मू संभाग के जिला कठुआ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक धोखाधड़ी मामले में निजी कंपनी के दो तत्कालीन निदेशकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार दोनों आरोपी अनिल कुमार और प्रवीण कुमार को आज सीजेएम, जम्मू की अदालत में पेश किया गया।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में 12 फरवरी 2020 को एसबीआई की एसएएम ब्रांच (लुधियाना) ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें निजी कंपनी और उसके एमडी, निदेशक सहित अन्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बैंक का आरोप है कि आरोपियों ने 2006 से 2019 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची और बैंक से करीब 87.88 करोड़ रुपये की ठगी की है।
इसमें यह भी आरोप है कि ऋणदाता बैंकों को सूचित किए बिना अवैध रूप से मशीनरी और अन्य भागों को हटाया गया। मशीनों, मोटरों आदि की आय को जमा नहीं किया गया। बैंक की जानकारी के बिना पल्प सेक्शन की आयातित और स्वदेशी मशीनरी व अन्य भागों को चोरी-छिपे फैक्ट्री से हटा दिया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने अवैध रूप से मशीनरी के पुर्जे कबाड़ के रूप में बेचे और उक्त अवैध बिक्री को कवर करने के लिए नकली चालान जमा कराए। एजेंसी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने कथित तौर पर ऋण खाते से धन को डायवर्ट किया था। मामले में फिलहाल पड़ताल जारी है।
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जानकारी के अनुसार, इस मामले में 12 फरवरी 2020 को एसबीआई की एसएएम ब्रांच (लुधियाना) ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें निजी कंपनी और उसके एमडी, निदेशक सहित अन्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बैंक का आरोप है कि आरोपियों ने 2006 से 2019 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची और बैंक से करीब 87.88 करोड़ रुपये की ठगी की है।
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इसमें यह भी आरोप है कि ऋणदाता बैंकों को सूचित किए बिना अवैध रूप से मशीनरी और अन्य भागों को हटाया गया। मशीनों, मोटरों आदि की आय को जमा नहीं किया गया। बैंक की जानकारी के बिना पल्प सेक्शन की आयातित और स्वदेशी मशीनरी व अन्य भागों को चोरी-छिपे फैक्ट्री से हटा दिया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने अवैध रूप से मशीनरी के पुर्जे कबाड़ के रूप में बेचे और उक्त अवैध बिक्री को कवर करने के लिए नकली चालान जमा कराए। एजेंसी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने कथित तौर पर ऋण खाते से धन को डायवर्ट किया था। मामले में फिलहाल पड़ताल जारी है।
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