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नया साल नई उम्मीदों और रोशनी के नाम
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कठुआ। नये साल में 120 नेत्र रोगियों की आंखों में रोशनी लौट सकती है। इसलिए नया साल उनके लिए नई उम्मीदों और रोशनी के नाम। दरअसल दौला माता चेरिटेबल ट्रस्ट, जो अब तक 180 ऐसे लोगों की आंखों की रोशनी लौटा चुका है, उसने पिछले साल के अंतिम हफ्ते में 120 नेत्ररोगियों की आंखों के आपरेशन के लिए उन्हें जम्मू भेजा है। अब तक 10 लोगों का सफल आपरेशन हो चुका है, अन्य लोगों के लिए भी आपरेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है 2019 का नया साल जम्मू भेजे गए सभी ऐसे 120 लोगों की आखों में नई उम्मीदें और रोशनी लेकर आएगा।
चार साल में डुग्गन ब्लाक के दौला माता मंदिर कमेटी के प्रयास से 180 लोगों की आंखों की रोशनी लौटी है। दौला माता चेरिटेबल ट्रस्ट 2008 से लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने के काम में जुटी है। इसके लिए बाकायदा हर वर्ष बनी, डुग्गन, बिलावर आदि स्थानों से ऐसे लोगों की सूची तैयार की जाती है, जो नेत्र रोग से ग्रस्त होते हैं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए बनी से जम्मू ले जाया जाता है। वहां बीस दिन तक रहने, खाने की व्यवस्था, दवाइयों से लेकर आपरेशन तक का खर्चा दौला माता मंदिर के सेवक उठाते हैं।
पिछले साल के अंतिम सप्ताह में 120 ऐसे मरीजों की आंखों के इलाज के लिए दौला माता चेरिटेबल ट्रस्ट ने उन्हें जम्मू भेजा। उन्हें लेकर ट्रस्ट के सदस्य बनी से जम्मू गए थे। मंगलवार को इनमें से दस मरीजों के सफल आपरेशन हुए। मंदिर वेल्फेयर ट्रस्ट दौला माता के चेयरमैन गौरी शंकर ने बताया कि माता की असीम कृपा और अनुकंपा से पिछले चार साल से यह सेवा जारी है। मां चंडी का रूप दौला माता में हर साल हजारों की तादाद में भक्त दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। दूरदराज के दुर्गम इलाके के इस यात्रा में जहां आज तक वाहन नहीं पहुंच पाए हैं, वहां मंदिर वेल्फेयर कमेटी की ओर से भक्तों के रहने खाने और ठहरने की व्यवस्था भी की जाती है। वर्ष 2014 से नेत्र जांच शिविर आयोजित करने और निशुल्क जांच के साथ आपरेशन करवाने का सिलसिला भी शुरू हुआ। इलाका दूरदराज का है, ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव में ही उपलब्ध करवा पाना मुनासिब नहीं है। ऐसे में जम्मू में डॉ. सतीश गुप्ता के सहयोग से कैंप लगाया जाता है।
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चार साल में डुग्गन ब्लाक के दौला माता मंदिर कमेटी के प्रयास से 180 लोगों की आंखों की रोशनी लौटी है। दौला माता चेरिटेबल ट्रस्ट 2008 से लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने के काम में जुटी है। इसके लिए बाकायदा हर वर्ष बनी, डुग्गन, बिलावर आदि स्थानों से ऐसे लोगों की सूची तैयार की जाती है, जो नेत्र रोग से ग्रस्त होते हैं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए बनी से जम्मू ले जाया जाता है। वहां बीस दिन तक रहने, खाने की व्यवस्था, दवाइयों से लेकर आपरेशन तक का खर्चा दौला माता मंदिर के सेवक उठाते हैं।
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पिछले साल के अंतिम सप्ताह में 120 ऐसे मरीजों की आंखों के इलाज के लिए दौला माता चेरिटेबल ट्रस्ट ने उन्हें जम्मू भेजा। उन्हें लेकर ट्रस्ट के सदस्य बनी से जम्मू गए थे। मंगलवार को इनमें से दस मरीजों के सफल आपरेशन हुए। मंदिर वेल्फेयर ट्रस्ट दौला माता के चेयरमैन गौरी शंकर ने बताया कि माता की असीम कृपा और अनुकंपा से पिछले चार साल से यह सेवा जारी है। मां चंडी का रूप दौला माता में हर साल हजारों की तादाद में भक्त दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। दूरदराज के दुर्गम इलाके के इस यात्रा में जहां आज तक वाहन नहीं पहुंच पाए हैं, वहां मंदिर वेल्फेयर कमेटी की ओर से भक्तों के रहने खाने और ठहरने की व्यवस्था भी की जाती है। वर्ष 2014 से नेत्र जांच शिविर आयोजित करने और निशुल्क जांच के साथ आपरेशन करवाने का सिलसिला भी शुरू हुआ। इलाका दूरदराज का है, ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव में ही उपलब्ध करवा पाना मुनासिब नहीं है। ऐसे में जम्मू में डॉ. सतीश गुप्ता के सहयोग से कैंप लगाया जाता है।
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