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सीमा के लोगों का दर्द जानने पहुंचे पीएमओ मंत्री के खिलाफ फूटा गुस्सा,
Updated Sun, 27 May 2018 01:28 AM IST
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कठुआ/हीरानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी का दंश झेल रहे लोगों का हाल जानने के लिए पीएमओ राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह शनिवार को हीरानगर सेक्टर पहुंचे। छन्न खत्रियां सरकारी स्कूल में बने राहत शिविर में लोगों से व्यवस्था जानने पहुंचे मंत्री पर लोगों ने उनकी बात न सुनने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
बार्डर यूनियन के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ अपने मन की बात सुनाते हैं वैसे ही पीएमओ मंत्री ने अपनी बात सुनाई और सीमावर्ती लोगों की बात सुने बिना ही चले गए। इससे पहले मंत्री का काफिला कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच राहत शिविर पहुंचा। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. देविंद्र कुमार मनियाल, हीरानगर विधायक कुलदीप राज, मंडलायुक्त, डीसी, एसडीएम और पुलिस के आला अधिकारी पहुंचे।
बार्डर यूनियन के पदाधिकारी भारत भूषण ने कहा कि पीएमओ मंत्री को सीमावर्ती लोगों की बात सुननी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने किनारा कर लिया, और लोगों को नेतागिरी न करने की सलाह दे रहे हैं। इन्हें यह सोचना चाहिए कि सीमा पर गोलाबारी का दंश झेल रहे लोग अपना दुखड़ा उन्हें सुनाने पहुंचे थे नेतागिरी करने नहीं। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में राहत शिविर बनाया गया है वहां चारदीवारी तक नहीं है। मंत्री कहते हैं कि सेना ने पांच-पांच मरले के प्लाट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने हैरत जाहिर करते हुए कहा कि समझ नहीं आता है कि सरकार फौज के अधीन है या फौज सरकार के। उन्होंने कहा कि क्या मंत्री यहां लोगों को एक साथ बिठाकर फोटो खिंचवाना ही पहुंचे थे। जो फल आदि बांटे गए उसका सीमावर्ती लोग क्या करेंगे जब इसी तरह से लोग मरते रहेंगे?
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बंकर और बार्डर भवन का फिर आश्वासन दे गए पीएमओ मंत्री
छन्न खत्रियां सरकारी स्कूल में राहत शिविर में पहुंचे पीएमओ मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोगों को बताया कि पांच-पांच मरले के प्लाट की बात दस साल से वे उठा रहे थे। इसके लिए बाकायदा चार साल पहले 80 कनाल भूमि भी चिह्नित कर ली गई थी, लेकिन इसी बीच सेना ने आपत्ति जताई थी कि यदि लोगों को प्लाट दिए जाएंगे तो बार्डर खाली हो जाएगा। पीएमओ मंत्री ने लोगों को बताया कि बंकर का काम एक तरफ से शुरू हुआ और दोनों तरफ से शुरू करने के लिए कहा गया। पहले बात सामुदायिक बंकर बनाने की चली थी जो पांच या दस घरों के लिए एक बनना था। हमने कहा कि गोलाबारी अचानक शुरू हो गई तो दौड़ते-दौड़ते मुश्किल हो जाती है, जिसके बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सामने भी बात रखी।
मंत्री ने बताया कि गृहमंत्री ने कहा कि हर घर के लिए बंकर बनाएंगे तो पैसा कहां से आएगा, जिसके बाद लोगों की परेशानी को हल करने की मांग उनके सामने उठाई गई थी। पीएमओ मंत्री ने कहा कि उन्नीस हजार बंकर घरों में ही बनेंगे। दो तीन घरों के लिए एक और अकेले घर के लिए भी बनेगा। काम शुरू हो चुका था, लेकिन गोलाबारी शुरू हो गई। कई जगह बंकर में बरसात का पानी भर गया। केंद्र से टीम आई थी और फिर आने वाली थी, लेकिन गोलाबारी के बाद नहीं आ पाई। उन्होंने कहा कि सुरक्षित जगह पर जो छोटे-छोटे मकान बनाकर दिए जा रहे हैं वही बार्डर भवन हैं।
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मंत्री जी पांच-पांच मरले प्लाट के लिए कोई अपनी जमीन और मकान क्यों छोड़ेगा ?
