{"_id":"5911b5294f1c1b0a13851a50","slug":"expensive-stunts-in-private-hospitals-will-be-examined-by-sog","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी अस्पतालों में महंगे स्टंट, जांच करेगी SOG ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी अस्पतालों में महंगे स्टंट, जांच करेगी SOG
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 09 May 2017 07:10 PM IST
विज्ञापन
court
राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों की ओर से हृदय रोगियों के लगाए जाने वाले स्टंट की कीमतों की जांच के लिए एसओजी को आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि इसके लिए एडीजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एसओजी की टीम गठित की जाए, जिसमें ड्रग कंट्रोलर व विशेषज्ञ चिकित्सक को शामिल किया जाए।
न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश ज्ञानेन्द्र कुमार पारीक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने एसओजी की ओर से गठित होने वाली टीम को कहा है कि वह सभी निजी अस्पतालों में स्टंट की कीमतों की जांच करे और जांच रिपोर्ट के साथ अपनी सिफारिशें 5 जुलाई तक पेश करे। वहीं, अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि इसकी कीमतें नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि मरीजों का राज्य सरकार और बीमा से पुनर्भरण होने का मतलब यह नहीं है कि अस्पताल मनमानी दरों पर स्टंट लगाएं।
याचिका में अधिवक्ता कैलाश शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी है। उसने एसआर कल्ला अस्पताल में स्टंट लगवाया था। अस्पताल प्रशासन ने स्टंट की कीमत चार लाख 90 हजार रुपए वसूलते हुए कुल पांच लाख 36 हजार रुपए लिए। वहीं, राज्य सरकार ने उसका केवल ढाई लाख रुपए की राशि का पुनर्भरण किया। याचिका में कहा गया कि नियमानुसार दवाइयों और लगने वाले उपकरण का सौ फीसदी तथा जांच का अस्सी फीसदी राशि का पुनर्भरण होता है।
विज्ञापन
ऐसे में उसे पूरे इलाज राशि का पुनर्भरण किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने एसओजी की टीम गठित कर निजी अस्पतालों की ओर से स्टंट की वसूली जा रही कीमतों की जांच के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश ज्ञानेन्द्र कुमार पारीक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने एसओजी की ओर से गठित होने वाली टीम को कहा है कि वह सभी निजी अस्पतालों में स्टंट की कीमतों की जांच करे और जांच रिपोर्ट के साथ अपनी सिफारिशें 5 जुलाई तक पेश करे। वहीं, अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि इसकी कीमतें नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि मरीजों का राज्य सरकार और बीमा से पुनर्भरण होने का मतलब यह नहीं है कि अस्पताल मनमानी दरों पर स्टंट लगाएं।
विज्ञापन
याचिका में अधिवक्ता कैलाश शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी है। उसने एसआर कल्ला अस्पताल में स्टंट लगवाया था। अस्पताल प्रशासन ने स्टंट की कीमत चार लाख 90 हजार रुपए वसूलते हुए कुल पांच लाख 36 हजार रुपए लिए। वहीं, राज्य सरकार ने उसका केवल ढाई लाख रुपए की राशि का पुनर्भरण किया। याचिका में कहा गया कि नियमानुसार दवाइयों और लगने वाले उपकरण का सौ फीसदी तथा जांच का अस्सी फीसदी राशि का पुनर्भरण होता है।
विज्ञापन
ऐसे में उसे पूरे इलाज राशि का पुनर्भरण किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने एसओजी की टीम गठित कर निजी अस्पतालों की ओर से स्टंट की वसूली जा रही कीमतों की जांच के आदेश दिए हैं।