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Kathua News: नशीली दवाओं से रहें दूर, विद्यार्थियों को किया जागरूक
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। युवाओं को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूक करने के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से राजकीय डिग्री कॉलेज में एनएसएस इकाई और साहित्यिक क्लब के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इसमें सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ के एसोसिएट प्रो. डॉ. मीर अनायत, नागरिक सुरक्षा बारामुला के मुख्य वार्डन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रो. रियाज भट्ट वक्ता रहे। वहीं, कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. यशपाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अपने संबोधन में कॉलेज प्रधानाचार्य प्रो. सीमा मीर ने मादक द्रव्यों के सेवन के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम बताए। कहा कि नशीली दवाओं की लत से न केवल व्यक्ति विशेष, बल्कि उसका पूरा परिवार और समाज प्रभावित होता है। वैज्ञानिक शोध पर प्रकाश डालते हुए प्रो. मीर ने बताया कि प्रारंभिक हस्तक्षेप, मजबूत पारिवारिक समर्थन और सामुदायिक जुड़ाव से ही इसकी रोकथाम की जा सकती है।
प्रो. भट्ट ने बताया कि कैसे ड्रग्स मस्तिष्क के रसायन विज्ञान को बदल देते हैं। जिससे निर्भरता, आत्म-नियंत्रण की कमी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होती हैं। उन्होंने एलोपैथी दवाओं की तुलना में होम्योपैथी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने कहा कि नशा छोड़ने के लिए चिकित्सा, ध्यान, परामर्श और सामुदायिक सहायता की आवश्यकता होती है। उन्होंने छात्रों को स्वास्थ्य जीवन शैली चुनने पर जोर दिया।
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कठुआ। युवाओं को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूक करने के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से राजकीय डिग्री कॉलेज में एनएसएस इकाई और साहित्यिक क्लब के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इसमें सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ के एसोसिएट प्रो. डॉ. मीर अनायत, नागरिक सुरक्षा बारामुला के मुख्य वार्डन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रो. रियाज भट्ट वक्ता रहे। वहीं, कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. यशपाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अपने संबोधन में कॉलेज प्रधानाचार्य प्रो. सीमा मीर ने मादक द्रव्यों के सेवन के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम बताए। कहा कि नशीली दवाओं की लत से न केवल व्यक्ति विशेष, बल्कि उसका पूरा परिवार और समाज प्रभावित होता है। वैज्ञानिक शोध पर प्रकाश डालते हुए प्रो. मीर ने बताया कि प्रारंभिक हस्तक्षेप, मजबूत पारिवारिक समर्थन और सामुदायिक जुड़ाव से ही इसकी रोकथाम की जा सकती है।
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प्रो. भट्ट ने बताया कि कैसे ड्रग्स मस्तिष्क के रसायन विज्ञान को बदल देते हैं। जिससे निर्भरता, आत्म-नियंत्रण की कमी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होती हैं। उन्होंने एलोपैथी दवाओं की तुलना में होम्योपैथी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने कहा कि नशा छोड़ने के लिए चिकित्सा, ध्यान, परामर्श और सामुदायिक सहायता की आवश्यकता होती है। उन्होंने छात्रों को स्वास्थ्य जीवन शैली चुनने पर जोर दिया।
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