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Kathua News: 1.70 किलो पोस्त बरामदगी मामले में तीन आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी
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कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने वर्ष 2017 के एक एनडीपीएस मामले में तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अदालत ने अपने फैसले में विशेष रूप से नमूनों की सुरक्षित कस्टडी साबित न होना, एफएसएल को नमूने 72 घंटे के भीतर न भेजना, स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करना, सीलिंग रिंग को अदालत में पेश न करना, सीएफएसएल फार्म-29 तैयार न करना तथा एनडीपीएस अधिनियम और 57 के अनुपालन में कमियां दर्ज कीं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। इसमें आरोपी अशोक कुमार निवासी कीड़ियां, मुकेश कुमार और देविंदर कुमार दोनों निवासी बरनोटी को पुलिस ने 13 जून 2017 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपी अशोक कुमार से 500 ग्राम, मुकेश कुमार से 600 ग्राम और देविंदर कुमार से 600 ग्राम पोस्त बरामद हुई थी। इस तरह कुल बरामदगी 1.70 किलो बताई गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 9 गवाहों को गवाही करवाई लेकिन कोर्ट ने गवाहों के बयान में विरोधाभास पाए। अदालत ने पाया कि बरामद मादक पदार्थ के नमूनों की सुरक्षित कस्टडी और उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना को पूरी तरह समाप्त करने वाली चेन ऑफ कस्टडी अभियोजन साबित नहीं कर सका।
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अदालत ने विशेष रूप से उस सीलिंग रिंग का उल्लेख किया जिसे कथित तौर पर हेड कांस्टेबल चूनी लाल के सुपुर्द किया गया था। अदालत के अनुसार उक्त रिंग को मुकदमे के दौरान अदालत में पेश नहीं किया गया। साथ ही सील की सुरक्षित कस्टडी के संबंध में भी पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आया। इसके अलावा कोर्ट ने 72 घंटे के भीतर नमूने एफएसएल को नहीं भेजे जाने पर सवाल उठाए और कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी सार्वजनिक स्थल पर हुई थी लेकिन पुलिस ने एक भी स्वतंत्र नागरिक को गवाह नहीं बनाया। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।
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अदालत ने अपने फैसले में विशेष रूप से नमूनों की सुरक्षित कस्टडी साबित न होना, एफएसएल को नमूने 72 घंटे के भीतर न भेजना, स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करना, सीलिंग रिंग को अदालत में पेश न करना, सीएफएसएल फार्म-29 तैयार न करना तथा एनडीपीएस अधिनियम और 57 के अनुपालन में कमियां दर्ज कीं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
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मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत में की गई। इसमें आरोपी अशोक कुमार निवासी कीड़ियां, मुकेश कुमार और देविंदर कुमार दोनों निवासी बरनोटी को पुलिस ने 13 जून 2017 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपी अशोक कुमार से 500 ग्राम, मुकेश कुमार से 600 ग्राम और देविंदर कुमार से 600 ग्राम पोस्त बरामद हुई थी। इस तरह कुल बरामदगी 1.70 किलो बताई गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 9 गवाहों को गवाही करवाई लेकिन कोर्ट ने गवाहों के बयान में विरोधाभास पाए। अदालत ने पाया कि बरामद मादक पदार्थ के नमूनों की सुरक्षित कस्टडी और उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना को पूरी तरह समाप्त करने वाली चेन ऑफ कस्टडी अभियोजन साबित नहीं कर सका।
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अदालत ने विशेष रूप से उस सीलिंग रिंग का उल्लेख किया जिसे कथित तौर पर हेड कांस्टेबल चूनी लाल के सुपुर्द किया गया था। अदालत के अनुसार उक्त रिंग को मुकदमे के दौरान अदालत में पेश नहीं किया गया। साथ ही सील की सुरक्षित कस्टडी के संबंध में भी पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आया। इसके अलावा कोर्ट ने 72 घंटे के भीतर नमूने एफएसएल को नहीं भेजे जाने पर सवाल उठाए और कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी सार्वजनिक स्थल पर हुई थी लेकिन पुलिस ने एक भी स्वतंत्र नागरिक को गवाह नहीं बनाया। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।