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Kathua News: पुल बना दिया, सड़क बनाना भूला लोक निर्माण विभाग
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रामकोट। मकवाल के वार्ड नौ में लोक निर्माण विभाग हीरानगर की ओर से पुल तो बना दिया लेकिन उस तक पहुंचने के लिए सड़क बनाना विभाग भूल गया। लोक निर्माण विभाग हीरानगर की इस घोर लापरवाही का खमियाजा मकवाल के वार्ड नंबर 9 के साथ नजदीकी पांच पंचायतों के हजारों ग्रामीण भुगत रहे हैं। मकवाल के प्रिया नाला पर पुल बने हुए लगभग 3 वर्ष होने को हैं लेकिन पुल के दोनों तरफ सड़क आज तक नहीं बनी है। नतीजा, धन्नी, गुरगाड़ा, पलंग और चिरकाबन जैसे गांवों की 2000 से अधिक आबादी आजादी के 77 साल बाद भी सड़क के लिए तरस रही है। ये गांव धार मुख्य सड़क और तहसील मुख्यालय रामकोट से महज 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर हैं लेकिन पक्की सड़क न होने से यहां तक एक भी गाड़ी नहीं पहुंच पाती। बीमार बुजुर्गों को चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है, छात्र-छात्राएं कीचड़ भरी पगडंडियों से स्कूल जाते हैं और महिलाएं रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से सीमेंट, सरिया तक सिर पर ढोना पड़ता है। बरसात में तो प्रिया नाला के आसपास का इलाका टापू बन जाता है और आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। यह सड़क सिर्फ इन 4 गांवों की ही नहीं, बल्कि पंचायत अमुआला, सुंडला, कच्छेड़ और भवे पंचायतों के 10 हजार से अधिक लोगों की लाइफलाइन बन सकती है। अगर यह सड़क बन जाए तो इन पंचायत के लोगों का सीधा कनेक्शन धार-रामकोट मुख्य सड़क से हो जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन कठुआ और लोक निर्माण विभाग से चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से सीमेंट, सरिया तक सिर पर ढोना पड़ता है। बरसात में तो प्रिया नाला के आसपास का इलाका टापू बन जाता है और आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। यह सड़क सिर्फ इन 4 गांवों की ही नहीं, बल्कि पंचायत अमुआला, सुंडला, कच्छेड़ और भवे पंचायतों के 10 हजार से अधिक लोगों की लाइफलाइन बन सकती है। अगर यह सड़क बन जाए तो इन पंचायत के लोगों का सीधा कनेक्शन धार-रामकोट मुख्य सड़क से हो जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन कठुआ और लोक निर्माण विभाग से चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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