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Kathua News: अब जिले में कला और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
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कठुआ। जिले में कला, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अब बेहतर मंच मिलेगा। इसके लिए संस्कृति विभाग की ओर से शहर के नगरी बस अड्डा के पास स्थित कला संस्कृति की नई इमारत का निर्माण जोरशोर से जारी है। चार करोड़ 15 लाख रुपये की राशि से होने वाले निर्माण में परिसर में एक ऑडिटोरियम और पुस्तकालय का निर्माण होना है।
दरअसल 90 के दशक में आतंकवाद बढ़ने के दौरान कठुआ में कला संस्कृति की इमारत को सीआरपीएफ को सौंप दिया गया था। लगभग 20 साल तक सीआरपीएफ का मुख्यालय रही इस इमारत को स्थानीय रंगमंच व अन्य कला और साहित्य संस्थाओं की गुहार के बाद 2017 में खाली करवा लिया गया लेकिन तब तक यह काफी जर्जर हो चुकी थी। इस इमारत में इक्का-दुक्का मुशायरे जैसे कार्यक्रमों से अधिक नहीं हो पाए और इमारत खंडहर बनती जा रही थी।
नई इमारत के निर्माण होने से कला, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों के शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। कला संस्कृति की इस इमारत में इस बार कला प्रेमियों के लिए जहां रंगमंच तैयार होगा, वहीं पुस्तकालय में साहित्य को भी संजोया जाएगा। 150 दर्शकों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम से कला में रुचि रखने वालों को एक बेहतर मंच मिल पाएगा। इसकी कठुआ में अब तक कमी महसूस की जाती रही है। उधर, साहित्य से धरोहर को संजोए जाने से कला प्रेमियों को यहीं से प्रेरणा भी हासिल हाे सकेगी। हालांकि इमारत के निर्माण गति को जहां कुछ कलाकार तेज करने की मांग कर रहे हैं, वहीं निर्माण कार्य का हवाला देकर ठप पड़ी गतिविधियों को जिले में कला, साहित्य और संस्कृति की राह में रोड़ा बता रहे हैं।
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भाषा, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई इमारत का तीन दशकों में प्रयोग नहीं हो पाया है। हालांकि जम्मू कश्मीर भाषा कला व संस्कृति विभाग की ओर से सब सेंटर का निर्माण किया गया था। अभी भी इस दिशा में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है। इससे कला के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को मंच नहीं मिल पा रहा है।
-तिलक राज सुम्बडिया, वरिष्ठ कवि कठुआ
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भाषा, कला और संस्कृति की गतिविधियों के ठप रहने से सबसे ज्यादा युवा प्रतिभाएं प्रभावित हो रही हैं क्योंकि उनके पास कोई मंच नहीं है और न ही संबंधित विभाग इस दिशा में कोई पहल कर रहा है। हालांकि कुछ साल पहले जब इमारत सीआरपीएफ के पास थी तो गतिविधियों का संचालन स्कूल कॉलेजों में किया जाता था।
-विजय शर्मा, वरिष्ठ कवि कठुआ
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कला संस्कृति की इस इमारत में इस बार कला प्रेमियों के लिए जहां रंगमंच तैयार होगा, वहीं पुस्तकालय में साहित्य को भी संजोया जाएगा। 150 दर्शकों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम से कला में रुचि रखने वालों को एक बेहतर मंच मिल पाएगा। निर्माण पूरी गति के साथ चल रहा है और इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। -संजीव गुप्ता, विशेष अधिकारी सांस्कृतिक गतिविधि, जम्मू कश्मीर आर्ट कल्चर एंड लैंग्वेज अकादमी
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दरअसल 90 के दशक में आतंकवाद बढ़ने के दौरान कठुआ में कला संस्कृति की इमारत को सीआरपीएफ को सौंप दिया गया था। लगभग 20 साल तक सीआरपीएफ का मुख्यालय रही इस इमारत को स्थानीय रंगमंच व अन्य कला और साहित्य संस्थाओं की गुहार के बाद 2017 में खाली करवा लिया गया लेकिन तब तक यह काफी जर्जर हो चुकी थी। इस इमारत में इक्का-दुक्का मुशायरे जैसे कार्यक्रमों से अधिक नहीं हो पाए और इमारत खंडहर बनती जा रही थी।
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नई इमारत के निर्माण होने से कला, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों के शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। कला संस्कृति की इस इमारत में इस बार कला प्रेमियों के लिए जहां रंगमंच तैयार होगा, वहीं पुस्तकालय में साहित्य को भी संजोया जाएगा। 150 दर्शकों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम से कला में रुचि रखने वालों को एक बेहतर मंच मिल पाएगा। इसकी कठुआ में अब तक कमी महसूस की जाती रही है। उधर, साहित्य से धरोहर को संजोए जाने से कला प्रेमियों को यहीं से प्रेरणा भी हासिल हाे सकेगी। हालांकि इमारत के निर्माण गति को जहां कुछ कलाकार तेज करने की मांग कर रहे हैं, वहीं निर्माण कार्य का हवाला देकर ठप पड़ी गतिविधियों को जिले में कला, साहित्य और संस्कृति की राह में रोड़ा बता रहे हैं।
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भाषा, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई इमारत का तीन दशकों में प्रयोग नहीं हो पाया है। हालांकि जम्मू कश्मीर भाषा कला व संस्कृति विभाग की ओर से सब सेंटर का निर्माण किया गया था। अभी भी इस दिशा में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है। इससे कला के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को मंच नहीं मिल पा रहा है।
-तिलक राज सुम्बडिया, वरिष्ठ कवि कठुआ
भाषा, कला और संस्कृति की गतिविधियों के ठप रहने से सबसे ज्यादा युवा प्रतिभाएं प्रभावित हो रही हैं क्योंकि उनके पास कोई मंच नहीं है और न ही संबंधित विभाग इस दिशा में कोई पहल कर रहा है। हालांकि कुछ साल पहले जब इमारत सीआरपीएफ के पास थी तो गतिविधियों का संचालन स्कूल कॉलेजों में किया जाता था।
-विजय शर्मा, वरिष्ठ कवि कठुआ
कला संस्कृति की इस इमारत में इस बार कला प्रेमियों के लिए जहां रंगमंच तैयार होगा, वहीं पुस्तकालय में साहित्य को भी संजोया जाएगा। 150 दर्शकों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम से कला में रुचि रखने वालों को एक बेहतर मंच मिल पाएगा। निर्माण पूरी गति के साथ चल रहा है और इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। -संजीव गुप्ता, विशेष अधिकारी सांस्कृतिक गतिविधि, जम्मू कश्मीर आर्ट कल्चर एंड लैंग्वेज अकादमी