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पीएचई डेलीवेजरों का हल्ला बोल, लखनपुर से कठुआ तक रोष रैली
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:16 AM IST
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कठुआ। पिछले करीब एक सप्ताह से अपने-अपने तहसील मुख्यालय पर धरना कर रहे पीएचई डेलीवेजरों ने बुधवार को उग्र रुख अपनाते हुए राज्य के प्रवेशद्वार पर धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने लखनपुर से कठुआ में पीएचई मुख्यालय तक पैदल रोष रैली भी निकाली। 1000 से ज्यादा डेलीवेजरों ने सरकार और राज्यपाल को खरी खोटी सुनाई और कहा कि उन्हें अब किसी भी पार्टी पर भरोसा नहीं रहा है। अगर अब भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह इससे भी अधिक उग्र रुख अपनानएंगे और उसके बाद राज्य में हालात संभालने मुश्किल हो जाएंगे।
रैली का नेतृत्व कर रहे आल डेलीवेजर एसोसिएशन जम्मू के प्रधान तनवीर हुसैन ने कहा कि पिछले 50 महीनों से वेतन नहीं दिया गया है। एसआरओ 520 के नाम पर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर बार उनको इमोशनल ब्लैकमेल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि अब वे किसी की नहीं सुनेंगे। यदि मांगें पूरी करनी हैं तो बात होगी नहीं तो कोई बात नहीं होगी।
प्रदर्शनकारियों में शामिल शिव नारायण, सुरेंद्र सिंह, सुभाष सिंह ने कहा कि उनके लिए तो अपने बच्चों को पढ़ाया मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल से निकाला जा रहा है फीस लाने के लिए कहा जा रहा है लेकिन वह कहां से फीस दें। जब सरकार ही उन्हें वेतन नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्ट अप की बात हो रही है लेकिन जब पैसे ही नहीं होंगे तो कैसे काम चलेगा। बेटी बचाओ बेटी बचाओ की बात करते हैं, बेटी बिना फीस के स्कूल में नहीं पढ़ सकती है।
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15 सितंबर जम्मू प्रेस क्लब पर और 17 को उधमपुर में देंगे गिरफ्तारी
आल डेलीवेजर एसोसिएशन के प्रधान तनवीर हुसैन ने कहा कि डेलीवेजर सभी पार्टियों को आजमा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी उनकी मांगों को पूरा करवाने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में इन पार्टियों को यह बात जान लेनी चाहिए कि पंचायती, निकास और लोकसभा के चुनाव आने वाले हैं। यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो चुनाव में इनके लिए मुसीबत होगी। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी सत्ता में होती है तो उसे हमारी याद नहीं आती। इस समय कोई पार्टी सत्ता में नहीं है इसलिए सभी को उनकी याद आ रही है। उन्होंने कहा कि आज 1000 के करीब डेलीवेजर आए हैं और इन्हें पैसे देकर नहीं बुलाया गया है। अगर अब भी समझ नहीं आ रहा तो ठीक है। 15 सितंबर को जम्मू प्रेस क्लब के बाहर और 17 सितंबर को उधमपुर में गिरफ्तारियां देकर समझाया जाएगा। अब यह आंदोलन रुकेगा नहीं। जरूरत हुई तो पीएमओ का भी घेराव किया जाएगा।
रिजेक्ट हो रही फाइलें
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य में सभी विभागों के करीब 64 हजार डेलीवेजर कर्मचारी हैं और पीएचई के 22 हजार के करीब कर्मचारी है। एसआरओ 520 के लिए उनकी फाइलों को रिजेक्ट किया जा रहा है। वेतन के नाम पर उनके वाउचर रिजेक्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही करना है तो सरकार उन्हें साफ साफ बता दे कि उन्हें एसआरओ 520 का लाभ नहीं दिया जाएगा।
जिले के डेलीवेजरों का 29 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया
पीएचई विभाग डेलीवेजरों से कई तरह के काम लेता है। उनसे दिन भर काम करवाता है, तब उनको 150 रुपये दिहाड़ी देता है। इस तरह महीने में उनकी 4500 रुपये पगार बनती है। इतनी कम दिहाड़ी पर वर्कर्स के लिए परिवार का भरण पोषण करना बहुत मुश्किल है। इसके बावजूद दिहाड़ीदारों का सरकार से सेलरी बढ़ाने पर उतना जोर नहीं है, जितना अपना बकाया वेतन जारी करने पर। उनका कहना है कि यह सही बात है कि 4500 रुपये में वे न तो अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकते हैं और न अपने बच्चों को ठीक से पढ़ा सकते हैं, लेकिन सरकार इतनी कम दिहाड़ी देने में भी आनाकानी करती है। 50 महीने से दिहाड़ीदारों को एक पैसा नहीं मिला। इसीलिए वे चाहते हैं सरकार उनका बकाया जारी करे, ताकि वे उधार पर चल रही जिंदगी को पटरी पर ला सकें।
