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Kathua News: पवेलियन में भूसा, मैदान पर मवेशी
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नगरी के नवनिर्मित स्टेडियम में बैठे मवेशी। संवाद
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-आधा अधूरा नवनिर्मित स्टेडियम खेल परिषद को सौंपा, समतल मैदान भी खिलाड़ियों को उपलब्ध नहीं
-एक करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण, पवेलियन पर अवैध कब्जाधारियों ने भर रखा भूसा
गोल्डी शर्मा
कठुआ। नगरी खेल स्टेडियम को आधिकारिक रूप से स्पोर्ट्स काउंसिल ने अपने हाथ में ले लिया है। एक करोड़ की लागत से बने इस स्टेडियम में खेल के नाम पर सिर्फ एक पवेलियन और बाउंड्री वॉल ही बनाई गई है। हालात यह हैं कि पलेवियन में कब्जाधारियों ने भूसा भर कर रखा है जबकि मैदान में मवेशियों का डेरा है।
इस अव्यवस्था को लेकर काउंसिल अधिकारियों के पास कोई भी जवाब नहीं है। अधिकारी का कहना है कि स्टेडियम में अवैध कब्जे को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है। सूत्रों की मानें तो स्टेडियम का पवेलियन और बाउंड्री वॉल का निर्माण वर्ष 2023 में पूरा हुआ था। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के मुताबिक तो नवनिर्मित खेल स्टेडियम में क्रिकेट पिच, वॉलीवाल और बास्केटबाल मैदान के अलावा इसके चारों तरफ खिलाड़ियों के दौड़ने के लिए ट्रैक भी बनाया जाना था।
इनका निर्माण न होने से नवनिर्मित स्टेडियम सिर्फ एक शोपीस बन कर रहा गया है। अगर संबंधित ठेकेदार ने खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं का निर्माण ही नहीं किया तो उसे काउंसिल ने अपने हाथ में कैसे ले लिया, यह अपने आप में सवाल है। स्थानीय लोगों की मानें तो स्पोर्ट्स काउंसिल ने इसका निर्माण शुरू होने से पहले अतिरिक्त 10 लाख की लागत से एक बॉक्सिंग रिंग बनाने का भी आश्वासन दिया था।
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बॉक्सिंग रिंग बनाना तो दूर, काउंसिल ने मैदान को समतल भी नहीं किया। अब मैदान आवारा मवेशियों के लिए चरागाह बन कर रह गया है। खेल सुविधा के नाम पर खिलाड़ियों के लिए नवनिर्मित मैदान में कुछ भी उपलब्ध नहीं है। मैदान में खेलना तो दूर कोई सैर करना भी मुनासिब नहीं है। चारों तरफ सिर्फ पशु ही घूमते नजर आते हैं जिसका जवाब काउंसिल के पास नहीं है।
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कोट..
मेरे कार्यकाल में ही खेल स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। क्योंकि इलाके में खेलने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। हर साल होने वाली क्रिकेट प्रतियोगिता पहले राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के मैदान में होती थी। वहां पर भी स्कूल बन गया। इस बार नगरी में कोई बेहतर मैदान न होने के कारण प्रतियोगिता नहीं करवाई गई। ठेकेदार से बिना निर्माण कार्य पूरा करवाए काउंसिल ने स्टेडियम कैसे अपने हाथ में ले लिया, यह सोचने की बात है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-अनिल सिंह अंडोत्रा, पूर्व प्रधान नगरी कमेटी।
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कोट...
