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Kathua News: राम की चरणपादुका ले अयोध्या चले भरत, रावण ने किया सीता हरण
Sun, 06 Apr 2025 12:42 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 06 Apr 2025 12:42 AM IST
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श्री राम जटायु संवाद मंचन करते कलाकार। स्रोत : आयोजक
- फोटो : kathua
चैत्र नवरात्र पर जिले के पहाड़ी क्षेत्र धार-महानपुर में चल रही रामलीला का मंचन जारी
कठुआ। चैत्र नवरात्र पर जिले के पहाड़ी क्षेत्र धार-महानपुर में चल रही रामलीला का मंचन जारी है। शुक्रवार रात को राम-भरत मिलाप, लक्ष्मण-शूर्पणखा संवाद, खर-दूषण वध, सीता हरण और राम-जटायु संवाद का मंचन किया गया।
पहले दृश्य में राम-भरत मिलाप मंचन किया गया। भरत ने प्रभु श्री राम बताया कि भैया हमारे परम तेजस्वी धर्मपरायण पिता स्वर्ग सिधार गए हैं। मेरी माता ने जो पाप किया है, उसके कारण मुझ पर भारी कलंक लगा है और मैं किसी को अपना मुख नहीं दिखा सकता। अब मैं आपकी शरण में आया हूं। आप अयोध्या का राज्य संभालकर मेरा उद्धार कीजिए। मैं आपका छोटा भाई हूं, पुत्र के समान हूं। अत: माता द्वारा मुझ पर लगाए गए कलंक को धोकर मेरी रक्षा करें। इतना कहकर भरत रोते हुए राम के चरणों पर गिर गए और बार-बार अयोध्या लौटने के लिए विनय करने लगे।
इस प्रभु श्री राम कहते हैं कि हे भरत पिताजी ने अयोध्या का राज्य तुम्हें प्रदान किया है और मुझे 14 वर्ष के लिए वनवास की आज्ञा दी है। जिस प्रकार मैं उनके वचनों पर श्रद्धा रखकर उनकी आज्ञा का पालन कर रहा हूं, उसी प्रकार तुम भी उनकी आज्ञा को मानकर अयोध्या पर शासन करो। उनके वचनों की यदि हम अवहेलना करेंगे तो उनकी आत्मा को दुख पहुंचेगा। तुम्हें राजकार्य में समुचित सहायता देने के लिये शत्रुघ्न तुम्हारे साथ है। पिताजी को अपनी प्रतिज्ञा के ऋण से मुक्ति दिलाना हम चारों भाइयों का कर्तव्य है।
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इस पर भरत कहते हैं कि आप अपनी चरण पादुकाएं मुझे प्रदान करें। मैं इन्हें अयोध्या के राजसिंहासन पर प्रतिष्ठित करूंगा और स्वयं ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते नगर के बाहर रहकर सेवक के रूप में राजकाज चलाउंगा। 14 वर्ष पूर्ण होते ही यदि आप अयोध्या नहीं पहुंचे तो मैं स्वयं को अग्नि में भस्म कर दूंगा। यही मेरी प्रतिज्ञा है।
दूसरे दृश्य में लंकापति रावण की बहन शूपर्णखा-लक्षमण संवाद का मंचन किया गया। इसके बाद खर-दूषण वध और फिर शूपर्णखा-रावण संवाद दर्शाया गया। रावण-मारीच संवाद के बाद सीता हरण मंचन और फिर राम-जटायु संवाद दर्शाया गया।
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कठुआ। चैत्र नवरात्र पर जिले के पहाड़ी क्षेत्र धार-महानपुर में चल रही रामलीला का मंचन जारी है। शुक्रवार रात को राम-भरत मिलाप, लक्ष्मण-शूर्पणखा संवाद, खर-दूषण वध, सीता हरण और राम-जटायु संवाद का मंचन किया गया।
पहले दृश्य में राम-भरत मिलाप मंचन किया गया। भरत ने प्रभु श्री राम बताया कि भैया हमारे परम तेजस्वी धर्मपरायण पिता स्वर्ग सिधार गए हैं। मेरी माता ने जो पाप किया है, उसके कारण मुझ पर भारी कलंक लगा है और मैं किसी को अपना मुख नहीं दिखा सकता। अब मैं आपकी शरण में आया हूं। आप अयोध्या का राज्य संभालकर मेरा उद्धार कीजिए। मैं आपका छोटा भाई हूं, पुत्र के समान हूं। अत: माता द्वारा मुझ पर लगाए गए कलंक को धोकर मेरी रक्षा करें। इतना कहकर भरत रोते हुए राम के चरणों पर गिर गए और बार-बार अयोध्या लौटने के लिए विनय करने लगे।
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इस प्रभु श्री राम कहते हैं कि हे भरत पिताजी ने अयोध्या का राज्य तुम्हें प्रदान किया है और मुझे 14 वर्ष के लिए वनवास की आज्ञा दी है। जिस प्रकार मैं उनके वचनों पर श्रद्धा रखकर उनकी आज्ञा का पालन कर रहा हूं, उसी प्रकार तुम भी उनकी आज्ञा को मानकर अयोध्या पर शासन करो। उनके वचनों की यदि हम अवहेलना करेंगे तो उनकी आत्मा को दुख पहुंचेगा। तुम्हें राजकार्य में समुचित सहायता देने के लिये शत्रुघ्न तुम्हारे साथ है। पिताजी को अपनी प्रतिज्ञा के ऋण से मुक्ति दिलाना हम चारों भाइयों का कर्तव्य है।
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इस पर भरत कहते हैं कि आप अपनी चरण पादुकाएं मुझे प्रदान करें। मैं इन्हें अयोध्या के राजसिंहासन पर प्रतिष्ठित करूंगा और स्वयं ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते नगर के बाहर रहकर सेवक के रूप में राजकाज चलाउंगा। 14 वर्ष पूर्ण होते ही यदि आप अयोध्या नहीं पहुंचे तो मैं स्वयं को अग्नि में भस्म कर दूंगा। यही मेरी प्रतिज्ञा है।
दूसरे दृश्य में लंकापति रावण की बहन शूपर्णखा-लक्षमण संवाद का मंचन किया गया। इसके बाद खर-दूषण वध और फिर शूपर्णखा-रावण संवाद दर्शाया गया। रावण-मारीच संवाद के बाद सीता हरण मंचन और फिर राम-जटायु संवाद दर्शाया गया।