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रैली का नेतृत्व कर रहे आल डेलीवेजर एसोसिएशन जम्मू के प्रधान तनवीर हुसैन ने कहा कि पिछले 50 महीनों से वेतन नहीं दिया गया है। एसआरओ 520 के नाम पर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर बार उनको इमोशनल ब्लैकमेल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि अब वे किसी की नहीं सुनेंगे। यदि मांगें पूरी करनी हैं तो बात होगी नहीं तो कोई बात नहीं होगी।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल शिव नारायण, सुरेंद्र सिंह, सुभाष सिंह ने कहा कि उनके लिए तो अपने बच्चों को पढ़ाया मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल से निकाला जा रहा है फीस लाने के लिए कहा जा रहा है लेकिन वह कहां से फीस दें। जब सरकार ही उन्हें वेतन नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्ट अप की बात हो रही है लेकिन जब पैसे ही नहीं होंगे तो कैसे काम चलेगा। बेटी बचाओ बेटी बचाओ की बात करते हैं, बेटी बिना फीस के स्कूल में नहीं पढ़ सकती है।
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15 सितंबर जम्मू प्रेस क्लब पर और 17 को उधमपुर में देंगे गिरफ्तारी
आल डेलीवेजर एसोसिएशन के प्रधान तनवीर हुसैन ने कहा कि डेलीवेजर सभी पार्टियों को आजमा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी उनकी मांगों को पूरा करवाने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में इन पार्टियों को यह बात जान लेनी चाहिए कि पंचायती, निकास और लोकसभा के चुनाव आने वाले हैं। यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो चुनाव में इनके लिए मुसीबत होगी। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी सत्ता में होती है तो उसे हमारी याद नहीं आती। इस समय कोई पार्टी सत्ता में नहीं है इसलिए सभी को उनकी याद आ रही है। उन्होंने कहा कि आज 1000 के करीब डेलीवेजर आए हैं और इन्हें पैसे देकर नहीं बुलाया गया है। अगर अब भी समझ नहीं आ रहा तो ठीक है। 15 सितंबर को जम्मू प्रेस क्लब के बाहर और 17 सितंबर को उधमपुर में गिरफ्तारियां देकर समझाया जाएगा। अब यह आंदोलन रुकेगा नहीं। जरूरत हुई तो पीएमओ का भी घेराव किया जाएगा।
रिजेक्ट हो रही फाइलें
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य में सभी विभागों के करीब 64 हजार डेलीवेजर कर्मचारी हैं और पीएचई के 22 हजार के करीब कर्मचारी है। एसआरओ 520 के लिए उनकी फाइलों को रिजेक्ट किया जा रहा है। वेतन के नाम पर उनके वाउचर रिजेक्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही करना है तो सरकार उन्हें साफ साफ बता दे कि उन्हें एसआरओ 520 का लाभ नहीं दिया जाएगा।
जिले के डेलीवेजरों का 29 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया
पीएचई विभाग डेलीवेजरों से कई तरह के काम लेता है। उनसे दिन भर काम करवाता है, तब उनको 150 रुपये दिहाड़ी देता है। इस तरह महीने में उनकी 4500 रुपये पगार बनती है। इतनी कम दिहाड़ी पर वर्कर्स के लिए परिवार का भरण पोषण करना बहुत मुश्किल है। इसके बावजूद दिहाड़ीदारों का सरकार से सेलरी बढ़ाने पर उतना जोर नहीं है, जितना अपना बकाया वेतन जारी करने पर। उनका कहना है कि यह सही बात है कि 4500 रुपये में वे न तो अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकते हैं और न अपने बच्चों को ठीक से पढ़ा सकते हैं, लेकिन सरकार इतनी कम दिहाड़ी देने में भी आनाकानी करती है। 50 महीने से दिहाड़ीदारों को एक पैसा नहीं मिला। इसीलिए वे चाहते हैं सरकार उनका बकाया जारी करे, ताकि वे उधार पर चल रही जिंदगी को पटरी पर ला सकें।