जितना काम ठेकेदार को सौंपा गया उसने पूरा कर दिया है। इसी आधार पर नवनिर्मित स्टेडियम का हस्तांतरण लिया गया है। रही बात स्टेडियम पर कुछ लोगों की अवैध कब्जे की तो इसको लेकर उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है। जब तक वहां पर काउंसिल की ओर से किसी स्थाई अधिकारी की नियुक्ति नहीं होती है, स्टेडियम की देखभाल करना असंभव है।
....जोगिंद्र शर्मा, खेल प्रबंधक, खेल स्टेडियम कठुआ।
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-एक करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण, पवेलियन पर अवैध कब्जाधारियों ने भर रखा भूसा
गोल्डी शर्मा
कठुआ। नगरी खेल स्टेडियम को आधिकारिक रूप से स्पोर्ट्स काउंसिल ने अपने हाथ में ले लिया है। एक करोड़ की लागत से बने इस स्टेडियम में खेल के नाम पर सिर्फ एक पवेलियन और बाउंड्री वॉल ही बनाई गई है। हालात यह हैं कि पलेवियन में कब्जाधारियों ने भूसा भर कर रखा है जबकि मैदान में मवेशियों का डेरा है।
इस अव्यवस्था को लेकर काउंसिल अधिकारियों के पास कोई भी जवाब नहीं है। अधिकारी का कहना है कि स्टेडियम में अवैध कब्जे को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है। सूत्रों की मानें तो स्टेडियम का पवेलियन और बाउंड्री वॉल का निर्माण वर्ष 2023 में पूरा हुआ था। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के मुताबिक तो नवनिर्मित खेल स्टेडियम में क्रिकेट पिच, वॉलीवाल और बास्केटबाल मैदान के अलावा इसके चारों तरफ खिलाड़ियों के दौड़ने के लिए ट्रैक भी बनाया जाना था।
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इनका निर्माण न होने से नवनिर्मित स्टेडियम सिर्फ एक शोपीस बन कर रहा गया है। अगर संबंधित ठेकेदार ने खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं का निर्माण ही नहीं किया तो उसे काउंसिल ने अपने हाथ में कैसे ले लिया, यह अपने आप में सवाल है। स्थानीय लोगों की मानें तो स्पोर्ट्स काउंसिल ने इसका निर्माण शुरू होने से पहले अतिरिक्त 10 लाख की लागत से एक बॉक्सिंग रिंग बनाने का भी आश्वासन दिया था।
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बॉक्सिंग रिंग बनाना तो दूर, काउंसिल ने मैदान को समतल भी नहीं किया। अब मैदान आवारा मवेशियों के लिए चरागाह बन कर रह गया है। खेल सुविधा के नाम पर खिलाड़ियों के लिए नवनिर्मित मैदान में कुछ भी उपलब्ध नहीं है। मैदान में खेलना तो दूर कोई सैर करना भी मुनासिब नहीं है। चारों तरफ सिर्फ पशु ही घूमते नजर आते हैं जिसका जवाब काउंसिल के पास नहीं है।
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कोट..
मेरे कार्यकाल में ही खेल स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। क्योंकि इलाके में खेलने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। हर साल होने वाली क्रिकेट प्रतियोगिता पहले राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के मैदान में होती थी। वहां पर भी स्कूल बन गया। इस बार नगरी में कोई बेहतर मैदान न होने के कारण प्रतियोगिता नहीं करवाई गई। ठेकेदार से बिना निर्माण कार्य पूरा करवाए काउंसिल ने स्टेडियम कैसे अपने हाथ में ले लिया, यह सोचने की बात है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-अनिल सिंह अंडोत्रा, पूर्व प्रधान नगरी कमेटी।
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कोट...
जितना काम ठेकेदार को सौंपा गया उसने पूरा कर दिया है। इसी आधार पर नवनिर्मित स्टेडियम का हस्तांतरण लिया गया है। रही बात स्टेडियम पर कुछ लोगों की अवैध कब्जे की तो इसको लेकर उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है। जब तक वहां पर काउंसिल की ओर से किसी स्थाई अधिकारी की नियुक्ति नहीं होती है, स्टेडियम की देखभाल करना असंभव है।
....जोगिंद्र शर्मा, खेल प्रबंधक, खेल स्टेडियम कठुआ।