UPSC Result 2024: सहायक लेखा अधिकारी अक्षत को पांचवें प्रयास में मिली सफलता, बोले-शिमला रहा मेरे लिए लक्की
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कोटी गांव के रहने वाले अक्षत कुटियाल ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा में पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर ली है। अपनी इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए अक्षत ने शिमला को अपने लिए भाग्यशाली बताया।
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हिमाचल प्रदेश महालेखाकार कार्यालय शिमला में सहायक लेखा अधिकारी अक्षत कुटियाल ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा में पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर ली है। उन्होंने 908वां रैंक प्राप्त किया है। मूल रूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कोटी गांव के रहने वाले अक्षत 19 अक्टूबर 2023 को शिमला कार्यालय में तैनात हुए थे। अपनी इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए अक्षत ने शिमला को अपने लिए भाग्यशाली बताया। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में अपनी सफलता का रहस्य साझा करते हुए कहा कि वे नौकरी के साथ-साथ प्रतिदिन कम से कम दो घंटे यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करते थे। शनिवार और रविवार की छुट्टी के दिनों में वे पूरा समय पढ़ाई को समर्पित करते थे। उन्होंने सामयिक विषयों और दैनिक घटनाओं से संबंधित खबरों को नियमित रूप से पढ़ा और सोशल मीडिया का उपयोग केवल परीक्षा की तैयारी के लिए ही किया।
अक्षत की स्कूली शिक्षा देहरादून में हुई और उन्होंने प्रतिष्ठित आईआईटी धनबाद से बीटेक की डिग्री प्राप्त की है। उनके पिता गणेश सिंह कुटियाल ने बेटे की इस सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे उनकी कड़ी मेहनत और लक्ष्य के प्रति ईमानदार प्रयासों का परिणाम बताया। अक्षत की बहन बेंगलूरू में एक कंपनी में लीगल एसोसिएट हैं। अक्षत ने अपनी मेहनत से प्रशासनिक सेवाओं में जाने के अपने सपने को साकार किया है और उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और अब वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से प्रशासनिक सेवा में कार्य करना चाहते हैं।
झंडूता के 23 वर्षीय वैभव सिंह ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के अपने पहले ही प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 82वां स्थान हासिल कर हिमाचल को गौरवान्वित किया है। वैभव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा स्व. गोवर्धन सिंह की प्रेरणा, माता-पिता के सहयोग और अमर उजाला अखबार की खबरों को दिया।
उन्होंने बताया कि उनके दादा हमेशा अमर उजाला पढ़ते थे और उन्हें भी साथ में अखबार पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे, जिससे उन्हें देश-दुनिया की परिस्थितियों और समाज में बदलाव की समझ विकसित हुई। वैभव ने नियमित रूप से 8 से 10 घंटे पढ़ाई की, जिसमें रात का शांत माहौल उनकी एकाग्रता बढ़ाने में सहायक रहा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल रोहडू और दसवीं खलीनी पब्लिक स्कूल शिमला से हुई। कला विषय में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने 2020 में सीबीएसई बोर्ड में प्रदेश में टॉप किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की।
एक शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखने वाले वैभव के पिता वीरेंद्र सिंह एक स्कूल में प्रधानाचार्य हैं और माता डॉ. मोनिका राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर में भौतिकी की प्रोफेसर हैं। उनके दादा भी शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। नाना कर्म सिंह चंदेल भी मुख्याध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हैं। वैभव ने बताया कि घर में शिक्षा का माहौल होने से लक्ष्य निर्धारित करना आसान हो गया।
वैभव ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) उनकी पहली पसंद है, जिसके माध्यम से वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने लक्ष्यों को समर्पित होकर प्राप्त करने का आग्रह किया। वैभव की इस उपलब्धि से उनके परिवार और पूरे बिलासपुर क्षेत्र में खुशी का माहौल है।