बार्डर यूनियन के लोगों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पांच-पांच मरले के प्लाट के लिए कोई मकान और जमीन नहीं छोड़ने वाला है। जब भी हालात खराब होते हैं तो लोगों के पास कोई विकल्प नहीं रहता। सीमावर्ती लोगों का सरकार ने तमाशा बनाकर रख दिया है। जब भी मंत्री आते हैं तो कहते हैं कि बंकर बनाने जा रहे हैं आज तक यहां के लोगों को एक भी बंकर नहीं मिला तो कैसे मान लें कि बंकर बनने जा रहे हैं। उस पर हीरानगर में बनने वाले बंकरों की संख्या भी घटा दी गई है। यूनियन के सदस्यों ने कहा कि सरकार को पहले इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि गोलाबारी के डर से जो लोग समृद्घ थे वो पहले ही घर बार छोड़कर कहीं और बस चुके हैं। यहां जो लोग रह गए हैं वो किसान और मध्यम वर्ग के लोग हैं जिन्हें सरकार से उम्मीद थी जो अब टूट चुकी है।
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पीएमओ मंत्री से मदद की आस लगाए राहत शिविर में ठहरी सीमावर्ती इलाके की महिलाओं का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि मंत्री जी! बार्डर पर अपने सामने इंसानों की मौत हो यह अब नहीं देखी जाती। छोटे छोटे बच्चे दरबदर हो रहे हैं। एक महिला ने बताया कि दस साल हो गए शादी को, लेकिन यही हालात देखे हैं। पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। पांच पांच मरलेे के प्लाट की मांग की थी लेकिन वो भी पूरी नहीं हुई।
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पीएमओ मंत्री जी ऐसे प्रबंध किए जाएं, किसी मां की कोख न खाली हो, किसी का सुहाग ने उजडे़
पीएमओ मंत्री को दुखड़ा सुनाते हुए एक महिला ने कहा कि सर हम पाकिस्तान के जुल्म कब तक सहेंगे? हम नहीं चाहते किसी मां की कोख उजड़े या सुहाग उजड़े। उनको मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए। हम अत्याचार सहन नहीं कर सकते। सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। पीएमओ मंत्री ने कहा कि बार्डर के लोग दिन रात के सिपाही हैं। चौबीस घंटे आप लोग गोलाबारी झेल रहे हैं। अचानक जो हुआ उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। गोलाबारी में मारे गए रामपाल के लिए मकान बनाने, सांसद होने के नाते उनके परिवार की जिम्मेदारी की पीएमओ मंत्री ने घोषणा की।
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बार्डर यूनियन के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ अपने मन की बात सुनाते हैं वैसे ही पीएमओ मंत्री ने अपनी बात सुनाई और सीमावर्ती लोगों की बात सुने बिना ही चले गए। इससे पहले मंत्री का काफिला कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच राहत शिविर पहुंचा। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. देविंद्र कुमार मनियाल, हीरानगर विधायक कुलदीप राज, मंडलायुक्त, डीसी, एसडीएम और पुलिस के आला अधिकारी पहुंचे।
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बार्डर यूनियन के पदाधिकारी भारत भूषण ने कहा कि पीएमओ मंत्री को सीमावर्ती लोगों की बात सुननी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने किनारा कर लिया, और लोगों को नेतागिरी न करने की सलाह दे रहे हैं। इन्हें यह सोचना चाहिए कि सीमा पर गोलाबारी का दंश झेल रहे लोग अपना दुखड़ा उन्हें सुनाने पहुंचे थे नेतागिरी करने नहीं। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में राहत शिविर बनाया गया है वहां चारदीवारी तक नहीं है। मंत्री कहते हैं कि सेना ने पांच-पांच मरले के प्लाट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने हैरत जाहिर करते हुए कहा कि समझ नहीं आता है कि सरकार फौज के अधीन है या फौज सरकार के। उन्होंने कहा कि क्या मंत्री यहां लोगों को एक साथ बिठाकर फोटो खिंचवाना ही पहुंचे थे। जो फल आदि बांटे गए उसका सीमावर्ती लोग क्या करेंगे जब इसी तरह से लोग मरते रहेंगे?
