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श्रीमद्भागवत तो दिव्य कल्पतरु है : राम स्वरूप
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर से सटे गांव लोगेट में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। दूसरे दिन कथाव्यास राम स्वरूप महाराज ने शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप का वृतांत श्रद्धालुओं को सुनाया। काफी संख्या में भक्तजन कथा का श्रवण करने पहुंचे हुए थे।
कथाव्यास ने बताया कि भागवत के चार अक्षर का तात्पर्य भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग है। उन्होंने भक्तों को बताया कि श्रीमद्भागवत तो दिव्य कल्पतरु है। यह अर्थ, धर्म व काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल पुस्तक नहीं साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप है। इसके एक-एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाए हुए हैं। लिहाजा कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मों से बढ़कर है।
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कठुआ। शहर से सटे गांव लोगेट में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। दूसरे दिन कथाव्यास राम स्वरूप महाराज ने शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप का वृतांत श्रद्धालुओं को सुनाया। काफी संख्या में भक्तजन कथा का श्रवण करने पहुंचे हुए थे।
कथाव्यास ने बताया कि भागवत के चार अक्षर का तात्पर्य भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग है। उन्होंने भक्तों को बताया कि श्रीमद्भागवत तो दिव्य कल्पतरु है। यह अर्थ, धर्म व काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल पुस्तक नहीं साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप है। इसके एक-एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाए हुए हैं। लिहाजा कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मों से बढ़कर है।
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