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Kathua News: जरूरत 80 लाख की 50 लाख से पूरा होगा पीएचसी बरवाल का काम
Sat, 11 Jan 2025 09:53 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 11 Jan 2025 09:53 PM IST
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नाबार्ड से फंडिंग बंद होने से अधर में निर्माण कार्य
1.87 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होनी थी अस्पताल की इमारत, अब तक खर्च हो चुके 1.19 करोड़
कठुआ। नाबार्ड फंडिंग के तहत बरवाल गांव में बन रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पिछले कई वर्षों से फंड की उपलब्धता न होने के चलते अधर में है। इसको पूरा करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश बजट से 50 लाख की राशि निर्धारित की है। मगर कार्यकारी एजेंसी लोक निर्माण विभाग इस अधूरे पड़े निर्माण कार्य को पूरा करवाने के लिए कम से कम 80 लाख राशि की मांग कर रहा है।
प्रदेश में वर्ष 2015 में पहली बार भाजपा-पीडीपी सरकार बने के साथ ही गांव बरवाल में तीन पंचायतों सहित आधा दर्जन आसपास के गांवों को स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर एक मंजिला अस्पताल का नींवपत्थर रखा गया था। इसके लिए नाबार्ड ने 1 करोड़ 87 लाख 82 हजार की राशि निर्धारित की गई थी। नाबार्ड से मिलने वाली फंडिंग की शर्तों के मुताबिक अस्पताल इमारत का निर्माणकार्य चार साल के भीतर खत्म करना था। मगर समय पर भूमि चयन न होने और कोरोना काल के चलते यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। इसके चलते नाबार्ड की फंडिंग बंद हो गई और अस्पताल का निर्माण कार्य अधर में है।
निर्माण कार्य बंद होने तक स्थानीय ठेकेदार ने एक मंजिला अस्पताल इमारत पर नाबार्ड की 90 लाख 79 हजार की राशि खर्च कर चुका था। इसके बाद स्थानीय ठेकेदार ने कीमतों में बढ़ोतरी के चलते इमारत का निर्माण कार्य रोक दिया। इसके बाद इसका निर्माण कार्य का जिम्मा दूसरे ठेकेदार को सौंपा। इसके लिए प्रदेश बजट से 28 लाख 40 हजार की अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवाई और निर्माण कार्य को फिर से बहाल किया। मौजूदा समय में कार्यकारी एजेंसी निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए बढ़ी हुई कीमतों के साथ कम से कम 80 लाख राशि की मांग कर रहा है। मगर संबंधित विभाग सिर्फ 50 लाख की राशि ही उपलब्ध करवाने की वकालत कर रहा है।
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इन कारणों से पूरा नहीं हो सका निर्माण कार्य
पहले भूमि चयन करने में देरी और उसके बाद कोरोना काल में बंद हुई परियोजनाओं के चलते अस्पताल का निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर नहीं हो सका। इसके चलते नाबार्ड से फंडिंग आना बंद हो गई। बाद में निर्माणकार्य सामग्री की बढ़ी कीमतों के चलते स्थानीय ठेकेदार ने काम से किनारा कर लिया और निर्माण कार्य अधर में है।
पिछले आठ साल से निर्माण कार्य सामग्री की कीमतों में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इस निर्माण कार्य को पूरा करवाने के लिए एक करोड़ राशि की जरूरत पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग को एक मंजिला अस्पताल को पूरा करने के लिए कम से कम 80 लाख की राशि तो उपलब्ध करवानी होगी। 50 लाख में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर ही पूरा होगा। जितनी जल्दी फंड उपलब्ध होगा उतनी ही जल्दी निर्माण कार्य को भी पूरा करवाया जाएगा।
- कुलदीप शर्मा, जेई, लोक निर्माण विभाग कठुआ
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1.87 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होनी थी अस्पताल की इमारत, अब तक खर्च हो चुके 1.19 करोड़
कठुआ। नाबार्ड फंडिंग के तहत बरवाल गांव में बन रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पिछले कई वर्षों से फंड की उपलब्धता न होने के चलते अधर में है। इसको पूरा करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश बजट से 50 लाख की राशि निर्धारित की है। मगर कार्यकारी एजेंसी लोक निर्माण विभाग इस अधूरे पड़े निर्माण कार्य को पूरा करवाने के लिए कम से कम 80 लाख राशि की मांग कर रहा है।
प्रदेश में वर्ष 2015 में पहली बार भाजपा-पीडीपी सरकार बने के साथ ही गांव बरवाल में तीन पंचायतों सहित आधा दर्जन आसपास के गांवों को स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर एक मंजिला अस्पताल का नींवपत्थर रखा गया था। इसके लिए नाबार्ड ने 1 करोड़ 87 लाख 82 हजार की राशि निर्धारित की गई थी। नाबार्ड से मिलने वाली फंडिंग की शर्तों के मुताबिक अस्पताल इमारत का निर्माणकार्य चार साल के भीतर खत्म करना था। मगर समय पर भूमि चयन न होने और कोरोना काल के चलते यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। इसके चलते नाबार्ड की फंडिंग बंद हो गई और अस्पताल का निर्माण कार्य अधर में है।
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निर्माण कार्य बंद होने तक स्थानीय ठेकेदार ने एक मंजिला अस्पताल इमारत पर नाबार्ड की 90 लाख 79 हजार की राशि खर्च कर चुका था। इसके बाद स्थानीय ठेकेदार ने कीमतों में बढ़ोतरी के चलते इमारत का निर्माण कार्य रोक दिया। इसके बाद इसका निर्माण कार्य का जिम्मा दूसरे ठेकेदार को सौंपा। इसके लिए प्रदेश बजट से 28 लाख 40 हजार की अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवाई और निर्माण कार्य को फिर से बहाल किया। मौजूदा समय में कार्यकारी एजेंसी निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए बढ़ी हुई कीमतों के साथ कम से कम 80 लाख राशि की मांग कर रहा है। मगर संबंधित विभाग सिर्फ 50 लाख की राशि ही उपलब्ध करवाने की वकालत कर रहा है।
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इन कारणों से पूरा नहीं हो सका निर्माण कार्य
पहले भूमि चयन करने में देरी और उसके बाद कोरोना काल में बंद हुई परियोजनाओं के चलते अस्पताल का निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर नहीं हो सका। इसके चलते नाबार्ड से फंडिंग आना बंद हो गई। बाद में निर्माणकार्य सामग्री की बढ़ी कीमतों के चलते स्थानीय ठेकेदार ने काम से किनारा कर लिया और निर्माण कार्य अधर में है।
पिछले आठ साल से निर्माण कार्य सामग्री की कीमतों में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इस निर्माण कार्य को पूरा करवाने के लिए एक करोड़ राशि की जरूरत पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग को एक मंजिला अस्पताल को पूरा करने के लिए कम से कम 80 लाख की राशि तो उपलब्ध करवानी होगी। 50 लाख में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर ही पूरा होगा। जितनी जल्दी फंड उपलब्ध होगा उतनी ही जल्दी निर्माण कार्य को भी पूरा करवाया जाएगा।
- कुलदीप शर्मा, जेई, लोक निर्माण विभाग कठुआ

-फोटो 58 : कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यातिथि डॉ. राजेश कुमार व साथ मौजूद प्राचार्य। स्रोत कॉ