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बंकर और बार्डर भवन का फिर आश्वासन दे गए पीएमओ मंत्री
छन्न खत्रियां सरकारी स्कूल में राहत शिविर में पहुंचे पीएमओ मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोगों को बताया कि पांच-पांच मरले के प्लाट की बात दस साल से वे उठा रहे थे। इसके लिए बाकायदा चार साल पहले 80 कनाल भूमि भी चिह्नित कर ली गई थी, लेकिन इसी बीच सेना ने आपत्ति जताई थी कि यदि लोगों को प्लाट दिए जाएंगे तो बार्डर खाली हो जाएगा। पीएमओ मंत्री ने लोगों को बताया कि बंकर का काम एक तरफ से शुरू हुआ और दोनों तरफ से शुरू करने के लिए कहा गया। पहले बात सामुदायिक बंकर बनाने की चली थी जो पांच या दस घरों के लिए एक बनना था। हमने कहा कि गोलाबारी अचानक शुरू हो गई तो दौड़ते-दौड़ते मुश्किल हो जाती है, जिसके बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सामने भी बात रखी।
मंत्री ने बताया कि गृहमंत्री ने कहा कि हर घर के लिए बंकर बनाएंगे तो पैसा कहां से आएगा, जिसके बाद लोगों की परेशानी को हल करने की मांग उनके सामने उठाई गई थी। पीएमओ मंत्री ने कहा कि उन्नीस हजार बंकर घरों में ही बनेंगे। दो तीन घरों के लिए एक और अकेले घर के लिए भी बनेगा। काम शुरू हो चुका था, लेकिन गोलाबारी शुरू हो गई। कई जगह बंकर में बरसात का पानी भर गया। केंद्र से टीम आई थी और फिर आने वाली थी, लेकिन गोलाबारी के बाद नहीं आ पाई। उन्होंने कहा कि सुरक्षित जगह पर जो छोटे-छोटे मकान बनाकर दिए जा रहे हैं वही बार्डर भवन हैं।
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मंत्री जी पांच-पांच मरले प्लाट के लिए कोई अपनी जमीन और मकान क्यों छोड़ेगा ?
बार्डर यूनियन के लोगों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पांच-पांच मरले के प्लाट के लिए कोई मकान और जमीन नहीं छोड़ने वाला है। जब भी हालात खराब होते हैं तो लोगों के पास कोई विकल्प नहीं रहता। सीमावर्ती लोगों का सरकार ने तमाशा बनाकर रख दिया है। जब भी मंत्री आते हैं तो कहते हैं कि बंकर बनाने जा रहे हैं आज तक यहां के लोगों को एक भी बंकर नहीं मिला तो कैसे मान लें कि बंकर बनने जा रहे हैं। उस पर हीरानगर में बनने वाले बंकरों की संख्या भी घटा दी गई है। यूनियन के सदस्यों ने कहा कि सरकार को पहले इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि गोलाबारी के डर से जो लोग समृद्घ थे वो पहले ही घर बार छोड़कर कहीं और बस चुके हैं। यहां जो लोग रह गए हैं वो किसान और मध्यम वर्ग के लोग हैं जिन्हें सरकार से उम्मीद थी जो अब टूट चुकी है।
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पीएमओ मंत्री से मदद की आस लगाए राहत शिविर में ठहरी सीमावर्ती इलाके की महिलाओं का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि मंत्री जी! बार्डर पर अपने सामने इंसानों की मौत हो यह अब नहीं देखी जाती। छोटे छोटे बच्चे दरबदर हो रहे हैं। एक महिला ने बताया कि दस साल हो गए शादी को, लेकिन यही हालात देखे हैं। पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। पांच पांच मरलेे के प्लाट की मांग की थी लेकिन वो भी पूरी नहीं हुई।
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पीएमओ मंत्री जी ऐसे प्रबंध किए जाएं, किसी मां की कोख न खाली हो, किसी का सुहाग ने उजडे़
पीएमओ मंत्री को दुखड़ा सुनाते हुए एक महिला ने कहा कि सर हम पाकिस्तान के जुल्म कब तक सहेंगे? हम नहीं चाहते किसी मां की कोख उजड़े या सुहाग उजड़े। उनको मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए। हम अत्याचार सहन नहीं कर सकते। सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। पीएमओ मंत्री ने कहा कि बार्डर के लोग दिन रात के सिपाही हैं। चौबीस घंटे आप लोग गोलाबारी झेल रहे हैं। अचानक जो हुआ उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। गोलाबारी में मारे गए रामपाल के लिए मकान बनाने, सांसद होने के नाते उनके परिवार की जिम्मेदारी की पीएमओ मंत्री ने घोषणा की।