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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन
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कठुआ। गोविंदसर पंचायत के लोगों ने क्षेत्र में बिना अनुमति के लगाई जा रही सीमेंट फैक्टरी पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग की तरफ से कार्रवाई न करने के विरोध में विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी रिहायशी इलाके में लगी फैक्टरी को अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि गोविंदसर गांव के पास कई वर्षों से सीमेंट फैक्टरी बनाने की कोशिश की जा रही है। रेड कटेगरी के अंतर्गत आने वाली इस फैक्टरी के बनने से क्षेत्र में प्रदूषण फैलने से आसपास के लोगों को परेशानी होगी। बताया कि 2016 में भी इस फैक्टरी को बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन लोगों के विरोध के बाद काम बंद करा दिया गया था। 2017 में दोबारा काम शुरू होने पर लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर फैक्टरी का निर्माण कार्य बंद कराया था। उस समय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने उन्हें क्षेत्र में फैक्टरी न बनने देने का आश्वासन दिया था। इस संबंध प्रदूषण विभाग द्वारा एनओसी जारी नहीं की गई थी, लेकिन फैक्टरी के मालिक ने दिल्ली में पर्यावरण विभाग से क्लीयरेंस लेकर फैक्टरी का निर्माण कर लिया है, जबकि क्लीयरेंस सर्टिफिकेट में लिखा गया है कि निर्माण कार्य से पूर्व राज्य के प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी लेनी होगी, लेकिन फैक्टरी का निर्माण बिना अनुमति के कर लिया गया है और अब फैक्टरी मालिक प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लोगों ने जिला प्रदूषण विभाग को सूचित किया था, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में क्षेत्र के लगभग 10 हजार लोगों को भविष्य में प्रदूषण की मार झेलनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगने पर अधिकारी उन्हें श्रीनगर में विभाग के चेयरमैन से संपर्क करने को कहते हैं। विभाग की अनदेखी के बारे में उन लोगों ने उपायुक्त को भी शिकायत की थी। उपायुक्त ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मामले का संज्ञान लेने को कहा था, लेकिन विभाग के अधिकारी कोई भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रहे। प्रदर्शनकारियों ने विभाग को एक हफ्ते का समय देते हुए कहा कि जल्द फैक्टरी को शिफ्ट करने के लिए कार्रवाई करें। ऐसा न होने पर लोगों को फिर से धरने प्रदर्शन का मार्ग अपनाना पड़ेगा।
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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि गोविंदसर गांव के पास कई वर्षों से सीमेंट फैक्टरी बनाने की कोशिश की जा रही है। रेड कटेगरी के अंतर्गत आने वाली इस फैक्टरी के बनने से क्षेत्र में प्रदूषण फैलने से आसपास के लोगों को परेशानी होगी। बताया कि 2016 में भी इस फैक्टरी को बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन लोगों के विरोध के बाद काम बंद करा दिया गया था। 2017 में दोबारा काम शुरू होने पर लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर फैक्टरी का निर्माण कार्य बंद कराया था। उस समय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने उन्हें क्षेत्र में फैक्टरी न बनने देने का आश्वासन दिया था। इस संबंध प्रदूषण विभाग द्वारा एनओसी जारी नहीं की गई थी, लेकिन फैक्टरी के मालिक ने दिल्ली में पर्यावरण विभाग से क्लीयरेंस लेकर फैक्टरी का निर्माण कर लिया है, जबकि क्लीयरेंस सर्टिफिकेट में लिखा गया है कि निर्माण कार्य से पूर्व राज्य के प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी लेनी होगी, लेकिन फैक्टरी का निर्माण बिना अनुमति के कर लिया गया है और अब फैक्टरी मालिक प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लोगों ने जिला प्रदूषण विभाग को सूचित किया था, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में क्षेत्र के लगभग 10 हजार लोगों को भविष्य में प्रदूषण की मार झेलनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगने पर अधिकारी उन्हें श्रीनगर में विभाग के चेयरमैन से संपर्क करने को कहते हैं। विभाग की अनदेखी के बारे में उन लोगों ने उपायुक्त को भी शिकायत की थी। उपायुक्त ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मामले का संज्ञान लेने को कहा था, लेकिन विभाग के अधिकारी कोई भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रहे। प्रदर्शनकारियों ने विभाग को एक हफ्ते का समय देते हुए कहा कि जल्द फैक्टरी को शिफ्ट करने के लिए कार्रवाई करें। ऐसा न होने पर लोगों को फिर से धरने प्रदर्शन का मार्ग अपनाना पड़ेगा।
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