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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Helicopter accident: The search for the missing pilots continued on the ninth day, but did not get success

हेलिकॉप्टर हादसा: लापता पायलटों की तलाश में नौवें दिन भी चला अभियान, नहीं मिली सफलता

Wed, 11 Aug 2021 07:41 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 11 Aug 2021 07:41 PM IST
सार

सेना ने रिमोट संचालित वाहन को अभियान पूरा करने के लिए उतारा। हेलिकॉप्टर में लेफ्टिनेंट कर्नल और कैप्टन रैंक के पायलट थे सवार।

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Helicopter accident: The search for the missing pilots continued on the ninth day, but did not get success
कठुआ में सेना का चॉपर दुर्घटनाग्रस्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रंजीत सागर झील में सेना के रुद्र हेलिकॉप्टर हादसे के नौवें दिन मलबे को तलाश लिया गया है। झील की सतह से 80 मीटर की गहराई में मलबे की पहचान की गई है। अब इस मलबे को बाहर निकालने के लिए रिमोट संचालित वाहन को झील में उतारा गया है। सेना की पश्चिमी कमान की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई है।

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हेलिकॉप्टर में हादसे के वक्त लेफ्टिनेंट कर्नल और कैप्टन रैंक के दो पायलट सवार थे जो लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी और दिक्कतों को देखते हुए इस्राइल से मदद लेने की बात चल रही थी, इसी बीच हेलिकॉप्टर के मलबे की पहचान होने से यह अभियान अंतिम चरण में पहुंच गया है।
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सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रंजीत सागर झील के जिस हिस्से में तीन अगस्त की सुबह हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ था उसके नजदीक ही हेलिकॉप्टर के शेष हिस्से की पहचान हो गई है। इससे पहले सेना की ओर से आधिकारिक बयान में 60 बाई 60 मीटर के क्षेत्र को चिह्नित किए जाने और व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की बात कही गई थी। थल, वायु और नौसेना समेत आपदा प्रबंधन से जुड़े अन्य संगठन लगातार अभियान को चला रहे हैं।
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मामून से अभियान की जानकारी ले रहे परिजन
हेलिकॉप्टर में हादसे के वक्त सवार दोनों पायलटों के परिजन वर्तमान में मामून छावनी में अभियान की लगातार जानकारी ले रहे हैं। जैसे अभियान लंबा खिंचता जा रहा था, परिवार के सदस्यों की बैचेनी बढ़ती गई और उन्हें निराश होना पड़ रहा था।

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इसी स्क्वाड्रन का एक अन्य रुद्र हेलिकॉप्टर जनवरी में हो गया था क्रैश
हादसे का शिकार हुए रुद्र हेलिकॉप्टर ने प्रशिक्षण के लिए मामून छावनी से उड़ान भरी थी। दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले यह हेलिकॉप्टर झील की सतह से कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था। 3 अगस्त को सुबह 10.43 बजे यह हेलिकॉप्टर झील में समा गया था। हेलिकॉप्टर सेना के पठानकोट स्थित 254 एएलएच-डब्लूएसआई स्क्वाड्रन का था। इसी स्कवाड्रन का एक रुद्र हेलिकॉप्टर इसी वर्ष जनवरी में लखनपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

तीन अगस्त की सुबह हेलिकॉप्टर क्रैश होने की सूचना के बाद व्यापक स्तर पर चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हेलिकॉप्टर के कुछ टूटे हुए हिस्से के साथ अन्य सामान मिला था। इसमें पायलटों की हेल्मेट, पिट्ठू बैग सहित जूते भी झील की सतह पर मिले थे। इसके बाद से 25 किमी लंबे, 8 किमी चौड़े और 510 फुट गहरी रंजीत सागर झील में पायलटों की तलाश का अभियान जारी है।

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