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Una News: चार माह वाली आलू की फसल ने किसानों को घाटे में डाला

Fri, 23 May 2025 02:54 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 23 May 2025 02:54 AM IST
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The four-month potato crop put farmers in losses
मंडियों में औसतन 600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिका आलू
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किसान बोले-जेब खर्च तो दूर मजदूरी चुकाने में खाली हुई जेब

कई किसानों ने फसल को दोबारा न उगाने की कही बात

पहले दो माह वाली आलू की फसल में किसानों को हुआ था आर्थिक लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में आलू की चार माह वाली फसल ने किसानों को नुकसान पहुंचाया है। मंडी में उचित दाम न मिलने से किसान हताश हैं। मंडी में फसल की कीमत 800 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिकतम रही। जबकि, औसतन 600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास आलू बिका। किसानों को 1200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास फसल बिकने की उम्मीद थी पर ऐसा नहीं हुआ। यह फसल खेतों से 100 फीसदी मंडियों तक पहुंचाई जा चुकी है।
मजदूरों और फसल तैयार करने के लिए अन्य खर्च भी पूरे करने मुश्किल हो गए। कई किसानों ने तो इस फसल को अगले वर्ष न उगाने की बात भी कही। हालांकि, इससे पहले सितंबर से नवंबर के बीच तैयार आलू की फसल में किसानों को अच्छा लाभ हुआ।
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जानकारी के अनुसार दिसंबर से अप्रैल माह के बीच आलू की चार माह वाली फसल को गेहूं के समानांतर तैयार किया जाता है। जिला में करीब 1000 हेक्टेयर जमीन में इसे तैयार किया जाता और स्वां नदी के आसपास अधिकतर खेती होती है। दो माह वाली फसल से मिले अच्छे दाम के बाद कई किसानों ने चार माह वाली फसल को तैयार करने में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन फसल को मंडियों में बुरी तरह नकारा गया।
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किसान प्रेम चंद, रविंद्र कुमार, सुनील कुमार, अमनदीप, रणवीर सिंह ने बताया कि हमारे लिए मजदूरी के पैसे देना मुश्किल हो गया। खाद और कीटनाशकों सहित अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जबकि, फसलों की कीमत तय करने को लेकर कोई व्यवस्था नहीं। किसानों ने कहा कि आलू की फसल में कभी व्यापारी पैसे देने में धोखाधड़ी कर जाते हैं और कभी मंडियों में मनमाने तरीके से फसल को खरीदा जा रहा। अगर यही स्थिति रही तो फसल को तैयार करना बंद करना पड़ेगा। कहा कि जितनी आय दो माह वाली फसल में हुई, उससे अधिक चार माह वाली में नुकसान हो गया।

पंजाब की मंडियों पर निर्भर अधिकतर किसान
जिले के अधिकतर किसान अपनी फसलों की बिक्री को लेकर पंजाब की मंडियों पर निर्भर हैं। आलू भी इन्हीं फसलों में शुमार है। आलू की अधिकतर खेप अमृतसर, लुधियाना सहित अन्य पंजाब की मंडियों में बिकती है। इसके अलावा कई बड़े किसान दिल्ली में भी फसल बिक्री के लिए भेजते हैं। फसल को इतनी दूर भिजवाने में भी किसानों के हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जबकि स्थानीय स्तर पर इसकी कोई व्यवस्था तक नहीं है।




उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिला में आलू की पैदावार अच्छी रही है। एक कनाल में 12 से 15 क्विंटल आलू का उत्पादन हुआ। कहा कि इस बार फसल के दाम कम रहे हैं। आलू की फसल में बेहतर कीमत किसानों को दिलवाने के लिए सरकार कई बड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रही हैं। जल्द उसका लाभ किसानों को मिलेगा।
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