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Jammu-Kashmir Assembly : विधानसभा का बजट सत्र कल से, सीएम उमर अब्दुल्ला ने की उपराज्यपाल सिन्हा से मुलाकात
Sun, 02 Mar 2025 12:56 AM IST
श्याम जी.
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
Published by: श्याम जी.
Updated Sun, 02 Mar 2025 12:56 AM IST
सार
विधानसभा सत्र का पहला चरण तीन मार्च से शुरू होकर 25 मार्च तक का होगा। दूसरा चरण 7 अप्रैल से 11 अप्रैल तक चलेगा। दोनों चरणों के बीच में छह सार्वजनिक अवकाश पड़ रहे हैं। सत्र की शुरुआत सोमवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अभिभाषण से होगी।
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विधानसभा का बजट सत्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का पहला बजट सत्र सोमवार से शुरू होगा। सत्र से पहले शनिवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर बजट से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। सात मार्च को मुख्यमंत्री 2025-26 का आम बजट प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही 2024-25 का अनुपूरक बजट भी पेश करेंगे। वर्ष 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले जम्मू-कश्मीर विधान सभा का बजट पेश किया गया था।
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विधानसभा सत्र का पहला चरण तीन मार्च से शुरू होकर 25 मार्च तक का होगा। दूसरा चरण 7 अप्रैल से 11 अप्रैल तक चलेगा। दोनों चरणों के बीच में छह सार्वजनिक अवकाश पड़ रहे हैं। सत्र की शुरुआत सोमवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अभिभाषण से होगी। अगले तीन दिन चार से छह मार्च तक एलजी के अभिभाषण पर चर्चा होगी व धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाएगा। सात मार्च को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आम बजट प्रस्तुत करेंगे। वहीं, चालू वित्त वर्ष के खर्चों को पूरा करने के लिए सरकार अनुपूरक बजट भी लाएगी। वर्ष 2024-25 का बजट 1,18,486 करोड़ का था। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में विधानसभा और एक निर्वाचित सरकार की अनुपस्थिति में 2019 से लेकर 2024 तक जम्मू-कश्मीर का बजट संसद द्वारा ही पारित किया गया।
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विभागीय बजट पर विस्तार से होगी चर्चा
आठ और 10 मार्च तक बजट पर सामान्य चर्चा होगी। 11 मार्च को चर्चा के साथ जवाब दिया जाएगा। इसके बाद नौ दिन विभागीय बजट पर विस्तार से चर्चा के लिए दिन तय किए गए हैं। विनियोग विधेयक प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में दोनों पक्षों के सदस्यों को अपना कोई निजी बिल या प्रस्ताव लाने का समय निर्धारित किया गया है। यदि कोई सदस्य निजी बिल या प्रस्ताव लेकर आता है तो अध्यक्ष की मंजूरी से उस पर चर्चा की जाएगी। सत्र के अंतिम दिन सरकार की ओर से विधेयक व अध्यादेश या फिर विधान सभा की समिति की कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सकती है।
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